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झूठे आरोपों के शिकार

प्रधान न्यायाधीश को क्लीन चिट मिलने से राहत महसूस हो रही है। वाकई इस मामले ने देश में भूचाल ला दिया था। इससे हमारी न्याय-व्यवस्था की स्वतंत्रता पर खतरा पैदा हो गया था। परंतु अब सवाल यह है कि क्या इस प्रकार के झूठे मामलों में फंसाए गए आम लोगों को भी इसी प्रकार त्वरित न्याय मिल सकेगा? बलात्कार के आरोप मात्र पर कोई जांच हुए बगैर एफआईआर दर्ज कर ली जाती है और फरियादी महिला के बयान को ही अटल सत्य मानकर किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया जाता है। फिर चाहे आरोप अविश्वसनीय ही क्यों न प्रतीत होते हों! कई बार तो इस तरह के विचाराधीन कैदी फैसले के इंतजार में वर्षों तक जेल में बंद रहते हैं, और जब वे बरी होते हैं, तो भारी आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना झेलने के कारण लगभग टूट चुके होते हैं। क्या अब ऐसे कैदियों के अधिकारों की रक्षा हो सकेगी?

वरुण सक्सेना, पीलीभीत


जीत पर संदेह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इस बार लोकसभा चुनाव में 2014 के मुकाबले ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं, हालांकि उन्हीं की पार्टी के वरिष्ठ नेता इस दावे से अलग बातें कहने लगे हैं। पहले सुब्रमण्यम स्वामी, और अब राम माधव ने ऐसे संकेत दिए हैं कि भाजपा को बहुमत हासिल करने के लिए सहयोगी दलों की जरूरत पड़ सकती है। सवाल यह है कि आखिर इस बार ऐसा क्या अलग है, जो इन नेताओं को पिछली बार जैसे नतीजे न दोहराए जाने का अंदेशा है। असल में, इस बार भाजपा को कई राज्यों में विपक्षी दलों के गठबंधन से कड़ी चुनौती मिल रही है। उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा-रालोद, महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी, बिहार में कांग्रेस-राजद और झारखंड में कांग्रेस-जेएमएम जैसे गठबंधन 2014 की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत दिख रहे हैं। फिर, लोकसभा चुनाव से ऐन पहले देश के तीन हिंदीभाषी राज्यों में कांग्रेस के हाथों भाजपा को अपनी सत्ता गंवानी पड़ी थी, जिसका मतदाताओं पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ा है। इस बार 2014 जैसा राजनीतिक माहौल भी नजर नहीं आ रहा, क्योंकि मतदाता पूरी तरह से खामोश हैं। एक कारण यह भी है कि 2014 में नरेंद्र मोदी और भाजपा कांग्रेस सरकार पर हमलावर थी, लेकिन आज उन्हें अपनी सरकार के कामकाज का ब्योरा भी देना पड़ रहा है। 

अनूप कुमार, सिलिदाग, गढ़वा


एक-एक मत कीमती

रविवार 12 मई को राजधानी दिल्ली सहित सात राज्यों में मतदान होने वाला है। लोकतंत्र के इस महापर्व में देश की जनता वोट देने को उत्साहित है। जनता का एक-एक वोट पाने को सभी प्रत्याशी जोर-शोर से जुटे हैं। जाहिर है, यह समय राष्ट्र-निर्माण का है और कोई भी राष्ट्र वहां पर रहने वाले नागरिकों से बनता है। किसी भी देश के विकास में उस मुल्क में रहने वाले लोगों की अहम भूमिका होती है। हमारे एक-एक वोट से ही एक मजबूत, स्थिर और देशहित में अडिग रहने वाली सरकार बनेगी। इसीलिए सभी मतदाताओं को अपने मत का प्रयोग जरूर करना चाहिए। देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने के लिए और बेहतर भारत के निर्माण के लिए हमारा एक-एक मत कीमती है।

हितेंद्र डेढ़ा,  चिल्ला गांव


अन्न की बरबादी

हमारे देश में शादी-विवाह में लोगों को छककर भोजन कराया जाता है। मगर इसमें हम अक्सर अन्न की बरबादी देखते हैं। लोग भोजन तो अपनी प्लेट में काफी मात्रा में ले लेते हैं, लेकिन उतना खा नहीं पाते और फेंक देते हैं। हमें यह बात जान लेनी चाहिए कि अपने देश में ऐसे निर्धनों की कमी नहीं, जिन्हें भरपेट अन्न नहीं मिल पाता। इसीलिए भोजन बरबाद करने से पहले हमें ऐसे निर्धनों के बारे में सोचना चाहिए। 

नवीनचंद्र तिवारी, दिल्ली

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