DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चुनाव बनाम गंदगी

दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्रसंघ चुनाव अब करीब है। कॉलेज परिसरों में चुनाव प्रचार के नाम पर जमकर गंदगी फैलाई जा रही है। मगर यह गंदगी किसी भी छात्र प्रतिनिधि के लिए मुद्दा नहीं है। यानी जिन्हें कल का भविष्य कहा जाता है, वे आज स्वच्छता को लेकर कतई जागरूक नहीं हैं। आलम यह है कि जगह-जगह पैम्पलेट, पोस्टर चिपका दिए गए हैं, बस स्टैंड्स को भी पैम्पलेट से ढक दिया गया है। क्या दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र होने के नाते स्वच्छता की हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है। जब छात्रसंघ चुनाव का यह हाल है, तो बाकी चुनावों का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। ऐसे चुनाव प्रचार से न सिर्फ गंदगी फैलती है, बल्कि पर्यावरण को भी काफी नुकसान पहुंचता है। विश्वविद्यालय प्रशासन को अपनी आंख खोलनी होगी और ऐसे उम्मीदवारों पर सख्त कार्रवाई करनी होगी। वोट मांगने के लिए आने वाले उम्मीदवारों को यह संकल्प भी दिलवाना होगा कि वे परिसर गंदा न करें। अगर आज हमने आवाज नहीं उठाई, तो गंदगी का यह सिलसिला कभी थमेगा नहीं।

आशीष, दिल्ली विश्वविद्यालय

इसरो का बढ़ता कद

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो एक ऐसी विश्व प्रतिष्ठित संस्था है, जिसने अपनी उपलब्धियों से दुनिया भर में भारत के लिए अद्वितीय ख्याति अर्जित की है। इस संगठन के प्रयास से ही आज भारत दुनिया में अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी देशों की पंक्ति में खड़ा है। चंद्रयान-2 भारत के लिए एक महत्वपूर्ण योजना थी। प्रबल संभावना थी कि यह मिशन सफल होगा और भारत एक इतिहास रचेगा। किंतु अंतिम पल में लैंडर का संपर्क विक्रम से टूट गया। हालांकि इसका यह तात्पर्य कदापि नहीं है कि चंद्रयान-2 अभियान विफल हो गया। ऐसे मिशन एक दिन में सफल और विफल नहीं होते। यहां निरंतर प्रयोग होते रहते हैं और बार-बार होते हैं। ये तब तक होते रहते हैं, जब तक सफलता न मिल जाए; बिल्कुल जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव की तरह। विक्रम चंद्रमा के जितने करीब पहुंच सका, उतने नजदीक अपने पहले ही प्रयास में पहुंच जाना कोई आसान काम नहीं था। मगर भारतीय वैज्ञानिकों ने हर पल प्रयास किया और वे आगे भी करते रहेंगे। इसरो की यह उपलब्धि अपने आप में एक स्वर्णिम इतिहास है। प्रबल संभावना है कि इसरो इससे और मजबूत बनकर उभरेगा।
रूमा सिंह

चांद तक पहुंच
भारत के चंद्रयान-2 मिशन को पूरी तरह असफल नहीं कहा जा सकता, क्योंकि कई उन्नत तकनीक वाले देशों के भी इस प्रकार के मिशन विफल रहे हैं। सफल और असफल होना इस प्रकार के मिशन का हिस्सा है, लेकिन जो प्रयास करता रहता है, वही सफल होता है। भारत बिल्कुल सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। हमें चांद पर जाने की कोशिश सिर्फ इसलिए नहीं करनी चाहिए कि हम अन्य देशों से मुकाबला करना चाहते हैं, बल्कि इस प्रकार के परीक्षणों से तकनीक का विकास होता है, जिससे हमारे रक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों को खासा मजबूती मिलती है।
नवीनचंद्र तिवारी, दिल्ली

नए नियमों का पालन
नए यातायात नियम, जो हाल में लागू हुए हैं, आम लोगों के हित में हैं, लेकिन दिक्कत यह है कि कुछ स्वार्थी और कानून के संरक्षक लोग इसका पालन करने से कतराते हैं। यह समझना होगा कि आम लोग तभी नियमों का पालन करते हैं, जब कानून के रखवाले करते हैं। इसका अर्थ है कि पहले प्रशासन के लोग और कानून के संरक्षक नियमों का ईमानदारी से पालन करें, तब आम जनता पर जुर्माना लगाएं। अधिकतर पुलिसवाले नियमों को धड़ल्ले से तोड़ते हैं। जब प्रशासन के लोग ही ऐसा करेंगे, तो आम लोगों से भला क्या उम्मीद रखी जाएगी।
जे पटेल, धनबाद

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:hindustan mail box column on 10 september