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विकल्प सुझाए सरकार

इन दिनों भारत में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने की बात सभी कह रहे हैं। माना जा रहा है कि 2 अक्तूबर से इस अभियान की शुरुआत हो जाएगी। इससे आम लोगों से लेकर दुकानदारों तक में असमंजस की स्थिति बन गई है। यह असल में विकल्पहीनता के कारण है। सरकार भी पूरी तरह से पॉलीथिन के विकल्प नहीं बता पा रही है। अभी स्थिति यह है कि आम जनजीवन में प्लास्टिक रच-बस गया है। इसका सभी जगहों पर इस्तेमाल होता है। ऐसे समय में, जब त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है, तब बाजार या दुकानदार कई उम्मीद पालते हैं। मगर फिलहाल तो पॉलीथिन को लेकर बाजार में अफरा-तफरी का माहौल है, जबकि इससे कई लोगों के आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। इसलिए सरकार को पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ इसके विकल्पों पर भी बात करनी चाहिए। मेरी समझ में एक विकल्प यह हो सकता है कि वह इको-फ्रेंडली पॉलीथिन को प्रोत्साहित करे। जरूरत इसी बात की होनी चाहिए कि आम जनता परेशान न हो।
विजय किशोर तिवारी, दिल्ली

जान लेती अफवाह

देश के कई राज्यों में इस समय बच्चा चोरी की खबरों से लोगों में डर है। इसी कारण बच्चा चोरी की आशंकाओं में कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें महज शक के आधार पर किसी की जान ले ली गई। ऐसी घटनाओं की जद में कई बार निर्दोष भी आ गए। ऐसे में, जरूरी है कि हमारा समाज अफवाहों से बचे। हमें यह गंभीरता से सोचना चाहिए कि क्या हमें कानून को अपने हाथ में लेना चाहिए? बेहतर होगा कि इस तरह की सूचनाएं मिलने पर हम कानून की मदद से दोषी को सजा दिलाएं। इससे बेगुनाह नागरिक परेशान नहीं होंगे।
-धमेंद्र कुमार, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश

बेलगाम पर लगाम

शानदार और असरदार ट्रैफिक नियमों से सड़क हादसों में निश्चित तौर पर कमी आई है। बढ़ी चालान दरों के कारण शुरुआत में तो चालकों में उदासीनता का माहौल था, लेकिन अब धीरे-धीरे वे सामान्य अवस्था में आने लगे हैं। वहीं, अब लाइसेंस और पॉल्युशन पेपर बनवाने के लिए लोग कतारों में लग रहे हैं। इससे लोगों के साथ-साथ आरटीओ डिपार्टमेंट के कर्मचारियों का भी हाल बुरा है। बढ़ी चालान दरों का सबसे अधिक असर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में देखने को मिल रहा है। बिना कागजात गाड़ी चलाने वाले चालक अब बसों और मेट्रों से आने-जाने लगे हैं, जिसके कारण इन दिनों सार्वजनिक परिवहन पर भार ज्यादा बढ़ गया है। साफ है कि भारी-भरकम चालान को देखकर लोग सुधर रहे हैं। उन्हें अब यह समझ में आने लगा है कि ये नियम उनकी सुरक्षा के लिए ही बनाए गए हैं। निश्चय ही, आने वाले दिनों में हिन्दुस्तानी भी विदेशियों की तरह यातायात नियमों का पालन करते नजर आएंगे।
-राकेश चौधरी, वसुंधरा एनक्लेव, नई दिल्ली

उम्मीद बाकी है अभी

हम सब यही सोच रहे थे कि अगर चंद्रमा पर लैंडर की क्रैश लैंडिंग हुई होगी, तो हमारा उससे फिर से संपर्क स्थापित करना नामुमकिन हो जाएगा। मगर जब से ऑर्बिटर ने यह जानकारी दी कि लैंडर विक्रम अब भी सही सलामत है, तब से इसरो और देश के सभी लोगों में एक नई उमंग जाग उठी है। उम्मीद यह है कि किसी तरह फिर से हम उसे निर्देश दे सकें और चंद्रयान-2 मिशन को पूरा करके एक नया कीर्तिमान पूरे विश्व के समक्ष स्थापित कर सकें। अभी इसरो ने खुलासा किया है कि लैंडर विक्रम अपनी तय की गई जगह से कुछ दूरी पर गिरा है। यह हम सबके लिए बड़ी खुशखबरी है। चूंकि उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, इसलिए हर देशवासियों में उम्मीद की एक किरण जाग उठी है। इससे दुनिया भर में इसरो का डंका फिर से बज उठेगा, ऐसा भरोसा है।
-सम्राट केतन शर्मा

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