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पाकिस्तान का दोहरा चरित्र 

हाफिज सईद को गुप-चुप तरीके से रिहा करके पाकिस्तान ने अपना दोहरा चरित्र फिर से प्रदर्शित किया है। एक तरफ, वह आतंकवाद से लड़ाई का झूठा नाटक करता है, वहीं दूसरी ओर आतंकियों से हाथ मिलाकर उनका सबसे बड़ा हितैषी बनता है। अगर पाकिस्तान यह सोचता है कि वह आतंकियों से हमले करवाकर भारत को कमजोर कर देगा, तो यह उसकी नासमझी है। भारत आतंक के आगे झुकता नहीं, उसका सामना करता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण कश्मीर से आतंकियों का सफाया है। एक दिन ऐसा आएगा, जब पाकिस्तान को उसके पाले आतंकी ही तबाह कर देंगे। चिंता का विषय यह है कि तबाही का आलम सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा। एक परमाणु संपन्न देश का आतंकियों का साथ देना संपूर्ण विश्व के लिए चिंताजनक है। जिस दिन आतंकियों ने इन परमाणु हथियारों पर कब्जा कर लिया, उस दिन शायद ही कोई देश बरबाद होने से बच पाए। 

गोविंद कुमार, वैशाली, बिहार

दुष्कर्म जघन्य अपराध

कुछ घटनाएं हमारी दिनचर्या का हिस्सा होती हैं, जिन पर इंसान का वश नहीं चलता, लेकिन चौथी कक्षा में पढ़ने वाली एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म घटना नहीं, वरन दरिंदगी की पराकाष्ठा है। इस तरह की वारदात के बारे में पढ़-सुनकर घृणा होने लगती है कि आखिर हम किस तरह के समाज में रह रहे हैं। हम अपने को इंसान कहते हुए भी शर्मिंदा महसूस करने लगते हैं। नफरत होती है उस शिक्षक से, जो इस प्रकार के कुकृत्य करता है। ऐसे लोगों के ऊपर सबसे संगीन अपराध का चार्ज लगाकर न सिर्फ कठोर से कठोर सजा दी जानी चाहिए, बल्कि ऐसे दुष्ट लोगों को समाज से बहिष्कृत करके इनकी नागरिकता भी रद्द कर देनी चाहिए। 

मोहन लाल प्रसादा, इसरी बाजार

जायज नहीं इतना जुर्माना 

एक सितंबर से पूरे देश में ट्रैफिक के नियम बदल गए हैं। यह सही बात है कि हम सबको ट्रैफिक नियमों का पालन करना चाहिए, लेकिन भूल-चूक मनुष्य का स्वभाव है। हेलमेट न पहनने पर जुर्माने की राशि 100 रुपये की जगह सीधे 1,000 किया जाना वास्तव में बहुत कष्टकारी है। ‘ट्रिपल राइडिंग’ पर 2,000 रुपये का जुर्माना और तीन माह के लिए लाइसेंस जब्त किया जाना भी उचित नहीं कहा जा सकता। कई बार किसी बीमार को अस्पताल ले जाने के लिए भी ट्रिपल राइडिंग करनी पड़ती है। सरकार को चाहिए कि जुर्माने की राशि पर पुनर्विचार करे। अपने देश की अधिकांश जनता निर्धन और मध्यमवर्गीय है। ऐसे में, इतना भारी जुर्माना जायज नहीं है। 

गगन बंसल,  सुभाष नगर, देहरादून 

तकलीफदेह नियम

समाज में जब कभी परिवर्तन होता है, तो उसमें रहने वाले लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। आज हमारे देश में मोटर-वाहन अधिनियम से संबंधित नए नियम लागू हो चुके हैं, जिसकी वजह से वाहन मालिकों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। नियमों के उल्लंघन पर उनसे न सिर्फ भारी जुर्माना वसूला जा रहा है, बल्कि कई बार तो वाहन से ज्यादा महंगा उसका चालान कट रहा है। परेशानी का एक कारण यह भी है कि जुर्माना भरने के लिए कम समय दिया जा रहा है। पुराने नियम में चालान होने पर एक महीने का समय अदालत में पेश होने के लिए देते थे, मगर नए नियम के तहत दो से चार दिन ही दिए जा रहे हैं। हाल यह है कि अदालत गिनी-चुनी हैं और चलानों की गिनती प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। नतीजा? अदालतों के बाहर लाइनें लग रही हैं। सरकार को आम नागरिकों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए और इनसे निपटनेके लिए मुकम्मल इंतजाम करने चाहिए। नए नियमों में भी कुछ नरमी बरती जानी चाहिए, जिससे लोगों की तकलीफें कम हो सकें। 

आलोक राय, दिल्ली

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