DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पहचान चोरी का खतरा

देश में पहचान-पत्र के रूप में आधार कार्ड को अनिवार्य इसलिए कर दिया गया, ताकि सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली रियायतें सही हाथों में पहुंच सकें। मगर आधार कार्ड के असुरक्षित होने पर हमारी निजी सूचनाएं गलत हाथों में भी पहुंच सकती हैं। कई कंपनियां तो आधार की सूचनाओं का दुरुपयोग करने ही लगी हैं। इसलिए जरूरी है कि आधार को चाक-चौबंद बनाया जाए और इसकी सुरक्षा ऐसी हो कि कोई उसे भेद न सके। ‘डिजिटल इंडिया’ का दंभ भरने वाली सरकार को इसे सुरक्षित बनाना ही होगा। अगर आधार को सुरक्षित पहचान पत्र नहीं बनाया गया, तो इससे कई अन्य खतरे पैदा हो सकते हैं, जिसका नुकसान आखिरकार हमारे देश और समाज को भुगतना होगा।
युधिष्ठिर लाल कक्कड़
 गुरुग्राम, हरियाणा
अच्छा सुझाव
‘बढ़ती कारों का काफिला रोककर ही बढ़ेगी हमारी रफ्तार’ शीर्षक से प्रकाशित जंयतीलाल भंडारी के लेख ने देश में बढ़ रहे प्रदूषण और जाम को लेकर वाजिब सवाल उठाए हैं। दिल्ली सहित देश के चारों महानगर भीषण प्रदूषण और जाम का सामना कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट तो कहती है कि कानपुर, गया, फरीदाबाद, वाराणसी, पटना, गुरुग्राम जैसे नगर भी अब सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में शुमार हो गए हैं। प्रदूषण का आलम यह है कि आम आदमी का जीना दुश्वार हो गया है। इसकी वजह से वर्ष 2013 से 2017 के बीच 17 लाख लोगों को सांस की बीमारी होना, हमारे लिए चिंता का विषय होना चाहिए। बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार को ठोस नीतियां बनानी चाहिए। उसे सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का प्रयास भी करना चाहिए। हमारे यहां महंगी कारों को खरीदना स्टेटस सिंबल बन गया है। जिस परिवार का काम एक कार से चल सकता है, वह भी कई कारों का प्रयोग करने लगा है। इसीलिए सड़कों से कारों का बोझ कम करने के लिए कंजेशन शुल्क लगाने का सुझाव बुरा नहीं है। सरकार इस पर विचार जरूर करे।
हितेंद्र डेढ़ा
 चिल्ला गांव, दिल्ली
hitender.dedha@gmail.com
मेट्रो की गंदगी
अपेक्षा यह की जाती है कि स्वच्छ भारत अभियान पर दिल्ली मेट्रो खरा उतरेगी। मगर हम देखते हैं कि इसके स्टेशन तो चमकते रहते हैं, पर बॉगी का फर्श वगैरह खूब गंदा रहता है।  खासतौर से बरसात के मौसम में ऐसा दिखने को मिलता है। इससे एक गलत संदेश भी जाता है। इसलिए दिल्ली मेट्रो को बॉगी के भीतरी हिस्से की साफ-सफाई के खास निर्देश अपने कर्मचारियों को देने चाहिए। बेहतर तो यही होगा कि गाड़ी को तभी ग्रीन सिग्नल मिले, जब उसकी अच्छी सफाई हो जाए। फिर हरेक टर्मिनल पर गाड़ी के फर्श की सफाई परखी जाए और गंदा रहने पर उसकी तुरंत सफाई की जाए।
जितेंद्र
jitender10000mail@rediffmail.com
ऐतिहासिक फैसला
निश्चय ही संस्कृति या धार्मिक मान्यताओं के आधार पर हम यह दावा नहीं कर सकते कि समलैंगिकता बीमारी या अपराध है। यह भी एक सामाजिक स्थिति है, जो मानव सभ्यता के साथ चलती आ रही है। इस संदर्भ में गुरुवार को आया सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला कोई धर्म या अध्यात्म के खिलाफ नहीं है। धारा 377 को समाप्त करके अदालत ने किसी की आस्था पर चोट नहीं पहुंचाई है। उसने तो सिर्फ चारदीवारी के भीतर दो वयस्कों के बीच रजामंदी से बन रहे संबंध पर शासन के हस्तक्षेप को समाप्त किया है। अब भविष्य की चुनौती यह है कि अदालत समलैंगिक विवाह को मान्यता कैसे देगी? अदालत का एक और बड़ा फैसला धारा 497 को लेकर आने वाला है। देखना होगा कि इसके बाद हमारा रूढ़िवादी समाज किस तरह का व्यवहार करता है?
जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर
jbsingh.bbc@gmail.com

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:mail box hindustan 10 september