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बिन पानी सब सून

सरकार जल दोहन रोकने के लिए निरन्तर प्रयासरत तो है, परन्तु व्यर्थ जल दोहन की जटिल समस्या का समाधान होता नजर नहीं आता। भू-जल स्तर लगातार घटता जा रहा है, लेकिन आज की युवा पीढ़ी शिक्षित होते हुए भी अपनी आदत मैं बदलाव नहीं कर पा रही है। जब तक आम आदमी की सोच शुद्ध नहीं होगी, तब तक व्यर्थ का जल दोहन नहीं रुकेगा। जल ही जीवन है, इस सत्य कथन को आज की पीढ़ी बिल्कुल ही भूल बैठी है। देश में ऐसे कई इलाके हैं, जहां लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ता है। लोग अनेक बीमारियों से ग्रस्त होते चले जा रहे हैं। हमें समय रहते व्यर्थ जल दोहन रोकने पर ध्यान देना होगा। 

जसवीर सिंह सिसोदिया, हाथरस


कब थमेगा शोषण?

आए दिन किसी न किसी जगह से बलात्कार की सूचना सुनाई दे जाती है। हमारे समाज में ऐसे-ऐसे घिनौने काम प्रतिदिन हो रहे हैं। ये सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। सरकार ने चाहे लाख कानून बनाएं हों, लेकिन इस समाज में बलात्कार करने वाले दरिंदों को कोई फर्क नहीं पड़ता। समाज में स्त्रियों का जीना मानो दूभर हो गया है। बलात्कार का भय उन्हें स्वावलंबी बनने से रोकने लगा है। कई जगह स्त्रियां समाज में अपनी पहचान बनाने से भी डरने लगी हैं। कई जगह स्त्रियां चाहकर भी अपने कदम घर से बाहर नहीं निकाल सकतीं। ऐसे में, क्या देश का विकास हो पाएगा? आज सबसे अहम मुद्दा है बलात्कार और यौन शोषण रोकना। 

वर्षा कुमारी, दिल्ली


अमेरिका का डर

उत्थान-पतन तो एक शाश्वत सत्य है, जो बहुत ऊंचा उठ गया है, उसका गिरना निश्चित है। यही हाल अमेरिका का है। एक बड़े ऊपजाऊ भूभाग को वहां के मूलनिवासियों से छीनकर, लाखों की संख्या में निर्मम हत्या कर, दुनियाभर के दर्जनों गरीब-कमजोर राष्ट्रों में दमन करके आगे बढ़ने वाला अमेरिका घबराने लगा है। उसे डर सता रहा है कि तकनीकी तरक्की के जरिए चीनी अर्थव्यवस्था कहीं अमेरिकी अर्थव्यवस्था से भी बड़ी न हो जाए। इसीलिए उसने चीनी सामान पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया है। जाहिर है, चीन भी इसका कड़े ढंग से प्रत्युत्तर देगा। सबसे बड़े दुख की बात है कि इन दो बड़ी आर्थिक महाशक्तियों के टकराव में विश्व फिर से भारी उथलपुथल से ग्रस्त हो जाएगा, जिससे आर्थिक रूप से गरीब और कमजोर देश पिस जाएंगे। अत: विश्व के समझदार लोग और संस्थान इन दोनों देशों के कर्णधारों को समझा-बुझाकर टकराव को टालने का सद्प्रयास करें, अन्यथा गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी आदि समस्याओं से ग्रस्त दुनिया और दुखी होने को मजबूर हो जाएगी। 

निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद


जीव सेवा जरूरी

तपती धरती और झुलसाती धूप के बीच जीवों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। मानव तो अपनी नाव को इस आग के दरिया में चला ही रहा है, लेकिन उन मूक प्राणियों का क्या जो अपनी समस्याओं को जगजाहिर नहीं कर पाते हैं? ताप और धूप के बीच जंगली जानवरों और र्पंरदों के संकट को आसानी से महसूस किया जा सकता है। इस तपती गर्मी में दाना-पानी के बिना तो उनकी मुसीबत बढ़ती ही है और ऊपर से बेरहम धूप से इनर्की ंजदगी पर बन आती है। इस चुनौती भरे मौसम में बहुत सारे जीव-जंतु अपनी जीवन से हाथ धो बैठते हैं। ऐसे समय में हम इन परिंदों की कुछ सहायता जरूर कर सकते हैं। हमें कुछ चावल और पानी अपने घर की छतों पर रखना चाहिए और अगर कोई जानवर हमारे घर के आसपास प्यासा है, तो उसे पानी पिलाना चाहिए। हम अपने इन्हीं छोटे प्रयासों से कई जीवन बचा सकते हैं।

धीरज पाठक, गुरहा, चैनपुर
 

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