Hindustan Mail Box Column on 3rd September - मंदी पर मनमोहन DA Image

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मंदी पर मनमोहन

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर जो बयान दिया था, सरकार उसे गंभीरता से ले, क्योंकि वह न सिर्फ 10 साल तक देश के प्रधानमंत्री रहे, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को दिशा देने में उनका बहुत अहम योगदान रहा है। सबसे पहले सरकार को यह समझना होगा कि अर्थव्यवस्था की स्थिति वाकई खराब है, तभी जाकर वह इससे निपटने की सही नीति बना सकेगी। मौजूदा मंदी से निपटने के लिए वह जो भी नीति बनाए, उसमें मनमोहन सिंह की राय को भी शामिल करे, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री ने 2008 का दौर देखा है, जब विश्व के बडे़-बडे़ राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई थी, लेकिन उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था पर उस मंदी का खास असर नहीं पड़ने दिया था। 

दिनेश चौधरी, सुरजापुर, सुपौल, बिहार


दिशाहीन नीति

एक तरफ तो प्रधानमंत्री डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की अपील करते हैं, और दूसरी ओर सरकार डिजिटल लेन-देन पर शुल्क लगाती जा रही है। अभी हाल में ऑनलाइन रेलवे टिकट की बुकिंग पर 15 से 30 रुपये तक का अधिभार लगाने का फरमान जारी किया गया है। इसके पहले ऑनलाइन भुगतान के लिए प्रयोग होने वाली स्वाइप मशीन पर भी मासिक शुल्क लगा दिया गया था। यही नहीं, तय संख्या से अधिक एटीएम प्रयोग पर भी शुल्क लगा दिया गया था। होना तो यह चाहिए था कि ईंधन की बर्बादी रोकने और पर्यावरण की सुरक्षा की खातिर ऑनलाइन लेन-देन पर छूट दी जाती, किंतु यहां तो उल्टी गंगा बहाई जा रही है। केंद्र खुद कहता है कि डिजिटलाइजेशन के बहुत लाभ हैं, फिर क्यों वह इसको हतोत्साहित कर रहा है? 

सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी

पर उपदेश कुशल बहुतेरे

भारत पर धार्मिक भेदभाव के आरोप लगाने वाले पाकिस्तान को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटाए जाने से वह बौखला उठा है और लगातार भारत में अल्पसंख्यकों पर ‘अत्याचार’ की बातें कर रहा है, जबकि हकीकत यह है कि पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदू समाज को किसी न किसी रूप से हमेशा प्रताडि़त किया जाता है। हाल ही में सिंध प्रांत के सुक्कुर स्थित आईबीए में स्नातक छात्रा का जबरन धर्म परिवर्तन कराकर बाबर अमान नामक युवक के साथ विवाह कराया गया। रेणुका के भाई का कहना है कि रेणुका को बाबर अमान ने जबरन तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के कार्यकर्ता मिर्जा दिलावर बेग के घर पर रखा है। इसके पहले भी पंजाब की उन्नीस वर्षीया जगजीत कौर को अगवा कर जबरन इस्लाम कुबूल करवाया गया, जो जगजाहिर भी हो गया। किस देश में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं, इसे इसी से समझा जा सकता है कि बंटबारे के बाद से लगातार पाकिस्तान में अल्पसंख्यक घटते जा रहे हैं, और भारत में अल्पसंख्यकों की तादाद में वृद्धि हो रही है। फिर कैसे पाकिस्तान हम पर धार्मिक भेदभाव के आरोप लगा सकता है?

ललित शंकर, मवाना, मेरठ

देशहित का कानून 

कोई भी लोकतांत्रिक देश, उसका कानून और उसकी सरकार इस बात के हक में नहीं होती कि नाहक ही लोगों से जुर्माने के रूप में भारी रकम वसूली जाए। ट्रैफिक जुर्माने में बढ़ोतरी साफ करती है कि लोगों द्वारा नियमों की अनदेखी, लापरवाही बढ़ी है और कानून के प्रति श्रद्धा व समाज के प्रति जिम्मेदारी घटी है। लोगों को गंभीरता से यह समझना होगा कि ट्रैफिक कानून को तोड़कर पहला धोखा उन्होंने खुद को दिया है और दूसरा धोखा समाज को। सड़कों पर बढ़ती दुर्घटनाएं न जाने कितने परिवारों पर भारी पड़ती हैं। यह एक गंभीर चिंतन का मुद्दा है। समाज के लिए लापरवाह ड्राइविंग का नुकसान दोषी के जुर्माने की रकम से कहीं ज्यादा भारी होता है, इसलिए नियम-पालन के प्रतिभागी बनें।

मृदुल कुमार शर्मा, गाजियाबाद
 

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