Hindustan Mail Box Column on 31st July - बेजा विवाद DA Image

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बेजा विवाद

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल द्वारा जम्मू-कश्मीर का दौरा किए जाने और उसके बाद वहां लगभग 10 हजार अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती से कुछ राजनीतिक दलों की हालत इतनी खराब हो गई है कि वे कुछ भी बयानबाजी कर रहे हैं। वे अब इस दुष्प्रचार में जुटे हैं कि केंद्र सरकार अनुच्छेद-370 और 35-ए को खत्म करने जा रही है। दुष्प्रचार इसलिए कि अभी तक केंद्र सरकार ने इन अनुच्छेदों को खत्म करने के संबंध में कुछ नहीं कहा है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के दल अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं। इसे घाटी के भविष्य के लिए सही नहीं कहा जा सकता। चूंकि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, इसलिए यह बहुत जरूरी है कि इस प्रदेश पर नजर रखी जाए। यहां हुई तमाम गलतियां दुरुस्त करनी ही होंगी। (नीरज कुमार पाठक, नोएडा)

व्यापक नजरिए का अभाव
मंगलवार को प्रकाशित नीरजा माधव का लेख स्त्री-सूचक गालियों के संदर्भ में यह सुझाता है कि देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा पर किस प्रकार लगाम लगाई जाए। लेकिन अगर लेखिका उन महिलाओं को भी आईना दिखातीं, जो 21वीं सदी में भी लड़कियों के प्रति संकीर्ण सोच रखती हैं, तो ज्यादा सही होता। मसलन, इसी सोच के तहत घर की बुजुर्ग महिला कन्या भ्रूण हत्या और दहेज प्रथा को बढ़ावा देती आ रही हैं। भारत गांवों का देश है, लेकिन ग्रामीण भारत में ही महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर जागरूक नहीं हैं। इस कारण वे अपने ऊपर होने वाले जुल्मों के विरुद्ध आवाज नहीं उठा पातीं। ऐसे में, महिलाओं के आत्मविश्वास को मजबूत बनाकर महिला उत्पीड़न के खिलाफ जंग लड़नी चाहिए। सख्त कानून के साथ-साथ जब तक लोगों में नैतिकता की भावना का प्रचार-प्रसार नहीं होगा, तब तक शायद ही महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर रोक लग सकेगी। और अंत में, अगर बचपन से ही नौनिहालों को नैतिकता का सबक पढ़ाया जाए, तो हमारे समाज में बढ़ रहे कई गलत काम स्वत: रुक सकते हैं। आज के बच्चे कल के भविष्य होते हैं। (राजेश कुमार चौहान, जालंधर)

गरिमा बनाए रखें
समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान हमेशा अपनी विवादित टिप्पणी को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। कभी प्रशासन के खिलाफ, तो कभी महिलाओं के खिलाफ अभद्र बयान देना उनकी मानसिकता को दर्शाता है। इससे यह भी समझा जा सकता है कि एक सांसद के रूप में समाज के उत्थान में उनकी कितनी भूमिका होगी। आखिर अपने बयानों से वह समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं? भारतीय जनता पार्टी की सांसद से अभद्र बात कहने पर आजम खान ने लोकसभा में माफी तो मांग ली, लेकिन समाजवादी पार्टी की तरफ से उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। राजनीतिक दलों को अपने नेताओं पर सख्ती बरतनी चाहिए, तभी राजनीति की गरिमा बनी रह सकेगी। (आकाश सिंह तोमर)

रेल सेवा का विस्तार
इसमें दो राय नहीं कि सड़कों पर बढ़ते यातायात के दबाव के चलते रेल सेवाओं का विस्तार जरूरी हो गया है। जिस अनुपात में आबादी बढ़ रही है और रोजाना नए वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं, वे आने वाले समय में सुगम यातायात के लिए चुनौती बन रहे हैं। ऐसे में, रेल सेवाओं का विस्तार न केवल जन-सुविधा की दृष्टि से, बल्कि पर्यावरणीय नजरिए से देश-समाज के हित में है। रेल सेवाओं के विस्तार से कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। देखा जाए, तो रेल सेवा किसी भी राज्य के विकास की धुरी है। नए रेलमार्गों के अस्तित्व में आने से जहां कई स्थानों की दूरियां कम होंगी, वहीं बस सेवा के मुकाबले रेल सेवा सस्ती होने से यात्रियों को भी राहत मिलेगी। सरकार को इस दिशा में सोचना चाहिए। (सुभाष बुड़ावन वाला, मध्य प्रदेश)

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