hindustan mail box column on 4th September - पाकिस्तान की बौखलाहट DA Image

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पाकिस्तान की बौखलाहट

जबसे अनुच्छेद 370 निरस्त हुआ है, पाकिस्तान एक ही राग अलाप रहा है कि जम्मू-कश्मीर में हालात ठीक नहीं हैं, विश्व समुदाय को उसकी तरफ ध्यान देना चाहिए। मगर उसे अपनी बदहाली नजर नहीं आ रही। वहां लोगों के जबरन धर्म परिवर्तन कराए जा रहे हैं, पाक अधिकृत कश्मीर, बलूचिस्तान व गिलगित में लोग आजादी मांग रहे हैं और देश की अर्थव्यवस्था मानो आखिरी सांस गिन रही है। इन सबको नजरंदाज करके पाकिस्तान के हुक्मरान सिर्फ कश्मीर की चर्चा कर रहे हैं। उनकी बौखलाहट इसलिए है कि कश्मीर में जनजीवन सामान्य होने लगा है और हमारे प्रधानमंत्री की बातें दुनिया भर के देश सुन रहे हैं। पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए कि यह नए दौर का भारत है, जिसे बड़े-बड़े देशों का सहयोग मिल रहा है। हां, कुछ देशों के मामले में स्पष्टता की कमी जरूर है, लेकिन वह बहुत बड़ी चिंता की बात नहीं है।

अविनाश कुमार झा


नए कानून का पेच

मोटर कानून में बदलाव से क्या हम नए भारत की ओर अग्रसर हो रहे हैं? उल्लेखनीय है कि नया मोटर वाहन कानून लागू हो गया है, जिसमें चालान में पहले से 10 गुना तक वृद्धि कर दी गई है। कुछ लोग इसे नए भारत के लिए जरूरी समझते हैं, तो कुछ लोगों की नजर में यह भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली नीति है। आम जनमानस समझता है कि पहले 200 रुपये के चालान में भ्रष्ट तरीके से 100 रुपये में छूट जाते थे, लेकिन अब 2,000 रुपये के चालान में 1,000 रुपये से कम में पीछा नहीं छूटेगा। हालांकि इन सब बातों को सोचते हुए एक बार यह नहीं सोचता कि वह नियमों का पालन करेगा। जो लोग मानते हैं कि चालान ट्रैफिक पुलिस के लिए उगाही का माध्यम हैं, उन्हें अपनी समझ व्यापक बनानी चाहिए। अब काफी कुछ ऑनलाइन होने लगा है। हालांकि कुछ लोगों की नाराजगी वाजिब है कि सारे नियम जनता के लिए ही हैं, कुछ सरकारी मुलाजिमों के लिए भी होने चाहिए, खासकर सड़कों की खस्ता हालत को देखते हुए। निश्चय ही नए कानून का स्वागत करते हुए सरकार से यह अपेक्षा है कि वह जनता के अनुकूल सुविधाओं को बढ़ावा देगी। पर सबसे बड़ा प्रश्न है, क्या ऐसा होगा?

प्रवीण बंगवालतिलक नगर, नई दिल्ली
 

हमारी भी जिम्मेदारी

देश में गणपति महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। परंतु आस्था के साथ-साथ पर्यावरण को बचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी हमारे ही कंधों पर है। दिल्ली सरकार समाचार पत्रों में विज्ञापन के माध्यम से नागरिकों से मूर्ति विसर्जन के दौरान यमुना नदी को प्रदूषित न करने की अपील कर रही है। वाकई नदियां जीवन दायिनी होती हैं, इसलिए यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए हमें सरकार द्वारा निर्धारित स्थलों पर ही मूर्ति विसर्जन का कार्य करना चाहिए। नागरिक-सरकार साझा सहयोग से हम प्राकृतिक स्रोतों को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं।

हितेंद्र डेढ़ा, चिल्ला गांव


शर्म उसे नहीं आती

लंबे समय से कुलभूषण जाधव के मामले को लेकर जिस तरह से पाकिस्तान की किरकिरी हो रही है, उसके बाद भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पटखनी खाने के बाद भी पाकिस्तान इस मामले में जिस तरह से समय-समय पर पैंतरा बदल रहा है, उससे दुनिया भर में उसकी बदनामी हो रही है। भारतीय राजनयिक से कुलभूषण की मुलाकात के बाद भी यही पाया गया है कि पाकिस्तान मानवाधिकारों का खुलेआम उल्लंघन कर रहा है। पाकिस्तान में अब अगर थोड़ी सी भी शर्म बची है, तो वह बातचीत से मसले का हल निकाले, न कि युद्ध की धमकी से। हालांकि बातचीत से पहले उसे अपने यहां के आतंकी गुटों को खत्म करना ही होगा। 

विजय कुमार धनिया, नई दिल्ली
 

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