Hindustan Mail Box Column on 23rd July - कड़े कानून की जरूरत DA Image

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कड़े कानून की जरूरत

एक तरफ हम अपने वैज्ञानिकों की नित नई खोज पर नजर डालें, तो गर्व से मस्तक उठ जाता है, मगर यदि झारखंड, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में उन्मादी भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं पर गौर करें, तो यही मस्तक शर्म से झुक जाता है। फिर दिमाग में सिर्फ एक बात आती है कि एक तरफ तो हम चंद्रमा पर पहुंचने की बात कर रहे हैं, पर दूसरी तरफ इतने निचले स्तर पर हैं कि निर्दोषों को डायन बताकर उनकी जान तक ले लेते हैं। यह कितनी गहरी असमानता है, जिसको भरना मुश्किल जान पड़ता है। उन्मादी भीड़ द्वारा जगह-जगह नए-नए तरीकों से घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। यह कानून और प्रशासन के लिए चिंता का विषय हैै। आज मॉब लिंचिंग की एक के बाद दूसरी घटना सामने आ रही है। समय आ गया है कि सरकार इसे रोकने के लिए न सिर्फ कड़ा कानून बनाए, बल्कि उसे सख्ती से लागू भी करे। कोई अपराधी है या नहीं, इसका फैसला न्यायपालिका को करना चाहिए, उन्मादी भीड़ को नहीं। (नीरज कुमार पाठक, नोएडा)

बाढ़ का उपाय
अत्यधिक वर्षा और नेपाल से बेहिसाब पानी आने से बिहार इन दिनों भयंकर बाढ़ की चपेट में है। कमोबेश हर साल यही स्थिति होती है, जिसमें जान-माल की भारी क्षति होती है। बाढ़-पीड़ितों को हर साल बाढ़ के बाद नए सिरे से जीवन शुरू करना पड़ता है। दुर्भाग्य से आजादी के सात दशकों के बाद भी नदियों की हालत बहुत ही नाजुक है। या तो वे सूखी पड़ी हैं या फिर अटी पड़ी हैं, जिससे वर्षा के पानी को वे संभाल ही नहीं पातीं। इसलिए उचित समय पर इनसे गाद की साफ-सफाई और खुदाई जरूरी है। इसके साथ-साथ कुछ नए तालाब और नहरों को भी तैयार किए जाने भी जरूरत है, ताकि नदियों का रुख दूसरे सूखाग्रस्त राज्यों की ओर मोड़ा जा सके। उम्मीद है कि नवगठित जल शक्ति मंत्रालय इस दिशा में व्यापक पारदर्शी योजना के साथ उचित कार्रवाई करेगा। यह समझना होगा कि देश में काम की कोई कमी नहीं है, कमी है, तो सिर्फ नीति और नीयत की। (वेद मामूरपुर, नरेला)

अच्छा फैसला
महेंद्र सिंह धौनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दो माह का अवकाश लेकर सेना में अपनी सेवा देने का बहुत सराहनीय निर्णय लिया है। वह लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर हैं। संन्यास की अटकलों पर विराम लगाते हुए देश की सेवा करने का यह सुखद निर्णय लेकर माही ने दूसरे खिलाड़ियों के लिए एक लकीर खींच दी है। अन्य कलाकार/ खिलाड़ी  इससे प्रेरणा लेकर सेना के मनोबल को बढ़ाने में अपना योगदान दे सकते हैं और धौनी की तरह सेवा दे सकते हैं। इससे सेना के हमारे जवानों को भी नई ऊर्जा मिलेगी और वे निजी जीवन के अपने कई तनावों को पीछे छोड़ सकेंगे। (मंगलेश सोनी, मनावर, धार)

पैसे लौटाए जाएं 
जब पहली बार मोदी सरकार आई थी, तब देश में चल रही चिटफंड कंपनियों को बंद कर दिया गया था। मगर अब दूसरी बार सरकार आने के बाद भी, उन निवेशकों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिन्होंने इन कंपनियों में पैसे लगाए थे। यह सवाल फाइलों में बंद है कि जिन लोगों ने इन कंपनियों में अपनी गाढ़ी कमाई लगाई, उन्हें वह वापस मिला या नहीं। ऐसे निवेशकों की संख्या लाखों में होगी, जिन्होंने कई सपनों के साथ अपने पैसे एजेंट को सौंपे होंगे। मगर उनके सपने तो पूरे नहीं ही हुए, जिन एजेंटों ने इनसे पैसे लेकर जमा किया, उनकी जिंदगी भी बर्बाद हो गई, क्योंकि निवेशक इन एजेंटों से ही पैसे मांग रहे हैं। आखिर ये इतने पैसे कहां से देंगे? ये भी तो निर्दोष हैं। सारा पैसा तो चिटफंड कंपनियों के पास है। ऐसे में, सरकार को चाहिए कि बंद की गई चिटफंड कंपनियों से पैसा वसूलकर उन्हें निवेशकों को लौटाए। (श्रीकांत दास, देवघर)

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