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सबक ले भाजपा

गुरुवार को आए उप-चुनाव के नतीजों से भाजपा को अब बड़ा सबक लेना चाहिए, तभी वह आगे बढ़ सकती है।  राष्ट्रहित में बहुत कुछ करने को अब थोड़ा वक्त शेष है।  इसमें भी चाहे, तो वह एक जादू जैसा करके सभी को आश्चर्यचकित कर सकती है। यही बात कैराना से आरएलडी और गठबंधन की नई विजयी उम्मीदवार तबस्सुम हसन ने भी इस पार्टी के लिए कही है कि अब भाजपा देश की तरक्की का कोई रास्ता निकाले। आज महंगाई, बेरोजगारी, जनसंख्या और प्रदूषण ही तो प्रमुख समस्याएं हैं, जिनके निदान के लिए युद्धस्तर पर आगे बढ़ने की जरूरत है। अगर इस पर ध्यान दिया गया, तो निश्चय ही जादू हो जाएगा। देश में आज काम और दाम की कोई कमी नहीं है। कमी तो सिर्फ नीति और नीयत की है। क्या भाजपा ऐसा करेगी?

वेद मामूरपुर, नरेला


कठिन होती राह

देश में गठबंधन की राजनीति भाजपा पर कितनी भारी पड़ने वाली है, इसके संकेत उप-चुनाव के परिणामों से जाहिर हो गए हैं। केंद्र सरकार की नीतियां आम आदमी को जिस प्रकार से आहत कर रही हैं, वह कोई छिपा तथ्य नहीं है। इसलिए उसे समझ लेना चाहिए कि सिर्फ आंकड़ों के बल पर जनमानस को लंबे समय तक भ्रमित नहीं किया जा सकता। डीजल-पेट्रोल के दामों में वृद्धि के चलते मध्यम आयवर्ग की कमर टूट रही है, जिसमें घी डालने का काम तमाम विपक्षी दलों का मोदी हराओ अभियान है। यदि समय रहते भारतीय जनता पार्टी नहीं संभल सकी, तो आगामी लोकसभा चुनाव में उसकी डगर अत्यधिक चुनौतीपूर्ण रहने वाली है। 

सुधाकर आशावादी, ब्रह्मपुरी, मेरठ


इंडोनेशिया से जुड़ते दिल

दिलों को जोड़ने की सबसे अहम कड़ी संस्कृति होती है। इसका जीता-जागता उदाहरण भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों में देखा जा सकता है। जिस तरह हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के बाद इंडोनेशिया की यात्रा की, उससे हिंद महासागर में चीन की बढ़ती रणनीतिक पेशबंदी कमजोर पड़ेगी। और अगर प्रधानमंत्री ने चार देशों के समूह के साथ, जिसमें भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया हैं, इंडोनेशिया को जोड़ दिया, तो हम समुद्री क्षेत्र में चीन की विस्तारता के सामने चुनौती पेश करते दिखेंगे। आतंकवाद से लड़ाई के मामले में भी इंडोनेशिया एक उदाहरण है। वहां का अवाम इस्लामिक चरमपंथ का पसंद नहीं करता। साफ है कि पुराने रिश्तों को नया आयाम देने के लिहाज से यह साझेदारी दोनों देशों के सामरिक और आर्थिक संबंधों के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होने वाली है। 
शैलेंद्र सिंह


कीटनाशकों का दुष्प्रभाव

फसल के लिए वरदान कहे जाने वाले कीटनाशक इंंसानों के लिए किसी शाप से कम नहीं हैं। हाल ही में इलाहाबाद स्थित कैंसर इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक, कैडमियम, मैंगनीज, आर्सेनिक व पारे जैसे भारी धातु तत्वों के कीटनाशकों में होने के कारण ब्लैडर कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकाड्र्स ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि साल 2015 में देशभर में कीटनाशकों की दुर्घटना के कारण करीब 7,060 लोगों की मौत हो गई थी। हमारे देश में बहुतायत में ऐसे कीटनाशक इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जो आगे आने वाली पीढ़ियों के जीवन में भी विष घोल सकते हैं। कीटनाशकों की कुछ मात्राएं भूजल तक जमा हो जाती हैं, जो ब्याज सहित आने वाली पीढ़ियों को प्राप्त होंगी। अब जरूरत है कि प्रशासन और सरकार मिलकर किसानों में जागरूकता पैदा करे, कीटनाशकों के उचित नियमन की व्यवस्था हो और उन नियमों का पूरी सख्ती से पालन हो। ऐसा न हुआ, तो खेतों से अन्न के साथ-साथ मौत की फसल भी उगेगी।

रोहित मित्तल, दिल्ली विवि

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