Hindustan Mail Box Column on 2nd September - चुनावी पैंतरा DA Image

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चुनावी पैंतरा

धीरे-धीरे दिल्ली विधानसभा के चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं और उसके साथ-साथ राज्य के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा विभिन्न प्रकार की चुनावी घोषणाएं भी की जाने लगी हैं। सबसे पहले डीटीसी बसों और मेट्रो में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की घोषणा हुई, फिर बिजली और पानी पर ध्यान दिया गया। यह सब वोट बैंक की राजनीति है। अब यह राजनीति इतनी हावी होती जा रही है कि चुनावी घोषणापत्र में भी ये सब बातें दिखने लगी हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री तो अब अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्र-छात्राओं को विदेश में शिक्षा ग्रहण करने के लिए भी विशेष अनुदान देने की बात कहने लगे हैं। साफ है, दिल्ली सरकार एक के बाद दूसरी योजनाओं पर नजरें दौड़ा रही है, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में उसे फायदा मिले। हालांकि बाद में यह भी पता चलता है कि इन योजनाओं के क्रियान्वयन में केंद्र सरकार की अनुमति की आवश्यकता होती है। साफ है, किसी भी योजना की घोषणा करने से पहले दिल्ली सरकार को उसको परख लेना चाहिए, क्योंकि मतदाता भी अब काफी जागरूक हो चुके हैं। (विजय कुमार धनिया, नई दिल्ली)

बेहाल पाकिस्तान
खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे जैसा हाल पड़ोसी हुक्मरानों का है। हमारे प्रधानमंत्री को दुनिया भर में मिल रहे सम्मान को देखकर पाकिस्तान के मुखिया कुछ यूं तिलमिला गए हैं कि अपने कबाड़खाने में रखे परमाणु बमों की धमकी तक दे दी। अच्छा होता कि एक बार वह इतिहास को याद कर लेते। खबर यह भी है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री सचिवालय की बिजली का बिल इतना ज्यादा बकाया है कि वहां मोमबत्तियां जलाकर काम करने की नौबत आने वाली है। भारत से उलझने की बजाय यदि इमरान खान अपने देश के लोगों को भुखमरी, गरीबी, अशिक्षा जैसी मुश्किलों से राहत दिलाते, तो कहीं बेहतर होता। (आकाश त्रिवेदी, शाहजहांपुर)

उद्योग और कृषि
हमारा भारत एक कृषि प्रधान देश है, लेकिन पिछले कुछ वषार्ें से कृषि पर सवाल उठने लगे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि उद्योगों को विकसित करने के लिए किसानों से कृषि भूमि मोटी कीमत में खरीदी जा रही है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो हमारा देश कृषि प्रधान न होकर उद्योग प्रधान बन जाएगा, और अनाज के एक-एक दाने के लिए दूसरे देशों पर आश्रित हो जाएगा। औद्योगिकीकरण हमारे देश के पर्यावरण को भी बिगाड़ रहा है। फैक्टरियों से निकलने वाला काला धुआं वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है, तो अवशिष्ट पदार्थ मृदा प्रदूषण के लिए। इसलिए उद्योगों को बढ़ावा देने पर हमारे पर्यावरण एवं कृषि, दोनों पर कुप्रभाव पड़ेगा। हमारी सरकार को पर्यावरण और कृषि को ध्यान में रखते हुए उद्योगों को शहर से बाहर करने और इनसे होने वाली हानि पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए। (अभिषेक तोमर)

नकारात्मक राजनीति
जिस तरह से कुछ राजनीतिक दल और उनके नेतागण अनुच्छेद 370 हटाने का अंधविरोध कर रहे हैं, वह उनकी नकारात्मक राजनीति का चरम कहा जाएगा। यह इन दलों के लिए आत्मघाती साबित होगा, क्योंकि जनता इस अनुच्छेद के हटने से खुश है। मोदी सरकार ने इस अनुच्छेद को सुनियोजित योजना के तहत हटाया है। इस मामले में जहां विश्व मंचों पर पाकिस्तान की कूटनीतिक हार हुई है, वहीं जम्मू-कश्मीर में जड़ें जमा चुके अलगाववादियों को भी गंभीर चोट पहुंची है। लेकिन मुश्किल है कि कुछ भारतीय नेता इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं कि पाकिस्तान उसका इस्तेमाल अपने हक में कर रहा है। वोट-बैंक के लिए ऐसी राजनीति उचित नहीं। इस तरह की नकारात्मक राजनीति का नुकसान इन दलों को  ही उठाना होगा।
(मुनीश कुमार वशिष्ठ, कासगंज, उत्तर प्रदेश)

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