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हिंदी की स्थिति

जिस हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए अहिंदीभाषी राजा राममोहन राय, केशवचंद्र सेन, सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी ने आस्था के दीप जलाए, वह हिंदी आज अपने घर में ही बिलख रही है। उम्मीद थी कि अंग्रेजों के जाने के साथ अंग्रेजी भी विदा हो जाएगी, लेकिन सामंती मानसिकता वाले लोगों के कारण अंग्रेजी पल्लवित-पुष्पित होती गई। अब हिंदी न तो अस्मिता की पहचान है, न भारतीय संस्कृति की समग्र साधना है और न ही राष्ट्र निर्माण का साधन। अंग्रेजी संस्कृति आज गांव के चौपाल तक पहुंच गई है। कितनी करुण त्रासदी है कि आजादी के सात दशकों के बाद भी गांव का आम आदमी संसद में बोलते अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों की भाषा नहीं समझ सकता। हिंदीभाषी सांसदों को भी बढ़-चढ़कर अंग्रेजी बोलते देख हिंदी आज शर्मिंदा है।

अनु मिश्रा, बसंतपुर, सिवान

सुधार जरूरी

नया मोटर वाहन कानून सड़क पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें दुर्घटना कोष के गठन की बात भी कही गई है और राष्ट्रीय परिवहन नीति बनाने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि जुर्माने की राशि अधिक है, लेकिन इससे वाहन चलाने वालों में अनुशासन बढ़ेगा और देश की सड़कें सुरक्षित होंगी। कुछ राज्य जुर्माने की राशि को लेकर सहमत नहीं हैं। इससे बचने के लिए बेहतर होता कि केंद्र सरकार अधिनियम का एक बुनियादी ढांचा तैयार करती और क्रियान्वयन की जवाबदेही राज्यों पर छोड़ देती। अगर राज्य जुर्माने की राशि तय करते, तो संभव है कि यह कानून अधिक प्रभावी साबित होता। वैसे, केवल मनमाना जुर्माना तय करने से बात नहीं बनेगी। लोगों में यह अनुशासन बनाना होगा कि यातायात नियमों का वे खुद-ब-खुद पालन करें। इसके साथ ही, समय पर सड़क, यातायात, सिग्नल आदि को दुरुस्त करने की जवाबदेही सरकार को निभानी होगी। पुलिस का व्यवहार भी सहयोगात्मक बनाना होगा। इन सबसे न सिर्फ लोगों की आशंकाएं घटेंगी, बल्कि परिणाम कहीं बेहतर सामने आएंगे।

सूर्यभानु बांधे, रायपुर, छत्तीसगढ़

बेमतलब का विरोध

एक भाषण में प्रधानमंत्री द्वारा ‘ॐ’ और ‘गाय’ शब्द का इस्तेमाल क्या किया गया, विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया। इससे पता चलता है कि किसी भी मुद्दे को वह कितना सांप्रदायिक बनाना चाहता है। जैसी प्रतिक्रिया जाहिर की गई है, उससे यही लगता है कि ऐसे ही लोग धार्मिक भावनाएं भड़काकर देश की उन्नति में बाधा बने हुए हैं। विरोधियों को यह समझना चाहिए कि ‘गाय’ एक शब्द नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बुनियाद है। इसी तरह, ‘ॐ’ शब्द हमारी एकाग्रता बढ़ाने में कितना कारगर है, यह वैज्ञानिकों ने खूब बताया है। लिहाजा विरोधियों का यह रवैया चिंताजनक है।

रूमा सिंह

ऐसी हो रणनीति

केंद्र सरकार पॉलीथिन का इस्तेमाल बंद करना चाहती है। यह वास्तव में हर्ष का विषय है। इसके लिए सरकार को चाहिए कि वह सबसे पहले दूध, चिप्स, मसाला आदि की पैकिंग में प्रयोग होने वाली प्लास्टिक पर तुरंत रोक लगाए। तमाम बड़ी-बड़ी कंपनियां, जो अपने उत्पादों की सारी पैकिंग प्लास्टिक में करती हैं, उन पर भी तुरंत प्रतिबंध लगना चाहिए। रेहड़ी-पटरी पर बैठने वालों या छोटे-छोटे दुकानदारों पर जुर्माना लगाना उचित नहीं। सरकार को चाहिए कि वह सबसे पहले बड़े-बड़े पैकर्स तक पहुंचे, जो विभिन्न उपभोक्ता-सामानों को प्लास्टिक में बंद करते हैं। दूध का पाउडर, चाय की पैकिंग, तमाम खाद्य पदार्थों की पैकिंग, सभी प्लास्टिक की थैलियों में हो रही हैं।  सरकार बेशक कार्रवाई करे, लेकिन पहले बड़ी-बड़ी कंपनियों पर, फिर गरीब-निर्धन पर। ऐसा करने पर ही सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ सरकार की मुहिम सफल हो सकेगी।

प्रमोद अग्रवाल, हल्द्वानी, उत्तराखंड
 

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