DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

भारत से सीखे पड़ोसी

कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की किरकिरी का सिलसिला जारी है। इस मसले पर पाकिस्तान के दुष्प्रचार को विश्व के प्रमुख देश ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहे। ऐसा इसलिए, क्योंकि आज का भारतीय नेतृत्व कुशल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरों पर सवालिया निशान लगाने वालों को अब यह समझ में आ गया होगा कि यात्राएं किस तरह विश्व बिरादरी को अपने पक्ष में करने का कूटनीतिक हथियार बनती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विभिन्न देशों का सर्वोच्च सम्मान मिलना हमारी संस्कृति, सोच, शांति और प्रगति का सम्मान है। इसी कारण हम कश्मीर मसले पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने में सफल हो सके। मगर मुश्किल यह है कि पाकिस्तान अब भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। उसे भारत की निरंतर बढ़ती अर्थव्यवस्था से सीखना चाहिए। युद्ध की रट छोड़कर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को अपने देश में व्याप्त गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा, बेरोजगारी और आतंकवाद से लड़ना चाहिए। भारत की प्रगति पाकिस्तान के लिए सीख होनी चाहिए।

हितेंद्र डेढ़ा, चिल्ला गांव

कड़े नियमों का औचित्य

हाल ही में यातायात नियमों में संशोधन करते हुए जुर्माने की राशि कई गुना बढ़ा दी गई है। आम लोगों में यह बहस भी चल पड़ी है कि कहीं सरकार इतना ज्यादा जुर्माना वसूलकर अपना खजाना तो नहीं भरना चाहती। हालांकि देश के कुछ राज्यों ने इस संशोधित कानून को अपने यहां लागू करने से इनकार कर दिया है। वैसे, समग्रता में देखें, तो इसमें निश्चय ही कई खामियां दिखती हैं। जैसे, वाहन की कीमत से ज्यादा पैसा चालान के रूप में काटा जा रहा है, यातायात पुलिस के लिए वसूली का नया रास्ता खुल गया है आदि। लेकिन भारी जुर्माने का फर्क भी दिख रहा है और लोग हेलमेट पहनकर सड़कों पर निकलने लगे हैं। फिर भी, इस कानून की खामियों को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। इन खामियों को जल्द से जल्द दुरुस्त करने की जरूरत है।

अर्पित केशरवानी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, उ.प्र.

जनरल कोच की कमी

ट्रेनों में कम दूरी का सफर करने वाले यात्रियों की भी अच्छी-खासी संख्या होती है। मगर दिक्कत यह है कि ज्यादातर मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में सामान्य कोच बहुत कम होते हैं।  हालांकि कुछ खास रूट पर पूरे वर्ष ट्रेनों में भीड़ रहती है, मगर छुट्टियों और त्योहारों के समय ट्रेनों पर यात्रियों का अतिरिक्त दबाव आ जाता है। ऐसे में, प्रत्येक मेल-एक्सप्रेस ट्रेन में दो आगे, दो पीछे और दो बीच में जनरल कोच लगाए जाने चाहिए, ताकि यात्रियों को कुछ राहत मिल सके। ट्रेन में चढ़ने के लिए यात्री प्लेटफॉर्म पर जो दौड़-भाग करते हैं, उसमें इस प्रकार की व्यवस्था से राहत मिल सकेगी।

लित महालकरी, इंदौर

ट्रैफिक जुर्म और जुर्माना

सरकार के कामकाज का फायदा तभी हासिल हो सकेगा, जब लोग दिमागी तौर पर तरक्की कर जाएं। यातायात के नए नियम और भारी-भरकम जुर्माने यह बताने के लिए काफी हैं कि सड़कों के इस्तेमाल में हम कितने लापरवाह हैं। अच्छी और चौड़ी सड़कें हमें तभी आगे ले जाएंगी, जब हम उन पर नियमों के साथ चलें, वरना नतीजे जानलेवा हो सकते हैं। फिर भी, अच्छे नतीजों की उम्मीद में सरकार की कमजोरियों को ढका नहीं जा सकता। गाड़ी चलाते वक्त सभी कागजात का होना हादसे को रोकने की गारंटी नहीं है। चोर-सिपाही का यह खेल बड़े हादसे का कारण भी बन सकता है। टूटे हुए ट्रैफिक साइन बोर्ड, अधूरे रोड सिग्नल्स और खराब ट्रैफिक लाइटों में भी सुधार की दरकार है। जुर्म और जुर्माने की आड़ में ट्रैफिक विभाग अपनी ताकत दिखाने की बजाय लोगों को होशियार बनाए, तो कहीं ज्यादा बेहतर नतीजे सामने आएंगे।

एम के मिश्रा, रातू, रांची

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:hindustan mail box column on 9th September