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नेताओं की ताकत

हमारे नेता चुनाव जीतने के लिए जनता से खूब मनुहार करते हैं। वे ढेरों वादे भी करते हैं, लेकिन जैसे ही चुनाव जीत जाते हैं, वे उसी जनता को डराने भी लगते हैं। उत्तर प्रदेश के एक भाजपा विधायक का वीडियो कुछ ऐसा ही बता रहा है। उस वीडियो में नेताजी एक महिला अधिकारी को अपनी ताकत बता रहे हैं। आखिर नेतागण यह क्यों भूल जाते हैं कि उनके पास जो ताकत है, वह मूल रूप से जनता की है और जनता ने ही उन्हें यह सौंपी है? जनता किसी नेता को इसलिए नहीं चुनती कि वह उन्हें डराता रहेगा, बल्कि वह इसलिए अपना प्रतिनिधि चुनती है, ताकि उसकी समस्याओं का समाधान हो सके। हमारे नेता लोगों को यह बात समझ लेनी चाहिए।
पुनीत गोमा, दिल्ली विवि
punitgoma476@gmail.com
क्यों करें उनका समर्थन
जम्मू-कश्मीर की पुलवामा मुठभेड़ में जान गंवाने वाले आम नागरिकों के प्रति हर किसी की सहानुभूति है और होनी भी चाहिए, लेकिन कई नेता ऐसे बयान दे रहे हैं कि मानो सुरक्षा बलों ने जान-बूझकर उन्हें मार गिराया। यानी, अलगाववादी हुर्रियत जैसी जमातें ही सुरक्षा बलों को खलनायक नहीं बता रही हैं, बल्कि मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां भी ऐसा कर रही हैं। वे यह विश्लेषण नहीं कर रही हैं कि पत्थरबाजों से घिर आए सुरक्षा बलों के पास आखिर क्या विकल्प बचा था? सच यही है कि तमाम मुश्किलों के बाद भी जवान अपने काम पर डटे रहते हैं। हमें यह समझना ही होगा कि जिस तरह जेहाद एक आतंकी विचार है, उसी तरह पत्थरबाजी भी है। थल सेना प्रमुख विपिन रावत ने सही चेतावनी दी थी कि जो लोग पत्थरबाजी करते हैं, उनके साथ भी दुश्मनों जैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए। जाहिर है, पत्थरबाजों से कई स्तरों पर लड़ने की जरूरत है और जितना संभव है, यह काम हो भी 
रहा है।
अमन सिंह, बरेली
writeramansingh@gmail.com
तर्कहीन आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अक्सर यह आरोप लगाते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम जनता की जेब से पैसा निकालकर अपने उद्योगपति मित्रों की झोली में डाल दिया है। यह बात वह नोटबंदी के संदर्भ में भी कहते रहे। क्या वह यह स्पष्ट कर सकते हैं कि नोटबंदी से किस प्रकार आम आदमी की जेब से पैसा निकला और वह किस तरह उद्योगपतियों की जेब में चला गया? मैं यहां नोटबंदी से मिले लाभ या हानि की चर्चा नहीं कर रहा हूं। यह अलग बहस का विषय है। मैं तो बस राहुल गांधी के आरोपों की सच्चाई जानना चाहता हूं। इसी तरह, आजकल वह राफेल पर भी मोदी सरकार को घेर रहे हैं। वह कह रहे हैं कि आम आदमी की जेब से करोड़ों रुपया निकालकर एक उद्योगपति की जेब में डाल दिया गया। क्या वह अपने इस आरोप को प्रमाण-सहित साबित कर सकते हैं?
बृज राज किशोर
रुड़की रोड, मेरठ
brkishore@me.com
मुख्यमंत्री के बिगड़े बोल
उत्तर प्रदेश और बिहार के बेहद प्रतिभाशाली, कर्मठ और बौद्धिक रूप से दक्ष लोगों को गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली के बाद मध्य प्रदेश में भी हेय दृष्टि से देखा जाना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। आखिर जो लोग यूपीएससी, इंजीनियरिंग, मेडिकल जैसे बौद्धिक क्षेत्रों में अव्वल आते हैं और जिनकी श्रम-शक्ति का लोहा सभी मानते हैं, उन लोगों के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों किया जाता है? यदि गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु जैसे राज्य बहुत विकसित हुए हैं, तो उनमें यूपी-बिहार के लोगों व कामगारों का विशेष महत्व है, और यह बात इन तमाम राज्यों को जान लेनी चाहिए। हालांकि यूपी-बिहार के राज्य सरकारों को भी सोचना चाहिए कि आखिर क्यों वे स्थानीय उद्योग-धंधे विकसित नहीं कर पाए, जिस कारण लोग यहां से पलायन को मजबूर हैं?
विशेष मणि त्रिपाठी, गोरखपुर
visheshmani21@gmail.com

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