Hindustan Mail Box Column on 1st August - मुस्लिम महिलाओं को राहत DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मुस्लिम महिलाओं को राहत

आखिरकार अब मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल कानून की शक्ल ले लेगा। विपक्ष के विरोधी स्वर के बावजूद नरेंद्र मोदी सरकार-2 ने इस तीन तलाक बिल को राज्यसभा से पास करा लिया। राजनीतिक चश्मे को हटाकर यदि सूक्ष्मता से गौर करें, तो मुस्लिम महिलाएं, जो हर वक्त तलाक-तलाक-तलाक रूपी तीन शब्दों के भय से घुटन महसूस करती रहती थीं, अब राहत की सांस ले सकेंगी। इस बात में कोई शक नहीं कि गैस का चूल्हा देना हो या महिलाओं के सम्मान की रक्षा करते हुए शौचालयों के निर्माण का अभियान चलाना हो या फिर तीन तलाक बिल, मोदी सरकार नारी सशक्तीकरण की सोच रखती है। यह सराहना के योग्य है। हालांकि प्रचंड बहुमत वाली सरकार से यह अपेक्षा भी है कि वह मजहब, परंपरा या अंधविश्वास के नाम पर समाज में बच्चों, महिलाओं के जीवन को नरक बनाने वाले ऐसे सभी विषयों पर सुधार के लिए वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ेगी। तभी आम लोग खुशहाल होंगे और देश एवं समाज के गौरव में और अधिक वृद्धि हो पाएगी।
(रामप्रकाश शर्मा, वसुंधरा)

र्कोंचग का मकड़जाल
भारत के विभिन्न शहरों में आजकल कोचिंग सेंटर्स इस तरह से फलते-फूलते जा रहे हैं कि उन पर सरकार द्वारा किसी भी प्रकार से अंकुश लगाना नामुमकिन सा लग रहा है। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में कोचिंग संस्थानों का व्यापार जोर-शोर से चलता है। मगर जब हादसे होते हैं, तब असलियत सामने आती है और प्रशासन के किए गए कारनामों की कलई खुलती है। यही वजह है कि दिल्ली हाईकोर्ट को एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए इन कोचिंग सेंटर्स पर लगाम लगाने के निर्देश देने पड़े। मोटी फीस वसूलते ये कोचिंग सेंटर्स सुनहरे सपने दिखाते हैं, नौजवानों के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं, मगर जब छात्र-छात्राओं की सुरक्षा की बात आती है, तो ये चुप्पी साध लेते हैं। इन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को नियम-कानून बनाने ही होंगे। इन सबका नियमन अनिवार्य है। (विजय कुमार धनिया, नई दिल्ली)

ई-सिगरेट के नुकसान
एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ई-सिगरेट और पारंपरिक सिगरेट पीने से होने वाला नुकसान एक जैसा है। इसका अर्थ है कि ई-सिगरेट से भी कैंसर जैसी घातक बीमारी हो सकती है। अंतर सिर्फ यह है कि ई-सिगरेट में स्पष्ट धुआं नहीं निकलता। जाहिर है, यह तंबाकू कपनियों के विज्ञापन की सिर्फ एक रणनीति है कि ई-सिगरेट से नुकसान कम है। यही वजह है कि विज्ञापन की इस भ्रामक दुनिया में नौजवान इसका अत्यधिक सेवन वास्तविकता को जाने बगैर मनोरंजन के रूप में करते हैं। ऐसे में, ई सिगरेट को भी ‘नुकसानदायक ड्रग्स’ मानते हुए केंद्र सरकार देश भर में इसे प्रतिबंधित करने के लिए ठोस कानून बनाए। साथ ही जन-जागरूकता भी फैलानी होगी, ताकि लोग इसके दुष्प्रभावों को समझ सकें। (कपिल एम वड़ियार, पाली, राजस्थान)

पैदल चलना मुश्किल
बरसात के मौसम में सड़कों पर जगह-जगह जलभराव होना एक साधारण समस्या है। वाहन चालकों और पैदल चलने वाले लोगों, दोनों को पानी से डूबी सड़कों से गुजरना पड़ता है। मगर दिक्कत तब ज्यादा होती है, जब सड़कों के किनारे गलत तरीके से वाहन खड़े कर दिए जाते हैं। ज्यादातर हाउसिंग सोसाइटी मुख्य सड़कों के किनारे बनी हुई हैं और सड़क किनारे के अधिकतर वाहन इन्हीं घरों में रहने वाले लोगों के होते हैं। कई हाउसिंग सोसाइटी में पार्किंग की व्यवस्था न रहने से यह समस्या आती है। इससे राहगीरों को सड़कों पर चलने में काफी मुसीबतें उठानी पड़ती हैं। संबंधित विभाग इस समस्या से आंखें मूंदे रहता है। न जाने कब राष्ट्रीय राजधानी को इस समस्या से मुक्ति मिलेगी। (उमाशंकर यादव, दिल्ली)

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Hindustan Mail Box Column on 1st August