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जाति जनगणना के मायने 

‘जाति जनगणना का अमृत और विष’ शीर्षक से प्रकाशित बद्री नारायण के लेख का सीधा सरोकार सरकार द्वारा ओबीसी समुदाय की जातिगत जनगणना से है। मोदी सरकार ने हाल ही में यह घोषणा की है कि 2021 में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी भी सार्वजनिक की जाएगी। यह जनगणना आबादी के हिसाब से ओबीसी समुदाय के नीति-निर्धारण में उचित प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करेगी। बावजूद इसके इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि चुनावी राजनीति में इस आंकड़े का व्यापक स्तर पर दुरुपयोग होगा। जाति आधारित राजनीति करने वाली राजनीतिक पार्टियों के लिए जातिगत जनगणना अमृत साबित होगी। वे अपना स्वार्थ साधने के लिए इसका इस्तेमाल करेंगी। यानी विकास योजनाओं और नीति-निर्माण में सहायक होने के साथ-साथ जाति जनगणना समाज में विद्वेष और जातीय संघर्ष को बढ़ावा देने में भी सहायक होगी। इसलिए हमें इस जनगणना को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
    कुंदन कुमार, बीएचयू, वाराणसी
kundankumar44419@gmail.com
 

परेशानी बढ़ाती महंगाई
आए दिन बढ़ रही महंगाई ने हर तरफ से परेशानी खड़ी कर दी है। खाने-पीने की चीजों से लेकर पेट्रोल-डीजल तक जरूरत की सभी चीजों पर महंगाई का दबाव बढ़ता ही जा रहा है। खास तौर से निम्न आयवर्ग के लोगों के लिए परिस्थितियां कहीं ज्यादा कठिन होती जा रही हैं। प्रशासन, बड़े अधिकारी, ऊंची कुरसी पर बैठे लोग भाषण तो खूब देते हैं, पर जमीन पर शायद ही काम होता है। महंगाई की मार ने सब कुछ धराशाई कर दिया है। इस पर तुरंत लगाम लगाना जरूरी है, तभी अपने परिवार के साथ जीवन बसर करना आसान हो सकेगा। सरकार को अति शीघ्र कोई कदम उठाना चाहिए।
    माधुरी शुक्ला, सारनाथ, वाराणसी
madhuriprakash23101961@gmail.com
 

मेट्रो महंगी क्यों 
दिल्ली मेट्रो यहां पर सार्वजनिक परिवहन की रीढ़ है। इसकी वजह भी है। सार्वजनिक परिवहन के अन्य साधनों के मुकाबले इसकी सुविधाएं   बेहतर हैं। पर अब इसका किराया बढ़कर इतना हो गया है कि इसे विश्व का दूसरा सबसे महंगा सार्वजनिक परिवहन आंका गया है। साफ है कि यह अब अच्छी आय वालों की सवारी बनकर रह गई है। मेट्रो का किराया बढ़ने से सबसे ज्यादा प्रभावित विद्यार्थी हो रहे हैं। खासतौर से ऐसे विद्यार्थी, जो कमजोर आय-वर्ग वाले परिवार से ताल्लुक रखते हैं। नतीजतन, ऐसे विद्यार्थी बस द्वारा यात्रा करने को मजबूर हैं, जिसके कारण उनकी कार्य-क्षमता पर असर पड़ रहा है। दिल्ली वालों को मेट्रो से बड़ी उम्मीदें थीं। यह सही है कि किसी परिवहन साधन को घाटा में नहीं चलना चाहिए, फिर भी अगर दिल्ली मेट्रो पर आर्थिक भार ज्यादा है, तो उसे विद्यार्थियों को कुछ राहत देनी चाहिए। आखिरकार यह देश के भविष्य का सवाल है। 
 अंजलि कुमारी, दिल्ली
anjalijhaskv2@gmail.com
 

पुलिस की आनाकानी
देश के तमाम हिस्सों से जिस प्रकार एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने के समाचार अब आम होने लगे हैं, वे साफ-साफ बताते हैं कि पुलिस का चरित्र पूरे देश में एक ही है। वह एफआईआर दर्ज करने से बचती है, ताकि थाने में अपराध का रिकॉर्ड कम हो और उसे अदालत में पैरवी न करना पडे़। इसमें देश की राजधानी दिल्ली की पुलिस भी शामिल है। गंभीर मामलों को तो छोड़िए, अगर रास्ते में कोई वारदात या छीना-झपटी होती है, तो थाने वाले उस स्थान को दूसरे थाने का बताकर अपना पल्ला झाड़ना चाहते हैं। दिलचस्प है कि यह सच्चाई आम नागरिकों को तो पता है, मगर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नहीं। क्या दिल्ली पुलिस आम नागरिकों के साथ ऐसा ही व्यवहार करती रहेगी? सरकार को सच्चाई स्वीकार करते हुए दिल्ली पुलिस की कार्य प्रणाली को सुधारना चाहिए।

सुनील कुमार जैन, दिल्ली
suneel.vastu@gmail.com

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