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मुश्किल की बारिश

मुश्किल की बारिश
बारिश का मौसम शुरू होते ही आम जनता की परेशानियां भी बढ़ जाती हैं। जहां एक ओर बारिश में बीमारियों का भय बना रहता है, तो वहीं दूसरी तरफ सड़क के गड्ढे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा देते हैं। जिन सड़कों को बने हुए ठीक से एक साल भी नहीं हुआ, उन सड़कों की स्थिति तो और भयावह हो गई है। आए दिन कई-कई सड़क दुर्घटनाएं अखबारों में देखने को मिलती हैं। सरकारों को सड़कों की सेहत फौरन सुधारनी चाहिए। खासतौर से बारिश में उसके रख-रखाव पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, तभी हम सड़क दुर्घटनाओं से बच सकते हैं। -साक्षी बडोनी, उत्तराखंड

राम भरोसे यमुना
फ्रांस में सीन नदी का वही स्थान है, जो दिल्ली में यमुना का है। स्थानीय प्रशासन इस नदी का प्रबंधन कर रहा है, जनता में कर्तव्य बोध और चेतना भी इतनी अधिक है कि क्या नदी और क्या इसके पाट, गंदगी का कहीं कोई नामो-निशान नहीं है। मगर अपने यहां स्थिति उलट है। हमने गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियों को भी स्वच्छ-निर्मल नहीं रहने दिया, जबकि इन्हें हमने मां का दर्जा दे रखा है। दुखद है कि भौतिकवाद के प्रभाव में हम अपनी थातियों के प्रति  असंवेदनशील हो गए हैं। हमें इस मामले में अन्य देशों से सीखना चाहिए। कम से कम धार्मिक अनुष्ठान के अवशेष और मूर्ति-विसर्जन हमें नदियों में नहीं करना चाहिए। यमुना की सफाई में सबकी सहभागिता जरूरी है। मगर हम इतने स्वार्थी हो चुके हैं कि अपने घर को छोड़कर अगल-बगल की साफ-सफाई का बिल्कुल ध्यान नहीं रखते। ऐसे में, भला नदियां कैसे  साफ होंगी? -बी एस चौहान, वसुंधरा एनक्लेव

यह कैसा ऑफर
एक ओर जहां पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने देश के तमाम शहरों में बंद की स्थिति बना दी है, वहीं यह आश्चर्य की बात है कि मध्य प्रदेश में पेट्रोल पंप के मालिक पेट्रोल और डीजल की बिक्री बढ़ाने के लिए अजब-गजब के ऑफर दे रहे हैं। यहां पर 100 लीटर डीजल खरीदने वाले को बाकायदा चाय-नाश्ता मुफ्त में दिया जा रहा है, जबकि 5,000 लीटर डीजल खरीदने वाले को मोबाइल, साइकिल और कलाई घड़ी, 15,000 लीटर डीजल खरीदने वाले को आलमारी, सोफा सेट और 100 ग्राम चांदी का सिक्का, 25,000 लीटर डीजल खरीदने वाले को ऑटोमेटिक वाशिंग मशीन, 50,000 लीटर डीजल खरीदने वाले को एसी या एक लेपटॉप और 1,00,000 लीटर डीजल खरीदने वाले को एक स्कूटर मुफ्त में दिए जाने का दावा किया गया है। दरअसल, यहां के पेट्रोल पंपों की हालत कुछ ज्यादा ही खराब है। इसकी वजह यह है कि यहां पेट्रो पदार्थों पर सबसे ज्यादा वैट लगता है। पड़ोसी राज्यों में पेट्रो पदार्थों की कीमत कम है और यहां ज्यादा। नतीजतन, ट्रक और दूसरी व्यावसायिक गाड़ियां मध्य प्रदेश में डीजल न भरवाकर बॉर्डर पर ही डीजल भरवा रही हैं। -संतोष कुमार

कब ख्वाब पूरा होगा
केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल 55 रुपये और डीजल 50 रुपये में मिलेंगे, क्योंकि पेट्रोलियम मंत्रालय देश में पांच इथेनॉल प्लांट लगाने जा रहा है। अब ये प्लांट कब लगेंगे, कब उनसे उत्पादन शुरू होगा और कब देश की जनता को सस्ता पेट्रोल-डीजल मिलेगा- इसका फिलहाल कुछ पता नहीं है? इससे बेहतर तो यह होता कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें यदि वेट और अन्य टैक्स कम कर देतीं, तो शीघ्र ही जनता को कम मूल्य पर पेट्रोल-डीजल मिल जाते। इससे लोगों का सरकारों के प्रति गुस्सा भी कम हो जाता, साथ ही वस्तुओं के दाम भी कम हो जाते। विपक्षी दलों का मुंह तो इससे बंद ही हो जाता। -शकुंतला महेश नेनावा, गिरधर नगर, इंदौर
 

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