Hindustan Mail Box Column on 5th August - बुरी आदतों के शिकार DA Image

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बुरी आदतों के शिकार

शुक्रवार को प्रकाशित ‘क्यों मुश्किल है लोगों की पुरानी आदतें बदलना’ लेख में बीजू डोमिनिक ने देश के नागरिकों की उन कुछ गलत आदतों का वर्णन किया था, जिनको समाज और देश के लिए उचित नहीं कहा जा सकता। हमारे देश में जैसा राजा, वैसी प्रजा है। महात्मा गांधी ने स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मीडिया का सहारा नहीं लिया था, बल्कि आम जनता के पास वह खुद पहुंचे थे। आम लोगों से संपर्क किया था। आज देश के कितने सत्ताधारी अपने-अपने क्षेत्र में जाकर यह देखते हैं कि उनके इलाके में साफ-सफाई की कैसी व्यवस्था है? लगभग सभी नेता स्वच्छ भारत अभियान में अपनी भागीदारी दिखाने के लिए झाड़ू हाथ में लेकर फोटो जरूर खिंचवाते हैं, लेकिन यदि उन्होंने संजीदगी दिखाई होती, तो देश की हर गली आज साफ-सुथरी होती। इसी तरह, कुछ लोग टैक्स देने से गुरेज करते हैं, क्योंकि सरकार इसका दुरुपयोग मुफ्त की सुविधाएं बांटने के लिए करती है। इसीलिए जब तक सरकारें अपनी आदतें नहीं बदलेंगी, तब तक नहीं लगता कि लोग भी  बदल पाएंगे। (राजेश कुमार चौहान, जालंधर)

बदलाव की दिशा में
तीन तलाक के मामले में नए कानून के आने से मुस्लिम औरतों में जश्न का माहौल है। शाहबानो से शायरा बानो तक चले हक और हुकूक की लंबी जंग को आखिरकार मुकाम मिला। शरीयत को न जानने वाला आम हिन्दुस्तानी भी इस फैसले को जीत का शक्ल देने में जुटा है। हां, यह अलग बात है कि सियासत तब भी हुई थी, और यह आज भी हो रही है। दुनिया के कई मुल्क, जिनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मुस्लिम देश भी शामिल हैं, तीन तलाक पर शरीयत को नहीं मानते। फिर, शातिरों की भी कमी नहीं, जो कानून में तोड़ने-मरोड़ने में माहिर हैं। देश के संविधान में हमने कई बदलाव देखे हैं, जबकि शरीयत बदलना तो चंद लोगों के हाथों में है। ऐसे में, उन लोगों से सावधान रहना होगा, जो शरीयत में फेरबदल करके एक साथ तीन तलाक के नए कानून को बेअसर कर सकते हैं। (एमके मिश्रा, रातू)

चुनाव पर नजर
दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल धीरे-धीरे विधानसभा चुनाव की तरफ बढ़ते जा रहे हैं। बिजली की दरों पर विचार करते हुए उन्होंने अब 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का वादा किया है। यह अपने वोट बैंक को फिर से मजबूत करने का ही एक प्रयास है। अरविंद केजरीवाल भारी बहुमत से दिल्ली की विधानसभा में आए। उन्होंने कई क्षेत्रों में अच्छा काम किया और कई उल्लेखनीय वादे भी किए। इन कामों और वादों का दिल्ली की जनता पर कितना असर पड़ेगा, यह तो आगामी विधानसभा चुनाव के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन इतना तय है कि मुफ्त बिजली मिलने से दिल्ली वालों को काफी राहत मिलेगी। (विजय कुमार धनिया, नई दिल्ली)

जनसंख्या नियंत्रित हो
तीन तलाक के बाद अब जनसंख्या नियंत्रण पर कानून बनना चाहिए। आज सरकारी/गैर-सरकारी योजनाओं के सभी लाभार्थियों के लिए दो से कम बच्चों की शर्त रखी जानी चाहिए। जनसंख्या विस्फोट से भारत में संसाधनों पर बेतहाशा भार बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण संसाधनों की कमी, मिलावटखोरी, जमाखोरी, आर्थिक विषमता, बेरोजगारी जैसी कई समस्याएं देश की प्रगति में बाधक बन रही हैं। दुनिया का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश भारत अनुमानत: 2030 में चीन को पीछे छोड़ देगा। यह स्थिति चिंतनीय है, क्योंकि अधिक जनसंख्या का पोषण करना और उन्हें विकास के समान अवसर उपलब्ध करवाना, कम जनसंख्या की तुलना में दुष्कर कार्य है, इसीलिए भविष्य की चुनौतियों से पार पाने के लिए वर्तमान में ही नींव रखनी होगी। (मोहित सोनी, धार, मध्य प्रदेश)

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