DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चुनावी सक्रियता

चुनावी सक्रियता
लोकसभा के चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में, नेताओं की चुनावी भाग-दौड़ फिर से तेज हो गई है। रिबन काटने, उद्घाटन करने और आम लोगों की अधिक से अधिक सहानुभूति पाने के लिए जगह-जगह चिकित्सा या दूसरी तरह के कैंप लगाने का काम जारी है। जनहित से जुडे़ कामों के प्रति चार वर्षों तक सुस्त रहने के बाद नेताओं ने अब गति पकड़ ली है। कुछ अपना टिकट पक्का करने की जुगत में हैं, तो कुछ जनता से जुड़ने का दिखावा कर रहे हैं। ऐसे में, सवाल यह है कि चुनावी वर्ष में ही ऐसी सक्रियता क्यों दिखाई जाती है? साफ है, स्वार्थ से ओत-प्रोत राजनीति में बहुत सुधार की जरूरत है। हालांकि अब जनता जागरूक हो गई है और पैनी नजर से सब कुछ देख रही है। वह वक्त और कुरसी को बदलने में देर नहीं लगाती। -हितेंद्र डेढ़ा, चिल्ला गांव, दिल्ली

आसपास रखें सफाई
त्योहारों के नजदीक आते ही लोग अपने-अपने घरों की साफ-सफाई में जुट जाते हैं। दिवाली में खास तौर पर साफ-सफाई की जाती है। मगर इस प्रकाश-पर्व के बीत जाने के बाद जिस तरह से गली-मोहल्लों में कूड़ा-करकट बिखरा रहता है, उसे देखकर दुख होता है। लोगों का यह दायित्व है कि वे अपने घर के साथ-साथ आसपास के इलाकों को भी साफ रखें। लेकिन दिल्ली जैसे महानगर में लोग नगर निगम के सफाईकर्मी का इंतजार करते रहते हैं। दिवाली में स्वच्छता का खासा महत्व है। स्वच्छ भारत अभियान में आप कितने सक्रिय हैं, इसका पता भी इसी से चलेगा कि दिवाली बीत जाने के बाद अपने गली-मोहल्लों को आप कितना साफ रखते हैं?  -अंकित कुंवर, दिल्ली

उज्ज्वला का भविष्य
सरकार जोर-शोर से उज्ज्वला योजना चला रही है। इसके तहत लाखों गरीब परिवारों को गैस सिलेंडर का कनेक्शन मुफ्त में दिया गया है। किंतु अब लगातार गैस के मूल्य बढ़ने से सरकार की इस योजना पर ग्रहण लगता हुआ दिख रहा है। गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि के कारण जब मध्यवर्ग के ही पसीने छूटने लगे हैं, तो गरीब परिवारों की हालत क्या हो रही होगी, यह आसानी से समझा जा सकता है। उज्ज्वला के भविष्य पर असमंजस के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। -राकेश कौशिक, नानौता, सहारनपुर

हादसों को न्योता
सुरक्षा की दृष्टि से बनाए गए अनेक स्पीड ब्रेकर दुर्घटना का सबब बन रहे हैं। स्थिति यह है कि छोटी-छोटी गलियों में भी दो से तीन स्पीड ब्रेकर बना दिए जाते हैं। जब गलियां छोटी और तंग हों, तब भला कैसे कोई उसमें तेज गति से गाड़ी चला सकता है? कुछ ऐसी ही हालत बड़ी सड़कों की भी है। वहां भी आमतौर पर स्पीड ब्रेकर से पहले कोई सांकेतिक चिह्न नहीं दिखते। इस कारण अचानक स्पीड ब्रेकर सामने आ जाने से दुर्घटना होने का अंदेशा रहता है। संबंधित विभाग को इस बारे में सोचना चाहिए और तय नियम के तहत स्पीड ब्रेकर बनाना चाहिए। -अनुपम चौहान 

न्यायिक सुस्ती
लोगों को वक्त पर न्याय न मिलने की एक बड़ी वजह है देश की अदालतों में भारी संख्या में लंबित मुकदमों का होना। इस समस्या के निदान के लिए न्यायिक सुधार की बातें तो कही जाती हैं, लेकिन अब तक कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। हमारी न्यायिक प्रक्रिया इसलिए धीमी है, क्योंकि अदालतों की छुट्टियां लंबी हैं, और न्याय मिलने की कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है, न्यायाधीश व अदालती संसाधनों की कमी है और न्याय तंत्र की बेहतरी को लेकर सरकार उदासीन है। नतीजतन, देश के लोगों का व्यवस्था पर से विश्वास ही छीजने लगा है। हम सबको इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। -सुभाष बुड़ावन वाला, मध्य प्रदेश

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:mail box column in hindustan on 05 November