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इंसाफ बांटती भीड़

बिहार में भीड़ द्वारा तथाकथित इंसाफ किए जाने की एक घटना सामने आई है। इन दिनों देश के तमाम हिस्सों में ऐसी घटनाएं बढ़ गई हैं। लोग मौके पर ही फैसला करने लगे हैं। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया धूमिल हो रही है। लोकतंत्र पर भीड़तंत्र हावी होता जा रहा है, और सरकार व प्रशासन मूकदर्शक बने हुए हैं। बिहार के छपरा की घटना ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की सिद्धांतवादी लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई है। लोगों को समझना होगा कि यह एक लोकतांत्रिक देश है, जहां सभी लोगों पर समान रूप से कानून लागू होता है। (आयुष राज, आरा)

न्याय की उम्मीद
कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान की मंशा जगजाहिर हो गई है। पाकिस्तानी न्यायपालिका से न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती। वह अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है। वहां के कोर्ट से न्याय की उम्मीद इस लिहाज से भी बेमानी है कि खुद पाकिस्तान में कोर्ट कठघरे में है। आरोप है कि वहां की सर्वोच्च अदालत भी न्याय का सौदा करती है। पिछले दिनों ही मरियम नवाज ने एक वीडियो जारी करके न्याय-व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के फैसले से फिलहाल राहत यह मिली है कि जाधव को अभी फांसी नहीं दी जाएगी। चूंकि पाकिस्तान में मानवता का अंत हो चुका है, इसलिए कुलभूषण को बचाने के लिए हमारी सरकार को लगातार दबाव बनाए रखना होगा। सरबजीत जैसी नियति कुलभूषण की नहीं होनी चाहिए। (हितेंद्र डेढ़ा, चिल्ला गांव)

बाढ़ का कहर
अभी बिहार चमकी बुखार के शोक से उबर ही रहा था कि बाढ़ ने उसकी परेशानियां बढ़ा दी हैं। वहां भारी बारिश और बाढ़ की वजह से जान-माल की भारी हानि हुई है। इसके पड़ोसी राज्य असम में भी बाढ़ से काफी नुकसान की खबर है। यह स्थिति तब है, जब केंद्र और राज्यों के आपदा प्रबंधन तंत्र राहत और बचाव कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं। बिहार में नुकसान का आकलन इससे भी लगाया जा सकता है कि एक प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बार की तबाही को 1987 में आई बाढ़ से भी ज्यादा बड़ा बताया। असम और बिहार देश के दो ऐसे सीमावर्ती राज्य हैं, जिन्हें लगभग हर साल बाढ़ का प्रकोप झेलना पड़ता है। बिहार की बात करें, तो इस मौसम में अक्सर नेपाल से आने वाली नदियां यहां तबाही का सबब बनती हैं। बिहार का शोक कही जाने वाली कोसी नदी के साथ ही बागमती, गंडक और बूढ़ी गंडक जैसी नदियां जमकर तबाही मचाती हैं। हम भले ही प्राकृतिक आपदाओं को रोक नहीं सकते, लेकिन आपसी समन्वय और मेल-मिलाप से इससे होने वाले नुकसान को कम कर ही सकते हैं। क्या हमारे नेतागण ऐसा करने को तैयार हैं? (दुर्गेश शर्मा, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश)

शाबाश हिमा
ढिंग एक्सप्रेस के नाम से मशहूर ‘गोल्डन गर्ल’ हिमा दास ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए स्वर्ण पदकों की झड़ी लगा दी। भारतीय धाविका हिमा दास ने पिछले 15 दिनों के भीतर चार अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय स्पद्र्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में अंकित कर दिया। 19 वर्षीया हिमा ने इतने कम समय में इतनी सारी उपलब्धियों को हासिल करके देश को गौरवान्वित किया है। यदि उन्हें ‘उड़न परी’ की संज्ञा दी जाए, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने देश के प्रति अपनी निष्ठा और भावना का इजहार करते हुए अपना आधा वेतन असम बाढ़ राहत कोष में भी देने का एलान किया है। संघर्षों और चुनौतियों से भरा उनका जीवन हर भारतीय के लिए प्रेरक है। पूरे भारत को अपने इस जांबाज खिलाड़ी पर नाज है। (मोहित सोनी, धार, मध्य प्रदेश)

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  • Web Title:Hindustan Mail Box Column on 20th July