hindustan mail box column june 29 - बेहाल स्वास्थ्य सेवा DA Image
19 नबम्बर, 2019|9:49|IST

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बेहाल स्वास्थ्य सेवा 

गुरुवार को प्रकाशित संपादकीय ‘चिकित्सा की चिंता’ पढ़ी। यह सही है कि हमने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में तरक्की की है, पर यह बात भी उतनी ही सही है कि लोगों को बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के मामले में हम अब भी पीछे हैं। दरअसल, स्वास्थ्य के प्रति न तो लोगों में उतनी जागरूकता है, न ही सरकार पर्याप्त ध्यान देती है। बजट में छोटी सी राशि का प्रावधान करके कर्तव्य पूरे कर लिए जाते हैं। कमजोर और लाचार चिकित्सा तंत्र के कारण बिहार और गोरखपुर के अस्पतालों में बच्चों की मौत जैसी घटनाएं सामने आती हैं। इसके अलावा, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का न मिलना, दवाओं की कमी और भ्रष्टाचार की शिकायतें रोजमर्रा की घटना के रूप में सामने आती हैं। प्रधानमंत्री ने उचित ही राज्यसभा के अपने वक्तव्य में स्वास्थ्य-सेवाओं को और अधिक चुस्त-दुरुस्त करने पर बल दिया है, जो वास्तव में सरकार का दायित्व भी है। लोगों को भी अपनी सेहत के प्रति जागरूक होना चाहिए, ताकि चिकित्सा तंत्र की कम से कम जरूरत पडे़।
रामप्रकाश शर्मा, वसुंधरा

गहराती दोस्ती
भारत और जापान की बढ़ती दोस्ती से अमेरिका नाखुश दिखाई दे रहा है। कार बनाने से शुरू हुई भारत और जापान की मित्रता अब बुलेट ट्रेन तक आ गई है। यही वजह है कि ओसाका में चल रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत काफी गर्मजोशी के साथ किया, साथ ही कई अन्य मामलों पर विचार-विमर्श करके महत्वपूर्ण फैसले भी लिए, जो भारत के हित में हैं। मगर अमेरिका की अलग बेचैनी है। लगता है कि वह टैरिफ बढ़ने से उतना परेशान नहीं है, जितना भारत की तरक्की से। भारत ने वित्तीय लेन-देन करने वाली हर कंपनी का डाटा संग्रह करना शुरू कर दिया है, जिससे अमेरिकी कंपनियों को परेशानी महसूस हो रही है। दूसरी ओर, जापान और भारत एक-दूसरे की संस्कृति का भी सम्मान करने लगे हैं, जिसके कारण बनारस को अब टोक्यो बनाने की बात कही जाने लगी है।
पवनेश कुमार

सत्ता की हनक
इंदौर में विधायक द्वारा नगर निगम कर्मी को पीटने की घटना शर्मसार कर देने वाली है। इसमें कौन सही है और कौन गलत, यह तो जांच व न्याय का विषय है। लेकिन जब लोकतंत्र के प्रहरी असामाजिक तत्वों जैसी हरकतें सड़कों पर करने लग जाएं, तो हम आम असामाजिक तत्वों से भला यह क्योंकर अपेक्षा करें कि वे देश की कानून-व्यवस्था की इज्जत करेंगे? विधायकों और सांसदों को अपने पद और गरिमा का ध्यान रखकर कदम उठाना चाहिए। उनकी ऐसी हरकतों से जनता में शुभ संदेश नहीं जाता, बल्कि इससे पार्टी का कद भी घटता है, जो कतई ठीक नहीं है।
हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद

नियमों का पालन
सामान्य ट्रैफिक नियमों की जानकारी लगभग सभी वाहन चालकों को होती है, जैसे कार चलाते समय सीट बेल्ट बांधनी है, स्कूटर-मोटरसाइकिल पर हेलमेट लगाना है, वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात नहीं करनी है, लाल बत्ती देखकर रुकना है आदि। ये सब छोटी-छोटी बातें हैं, जिन पर अमल करना हमारी सुरक्षा के लिए जरूरी है। मगर प्रशासन जब यही नियम लागू करना चाहता है, तो लोगों को खराब लगता है। चेकिंग अभियान भी कुछ ऐसा ही है। अगर आपके पास वाहन से संबंधित सभी कागजात हैं, तो कोई अधिकारी आपको परेशान नहीं कर सकता। मगर हम हैं कि मानते नहीं। वास्तव में, हमें पुलिस-प्रशासन का सहयोग करते हुए इन अभियानों को सफल बनाना चाहिए। अपनी गलतियों को सुधारकर हम सड़क हादसे रोक सकते हैं। नियम हमारी सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं, हमें परेशान करने के लिए नहीं।
मुकेश पांडे
 

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