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जैसे को तैसा

भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 खत्म करने और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित क्षेत्र बनाने पर पाकिस्तान की तिलमिलाहट स्वाभाविक है। जब से पाकिस्तान अलग देश बना है, तभी से उसकी आदत रोने की है, और रोने वाला देश कभी भी आगे नहीं बढ़ सकता। बहरहाल, पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने की जरूरत है। पाकिस्तान को यह एहसास कराना होगा कि उसको भारत की जरूरत है, न कि भारत को उसकी। जिस सख्ती से सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद को खत्म कर दिया है, उसी सख्ती से पाकिस्तान को मौके-दर-मौके सख्त जवाब भी दिया जाना चाहिए। (हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन)

चिंतन जरूरी
दिल्ली सरकार अब सरकारी गर्ल्स स्कूलों को ‘को-एड’ बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसका अर्थ है कि लड़के और लड़कियां एक साथ पढ़ाई-लिखाई करेंगे। यह खबर छात्राओं के साथ-साथ उनके अभिभावकों की चिंता भी बढ़ाने वाली है। चिंता कुछ आवारा किस्म के लड़कों की वजह से है। बिगड़े माहौल के कारण अब लड़के बेकाबू होते जा रहे हैं, जिसका असर लड़कियों पर पड़ सकता है। फिर, मुमकिन यह भी है कि इन लड़कों की बुरी आदतों से लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई प्रभावित होगी। इसलिए राज्य सरकार को पहले यह तय करना चाहिए कि वह इन शोहदों से निपटने के लिए कौन-से कदम उठा रही है? सरकार पहले चिंतन करे, फिर कोई फैसला ले। (आमोद शास्त्री, दिल्ली)

रफ्तार की उम्मीद
हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था में नया जोश भरने के लिहाज से इस वर्ष लगातार चौथी बार नीतिगत दरों में कटौती का फैसला किया है, जिससे रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को दीर्घकालीन ऋण सुविधा देता है) घटकर पिछले नो वर्षों के न्यूनतम स्तर पर है। यह कदम स्वागतयोग्य है, क्योंकि इस कटौती के कारण सस्ता ऋण उपलब्ध होगा, तरलता बढ़ेगी, बाजार में मांग बढ़ेगी और अंतत: उत्पादन भी बढे़गा, जिससे उम्मीद है कि रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश की सबसे विकट समस्या बेरोजगारी से कुछ हद तक राहत मिलेगी। निवेश बढ़ने से अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार मिलेगी। (कपिल एम वड़ियार, राजस्थान)

मौका चूक गए
‘चौकीदार चोर है’ कहने वाले राहुल गांधी ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे पर सरकार का विरोध करके अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। इतनी ठोकरें खाने के बाद राहुल गांधी के पास संभलने का एक अच्छा मौका था, लेकिन न जाने वह कौन-सी दुनिया में डूबे हैं कि उन्हें हर जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियां गलत ही दिखती हैं। शायद राहुल हर घटना को राजनीतिक चश्मे से देखते हैं। यदि वह सच का साथ देते, तो शायद राजनीति में एक अच्छे मुकाम पर होते, लेकिन उनकी मानसिकता एक सीमित दायरे में ही सिमटी हुई है, जिससे वह आज भी हंसी का पात्र बने हुए हैं। साफ है, कांग्रेस के लिए आने वाले समय में चुनौतियां बढ़ सकती हैं। (शिरीष सकलेचा, मध्य प्रदेश)

बड़ी क्षति
शनिवार को प्रकाशित एम वेंकैया नायडू का लेख पढ़ा। वाकई एस जयपाल रेड्डी और सुषमा स्वराज का निधन देश की राजनीति के लिए बहुत बड़ी क्षति है। ऐसे वक्त में, जब राजनीतिक शुचिता और विरोधी नेताओं के प्रति सम्मान पिछले दिनों की बातें हो गई हैं, तब जयपाल रेड्डी और सुषमा स्वराज जैसे राजनेता ही थे कि देश की राजनीति थोड़ी-बहुत गरिमापूर्ण दिख रही थी। ये दोनों आने वाले कई वर्षों तक प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे। (विवेक, इंदिरापुरम, गाजियाबाद)

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