DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

प्रधानमंत्री का दांव

देश में एक लंबे अरसे से यह मांग उठती रही है कि आरक्षण का आधार आर्थिक होना चाहिए, न कि जातिगत। गरीब की कोई जाति नहीं होती, लेकिन जातिवाद की राजनीति करके अपना अस्तित्व बनाए रखने वाले भला यह कैसे सहन कर सकते हैं? मोदी सरकार ने चुनावों में तात्कालिक लाभ के लिए ही सही, 10 प्रतिशत आर्थिक आधार पर आरक्षण देकर जहां सामान्य श्रेणी के लोगों को राहत दी है, वहीं अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की कोशिश भी की है। विपक्षी पार्टियों को यह कतई उम्मीद नहीं रही होगी कि उनका किया वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरा करेंगे। मजबूरी में सभी दलों को इसका समर्थन करना पड़ा, क्योंकि कोई अपने वोटर को नाराज नहीं करना चाहता। इसका परिणाम चाहे जो हो, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही झटके में सबको चित तो कर ही दिया है।

चंद्र प्रकाश शर्मा, रानी बाग, दिल्ली


अमीर भी गरीब

गरीब सवर्णों को भी दस प्रतिशत आरक्षण दिए जाने को कुछ लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के चश्मे से देख रहे हैं। जब से केंद्र में मोदी राज आया है, तभी से ऐसे ऐतिहासिक फैसले लिए जा रहे हैं, जिनकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। नोटबंदी, जीएसटी और अब गरीब सवर्णों को आरक्षण। सवर्णों को आरक्षण मिल जाने के बाद शायद देश में आरक्षण को लेकर होने वाले आंदोलनों को लाल झंडी मिल जाए। हर कोई बेशक इस आरक्षण को अलग-अलग नजरों से देख रहा है, लेकिन यह फैसला गरीब सवर्णों के लिए रामबाण साबित हो सकता है। हालांकि यह भी तभी होगा, जब भ्रष्टाचार से यह दूर रहे। सुप्रीम कोर्ट इस पर क्या फैसला लेगा, यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन सभी राजनीतिक दलों की इस पर सहमति इशारा है कि कोई इसका विरोध करके अपना वोट बैंक नहीं गंवाना चाहता। जिस देश में लाखों कमाने वाले भी टैक्स न भरने का कोई न कोई रास्ता निकाल लेते हैं और खुद को सरकार और आयकर विभाग की नजर में गरीब दिखाते हैं, वहां इस आरक्षण का फायदा वास्तविक गरीबों तक ही पहुंचेगा, इसकी गारंटी कोई नहीं ले सकता।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर


दिखावे से बचें

इन दिनों वाराणसी शहर को खूबसूरत और बेहतर बनाने के लिए दिन-रात मेहनत की जा रही है। आखिरकार कुछ ही दिनों में प्रवासी और तमाम नामचीन लोग जो यहां आने वाले हैं। काश! दिखावे की जगह वास्तव में वाराणसी शहर हमेशा खूबसूरत दिखता और यहां काम करने व करवाने वाले हमेशा तत्पर रहते। ‘किसी’ से प्रशंसा मिले और सुखद शब्दों की बौछार हो, इसलिए सभी वाराणसी को नंबर वन बनाने में लगे हैं। मगर जरूरी असलियत को देखने की है। आडंबर से ज्यादा वास्तविकता पर ध्यान देना चाहिए। दिखावे से अच्छा किसी काम को स्थाई रूप से करना माना जाता है।

माधुरी, सारनाथ, वाराणसी


बेकाबू होती जनसंख्या 
आज भारत ही नहीं, विश्व में जिस गति से जनसंख्या बढ़ रही है, उसे देखकर तो यही लगता है कि जल्द ही जनसंख्या विस्फोट होगा और संसाधनों की भारी कमी पैदा होगी। आज बढ़ती जनसंख्या के कारण बेरोजगारी, भुखमरी, आवास की कमी इत्यादि बुनियादी समस्याएं भी दूर नहीं हो पा रहीं। बढ़ती जरूरतों को देखकर नए-नए आविष्कार तो हुए, लेकिन साथ ही प्रदूषण नामक समस्या भी पैदा हो गई, जिससे आज पूरी दुनिया जूझ रही है। आलम यह है कि आज अधिकतर नदियां प्रदूषण की शिकार हैं, और सबसे अधिक वायु प्रदूषण को बढ़ावा मिला है।  बढ़ती जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करने के लिए आज हम अत्यधिक संसाधनों का उपभोग कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ी के लिए संसाधनों को खत्म करते जा रहे हैं। 
दीपक वाष्र्णेय, राजीव नगर, दिल्ली
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:mail box hindustan column on 11 january