DA Image
25 सितम्बर, 2020|5:50|IST

अगली स्टोरी

भीड़ हत्या के खिलाफ

बिहार में मॉब लिंचिंग में तीन लोगों की हत्या कर दी गई। यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में इस तरह की घटनाएं घट चुकी हैं। बिहार में भी पहले ऐसा हो चुका है। आखिर प्रशासन का कोई भी अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाता? यह बहुत चिंताजनक बात है, क्योंकि जब कभी अपराध के खिलाफ सख्ती बरती जाती है, अपराध प्रबल रूप में सामने आता है। मॉब लिंचिंग जैसे अपराधों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि लोगों का भरोसा प्रशासन और लोकतंत्र पर बना रहे। (आकाश सिंह तोमर)

उम्मीद जगाती फिल्म
हाल ही में आई ‘सुपर 30’ फिल्म कई मामलों में उम्मीद जगाने वाली फिल्म है। इसर्में ंहदी भाषा को जीवन का आधार बताया गया है, यानी इसर्में ंहदी भाषा की अहमियत दिखाई गई है। इसकी दूसरी खासियत इसका प्रेरक होना है। नौजवानों को यह फिल्म कई मायनों में सकारात्मक संदेश देती है। मेहनत करने वाले को बताती है कि यदि आप सही अर्थों में मेहनत करते हैं, तो सफलता आपके कदम चूमेगी ही। यह देश की भद्दी राजनीति, शिक्षा जगत में धोखाधड़ी आदि को बेपरदा तो करती ही है, यह भी बताती है कि गरीबों के बच्चे भी राजा बन सकते हैं। देश-समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली फिल्मों से बेहतर है कि ‘सुपर 30’ जैसी प्रेरणादायक फिल्म बनाई और दिखाई जाए। (कशिश वर्मा, नोएडा)

ऐतिहासिक फैसला
केंद्र और दिल्ली राज्य सरकार ने कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने का जो कदम उठाया है, वह तारीफ के लायक है। दिल्ली में 1,700 से अधिक कच्ची कॉलोनियां हैं, जिनमें लगभग 40 लाख आबादी रहती है। अगर इनको नियमित किया जाता है और रजिस्ट्री शुरू होती है, तो यहां रहने वाले लोगों को अपनी संपत्ति पर मालिकाना हक मिल सकेगा। साथ ही, यहां के विकास कार्यों में तेजी आएगी। इन कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं जैसे पानी, सीवर, सड़क आदि बेहतर होंगी। यह मामला 1970 से अटका है। अब उम्मीद की जा सकती है कि इन कॉलोनियों का विकास तेजी से होगा।
(विजय किशोर तिवारी, नई दिल्ली)

बाढ़ से बेहाल
बिहार इन दिनों बाढ़ में डूब-उतर रहा है। जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है। लेकिन प्रशासन मानो सुस्त बना हुआ है। स्थिति यह है कि वहां के नेतागण बिहार के एक कोचिंग संस्थान पर बनी फिल्म देखने में मशगूल हैं और पूछने पर बता रहे हैं कि यदि उन्होंने फिल्म न देखी, तो फिल्म का अपमान होगा। यह कुछ-कुछ रोम के जलने और नीरो के बंसी बजाने जैसा मामला है। विपक्षी पार्टियों के नेतागण भी इन दिनों शांत हैं। लगता है कि उन्हें भी आम लोगों की फिक्र नहीं है। बिहार के लोगों को किसी नेता की राह तकने की बजाय खुद पर विश्वास करना होगा। (रवींद्रनाथ, महरौली, नई दिल्ली)

जीत के नायक
कुलभूषण जाधव के मामले में भारत को मिली जीत के पीछे जिस शख्स का सबसे बड़ा हाथ है, वह हैं हरीश साल्वे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अदालत में पाकिस्तान की बखिया उधेड़ने के लिए जाधव केस की नींव ही वियना संधि के उल्लंघन पर रखी। साल्वे ने अपने तर्कों से न केवल यह साबित किया कि पाकिस्तान ने जाधव को काउंसिलर एक्सेस न देकर वियना संधि का उल्लंघन किया है, बल्कि वह जाधव की फांसी रुकवाने में भी सफल रहे और उनको भारतीय नागरिक साबित किया। साल्वे ने पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब करने के लिए कई तर्क पेश किए और कहा कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय और बुनियादी कानूनों की धज्जियां उड़ा दी हैं। यही वजह है कि साल्वे की तारीफ में सोशल मीडिया पर भी जमकर ट्वीट हो रहे हैं। (अखिलेश कुमार, सासाराम, रोहतास)

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Hindustan Mail Box Column on 22nd July