Hindustan Mail Box Column on 27th August - असली गरीब DA Image

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असली गरीब 

अक्सर मीडिया या अन्य एजेंसियों द्वारा ऐसे आंकड़े जारी किए जाते हैं, जिनमें हमारे देश की गरीबी व दूसरे देशों की गरीबी का अंतर और इससे निपटने के लिए किए जा रहे उपायों का जिक्र होता है। लेकिन असलियत में हमें यह देखना चाहिए कि अपने देश की सरकारें (केंद्र और राज्य) गरीबी के कलंक को मिटाने के लिए क्या कर रही हैं। हमारे देश में गरीबी का एक बड़ा कारण जनसंख्या वृद्धि है। कुछ गरीब लोग ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं, ताकि काम-धंधा के लिए उन्हें हाथ मिल सके। मगर इससे उनकी कमाई तो बढ़ती नहीं, उलटे वे गरीबी की दलदल में और धंस जाते हैं। फिर भी, वे गरीबी और अन्य समस्याओं के लिए सरकार को ही दोष देते हैं। माना कि सरकारों की कुछ नीतियां गलत साबित हुई हैं, लेकिन गरीबी बढ़ने की एक बड़ी वजह लोगों की संकीर्ण सोच भी है। गरीबी पर नकेल कसने के लिए जनसंख्या वृद्धि को रोकना जरूरी है। सरकार को इस तरफ मजबूती से काम करना चाहिए। (राजेश कुमार चौहान, जालंधर)

दवा का ऑनलाइन धंधा
ऑनलाइन दवाइयां बेचने वाली कंपनियां कई तरह की छूट देती हैं। महंगी से महंगी दवाओं पर भी वे 55 से 75 फीसदी तक छूट देती हैं और दवा भी घर पहुंचाती हैं। निश्चित रूप से कंपनियां इस पर भी ठीक-ठाक मुनाफा वसूलती ही होंगी। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि खुदरा दुकानों में दवाइयों पर कितना मुनाफा कमाया जा रहा होगा। क्या स्वास्थ्य मंत्रालय/ सरकार का इस तरफ ध्यान है? सवाल यह भी है कि क्या ऑनलाइन कंपनियां सही दवाई बेच रही हैं या फिर छूट के नाम पर वे मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रही हैं? इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। कौन सच्चा है और कौन झूठा, जनता को यह पता होना ही चाहिए। (सुभाष बुड़ावन वाला, मध्य प्रदेश)

डॉक्टरों की अनिवार्य सेवा
डॉक्टरों के लिए सेवा बॉन्ड तीन वर्ष का न होकर पांच साल या इससे अधिक का होना चाहिए। सरकार करदाताओं के पैसों से इन डॉक्टरों को अनुदान देती है, पर वे शिक्षा पूरी करने के बाद विदेश में जाकर बस जाते हैं और उन विदेशियों का इलाज करते हैं, जिनका उनके डॉक्टर बनने में कोई योगदान नहीं होता। जबकि भारत में डॉक्टरों की कितनी कमी है, यह कोई छिपी बात नहीं है। खासकर गांवों की हालत बेहद खराब है। सभी डॉक्टर शहरों में ही रहना चाहते हैं। इसलिए सेवा बॉन्ड अनिवार्य रूप से पांच वर्ष या इससे अधिक का होना चाहिए, नहीं तो भारी आर्थिक दंड डॉक्टरों पर लगाया जाना चाहिए, ताकि उन पैसों से देश हित के काम किए जा सकें।  (अविनाश दवे, गाजियाबाद)

खड़ा रहेगा भारत
वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में भी भारत सदैव सक्षम होकर खड़ा रहेगा। इसका आधार यहां की उपजाऊ भूमि और एक के बाद दूसरे आते त्योहार हैं। भूमि उपजाऊ होने के कारण अधिकतर इलाकों के किसान तीन फसल लगाते हैं, जिससे अच्छी आय होने के कारण खेती से ही देश का अधिकतर व्यापार चलता है। जबकि त्योहारों की खरीदारी और छोटे-छोटे दुकानदारों द्वारा आर्थिक लेन-देन के कारण हर व्यक्ति कुछ न कुछ लाभ अर्जित करता ही है। इससे सबकी आजीविका चलती रहती है। यही कारण है कि वैश्विक मंदी के बडे़ से बड़े दौर में भी भारत की आर्थिक रफ्तार छह माह से अधिक धीमी नहीं रहती। ज्यादातर देशों में मंदी की वजह किस्त वाली जीवन पद्धति, आय से अधिक खर्च और विलासितापूर्ण जीवनशैली है, लेकिन हमारा आम जनजीवन संघर्षपूर्ण होने के बाद भी बचत में यकीन रखता है। कुछ न कुछ वह बचाता ही है। यही संस्कार हमें अपने पूर्वजों से मिला है। लोगों की यही आदत देश को हर स्थिति में संभाले रखती है। (मंगलेश सोनी, मनावर, धार)

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  • Web Title:Hindustan Mail Box Column on 27th August