mail box hindustan column on 12 june - गिरता भूजल स्तर DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गिरता भूजल स्तर

जिस प्रकार साल-दर-साल वर्षा में कमी आ रही है, उसी प्रकार भूजल स्तर में भी कमी आ रही है। भारत के अनेक राज्य पानी की कमी के चलते बेहाल हैं, उनमें सबसे अधिक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा और बिहार में पेयजल के लिए लोग बेहाल हैं। यहां कई कुएं सूख चुके हैं, नदियां, तालाब और पानी के अन्य स्रोत जमींदोज हो चुके हैं। बड़े शहरों और महानगरों में जिस प्रकार भूजल दोहन हो रहा है, जिस तरह से जल बर्बाद किया जा रहा है, उससे तो इन शहरों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। कुछ अधिक सम्पन्न लोग अधिक जल बर्बाद करते देखे जा रहे हैं। जमीन से 500 फीट से भी नीचे से पम्प द्वारा पानी निकालकर घरों और गाड़ियों को धोया जा रहा है तथा बेतहाशा पानी बहाया जा रहा है। कुछ अधिक दबाव पड़ने पर कार्रवाई के नाम पर सौ-पांच सौ रुपये का चालान थमाकर इतिश्री समझी जा रही है, लेकिन प्यासे लोग तो हाहाकार कर रहे हैं। मवेशी प्यास से मर रहे हैं, पर उनको इससे क्या? 

सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी


हाईटेक हों स्कूल

एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल राज्य की सभी सरकारी स्कूलों को हाईटेक बनाया जा चुका है। इसके साथ ही सरकार ने करीब 141 स्कूलों को विश्वस्तरीय बनाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन दुर्भाग्यवश देश में आज भी कई सरकारी व निजी संस्थान हैं, जो इतने हाईटेक नहीं हैं। आखिर क्यों? कई राज्यों में केवल कागजों पर बच्चों का भविष्य लिखा जा रहा है। सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत और हर मुमकिन कदम उठाने पड़ेंगे, तब कहीं हम उच्चस्तरीय शिक्षा की बात कर सकेंगे। सरकारी स्कूलों में सबसे पहले सुविधाओं और शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो, इसके बाद ही सभी सरकारी स्कूलों को हाईटेक बनाए जाने पर जोर देना चाहिए। शिक्षा सभ्य समाज का सबसे बड़ा गुरुमंत्र है, सरकार को इस ओर खुली आंखों से देखना चाहिए। 

विभाष ए जैन, पारा, मध्य प्रदेश


चीन के खिलाफ प्रदर्शन

गत रविवार को हांगकांग में 10 लाख लोगों ने चीन के खिलाफ ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। 1 जुलाई 1997 के बाद से, जब से चीन के हाथों में हांगकांग की कमान आई है, इतना बड़ा प्रदर्शन कभी नहीं हुआ था। जब तक यह ब्रिटेन का उपनिवेश था, यहां का शासन-प्रशासन पूंजीवादी लोकतंत्र की नीतियों से चल रहा था। लोग और समाज उसी संस्कृति में ढल गए थे। हस्तांतरण के समय चीन और ब्रिटेन में यह समझौता लिखित में हुआ था कि हांगकांग के मामले में चीन एक देश दो नीति के तहत काम करेगा। वर्ष 2047 तक उसे इस नियम से बंधे रहना था, लेकिन 2019 में ही चीन ने हांगकांग के लिए नई प्रत्यर्पण नीति का एलान कर दिया, जिसके तहत आरोपियों को चीन प्रत्यर्पित करके मुकदमा चलाया जा सकेगा। यह एक दमनकारी अधिनायकवादी नीति है, जिसे हांगकांग पर थोपा जा रहा है। ब्रिटेन और राष्ट्र संघ को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। 

जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर


शिक्षकों को प्रशिक्षित करें

साक्षरता दर किसी भी देश के विकास का सबसे महत्वपूर्ण सूचक होती है, पर क्या हमारा मकसद सिर्फ साक्षरता दर बढ़ाना है या सही मायने में बच्चों को शिक्षित करना है। बच्चों के संपूर्ण बौद्धिक विकास और उनकी तर्क शक्ति विकसित करने के लिए एक शिक्षक से अच्छा कोई दूसरा विकल्प हो ही नहीं सकता, अत: यह बात भी काफी आवश्यक है कि शिक्षकों को भी समय-समय पर एक दिशा-निर्देश दिया जाना चाहिए कि बच्चों की पढ़ाई को वास्तविक रूप से सार्थक कैसे बनाया जाए? शिक्षकों को ऐसी व्यवस्था जरूर उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे नई शिक्षण पद्धतियों को सीख सकें और बदलते वक्त के साथ बच्चों को कदम से कदम मिलाकर चलने की शक्ति दे सकें। 

विवेक कुमार, बंजरिया, मोतिहारी
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:mail box hindustan column on 12 june