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कानून का दूसरा पक्ष

हाल ही में ट्रैफिक चालान की एक नई सूची जारी हुई है, जिसमें बिना हेलमेट गाड़ी चलाने से लेकर गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग करने पर जनता से अच्छा-खासा जुर्माना वसूलने की बात है। सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार का यह कदम बेहद सराहनीय है। उम्मीद है, अब हादसे कम होंगे और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों को भी अच्छा सबक मिलेगा। लेकिन क्या यह एकतरफा नियंत्रण नहीं है? हादसे क्या सड़कों की बदहाली के कारण नहीं होते? विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों की बदहाली के कारण देश भर में हजारों लोगों की मौत हर साल होती है। जिन सड़कों से वीआईपी गुजरते हैं, उनकी सेहत तो ठीक है, लेकिन शेष सड़कों की हालत देखकर समझ नहीं आता कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। साफ है, अभी तक देश में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। न जाने क्यों आम जनता इतना कुछ जानने-समझने के बावजूद मौन है।ॉ

मीनाक्षी ठाकुर, देहरादून

पहुंच में हो जुर्माना

समय ऐसा आ गया है कि आलू-प्याज की महंगाई नहीं, बल्कि ऑटो सेक्टर की मंदी का रोना रोया जा रहा है। मंदी की इस चपेट में किसान आ चुके हैं और उन्हें उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा। ग्रामीण इलाकों में बिकने वाला पांच रुपये का बिस्कुट भी कम बिक रहा है। नौजवानों की नौकरियां जा रही हैं। कई लोगों के पास दो वक्त की रोटी का जुगाड़ नहीं हो पा रहा। मगर केंद्र सरकार ने इस स्थिति में भी नए मोटर कानून के तहत भारी जुर्माने वाली व्यवस्था लागू कर दी। केंद्र सरकार को यह सोचना चाहिए कि जुर्माना लोगों की पहुंच में होना चाहिए, न  कि पहुंच से बाहर। 

रूमा सिंह

फिट इंडिया का सपना

राष्ट्रीय खेल दिवस पर देश में ‘फिट इंडिया अभियान’ का शुभारंभ किया गया। संयोगवश सितंबर महीने को कुपोषण के विरुद्ध जंग के लिए भी चुना गया है। वस्तुत: दोनों एक-दूसरे में अंतर्निहित हैं। अगर कुपोषण समाप्त हो जाए, तो व्यक्ति स्वस्थ अर्थात स्वत: फिट हो जाएगा। हमारी संस्कृति में प्राचीन काल से ही स्वस्थ रहने पर जोर दिया गया है। विश्व के चिकित्सा विज्ञान की प्राचीनतम विधा आयुर्वेद का प्रयोजन ही यही है। मगर पाश्चात्य संस्कृति में लिप्त लोगों को यह बात तब समझ में आती है, जब वे मोटापा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। कभी पोषण के लिए कोदो, सवा, जौ, बाजरा जैसे मोटे अनाज का सेवन करने वाला हमारा समाज जब पिज्जा, बर्गर का उपयोग करता है, तब वह बीमारियों को ही आमंत्रित कर रहा होता है। ऐसे में, जरूरत खानपान में सुधार व योग-व्यायाम की है। इन दोनों अभियानों के लक्ष्य समाज के अंदर जागरूकता पैदा कर और अपनी संस्कृति पर गौरवान्वित होकर ही प्राप्त किए जा सकते हैं।

हेमा शर्मा, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश


पत्रकार पर मुकदमा

उत्तर प्रदेश के एक स्कूल में मध्याह्न भोजन योजना के तहत नमक-रोटी खाते बच्चों का वीडियो एक पत्रकार ने बनाया, तो उस पर केस दर्ज कराया गया है। सरकार में सच स्वीकारने का साहस होना चाहिए और गलती पर परदा डालने की बजाय उसमें सुधार किया जाना चाहिए। पत्रकार ने वीडियो बनाकर कोई गलत काम नहीं किया है, क्योंकि अधिकांश जगहों पर ऐसी ही स्थिति है, जो समाचार पत्रों में बतौर खबर आती रहती है। स्मरण रहे कि आपातकाल में इंदिरा गांधी ने प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी थी, जिसका खामियाजा उन्हें सत्ता गंवाकर भुगतना पड़ा था। उत्तर प्रदेश सरकार को भी पत्रकारों पर केस दर्ज करने की बजाय बिगड़ी व्यवस्था सुधारने का प्रयास करना चाहिए, जो कि किसी भी सरकार का मुख्य कार्य होता है।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन
 

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