Hindustan Mail Box Column August 20 - आर्थिक गिरावट DA Image

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आर्थिक गिरावट

दिन-प्रतिदिन लोगों की जाती हुई नौकरियां अखबारों की सुर्खियां बनी रहती हैं। देश के अंदर अर्थव्यवस्था की जो हालत है, वह आर्थिक महासंकट का संकेत है। अर्थव्यवस्था का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं, जिसमें स्थिति स्थिर हो। चाहे ऑटो सेक्टर हो, सूचना-संचार हो या फिर सबसे ज्यादा निचले तबके को रोजगार देने वाला रियल स्टेट सेक्टर। देश में गाडि़यों के 200 से ज्यादा शोरूम का बंद होना, 25,000 से ज्यादा लोगों की नौकरियां जाना और 13 लाख लोगों की नौकरियों पर तलवार लटकना अच्छा संकेत नहीं है। पहली बार बाजार में दोपहिया वाहनों की मांग में कमी देखने को मिली है। सरकार को अर्थव्यवस्था के सही आंकड़े पेश करके सुधार के मार्ग तलाशने चाहिए। (मोहम्मद आसिफ, दिल्ली)

ऐतिहासिक स्थलों की चिंता
भारत में अनेक ऐतिहासिक स्थल हैं, जो महान लोगों की यादों में बनाए गए हैं और ये स्थल इतने सुंदर हैं कि भारत की शोभा में चार चांद लगाने का काम करते हैं। लोग अपने परिवार के साथ छुट्िटयां बिताने के लिए इन स्थलों पर घूमने जाते हैं, लेकिन अक्सर घूमने-फिरने के दौरान ये लोग खाने-पीने का सामान ले जाते हैं, जिससे इन स्थलों पर गंदगी होती है। इस प्रकार की गंदगी बढ़ने से क्या  भारत की शोभा प्रभावित नहीं होती? इन स्थलों पर घूमने आए लोगों के सामान का मूल्यांकन करने के लिए सरकार को अधिकारियों की नियुक्ति करनी चाहिए, ताकि आकर्षक स्थलों पर गंदगी को रोका जा सके और भारत की शोभा कायम रह सके। (विनीत, आंबेडकर कॉलेज)

सही रुख
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण और प्लास्टिक पर प्रतिबंध के लिए जन अभियान चलाने की प्रशंसा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर भाषण में इन बातों का उल्लेख किया था। इसी तरह, कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी भी मोदी के इस नए जनवादी कार्यक्रम से पूरी तरह सहमत हैं। महज विरोध के लिए विरोध कभी उचित नहीं होता। इसलिए ऐसी सकारात्मक पहल और सहयोग से ही पार्टी एक बेहतर संदेश सभी को देकर नई और अच्छी शुरुआत कर रही है। यह सभी के लिए बड़ी खुशी की बात है। एक स्वस्थ लोकतंत्र में सशक्त विपक्ष भी बहुत जरूरी होता है। आज कांग्रेस की कार्यप्रणाली और सोच में बुनियादी बदलाव की सख्त जरूरत है। सरकार को अच्छे और सकारात्मक सुझाव देकर ही कांग्रेस खुद को फिर से स्थापित करने में सक्षम होगी। किसी भी अच्छे कार्य में सहयोग करना या सुझाव देना हमेशा कारगर होता है। मात्र राजनीति के लिए राजनीति करना ठीक नहीं है। जहां जरूरी हो, वहां सरकार का तार्किक, पारदर्शी और ठोस विरोध गलत नहीं है। (वेद मामूरपुर, नरेला)

पतंगबाजी पर लगाम
देश के अंदर कानून तो बहुत बनते रहते हैं, पर उनका पालन शायद ही हो पाता है। ऐसी ही लापरवाही के कारण जाने-अनजाने में कितने लोगों की जान चली जाती है। देश में जितने भी कानून बने हैं, उनमें एक कानून बना था पतंगबाजी को लेकर, पर पतंग की खतरनाक डोर ऐसी है, जो सुलझने का नाम नहीं ले रही, जबकि इससे अनेक मासूम इंसानों व जीवों की सांसें थम जाती हैं। इन सांसों के थमने की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं होगा। उन पक्षियों का क्या दोष, जो आसमान में अपनी मस्त चाल से उड़ान भरते हैं, लेकिन उनके लिए यह मस्ती भारी पड़ जाती है, जब वे किसी धागे से कटकर जमीन पर आ गिरते हैं? यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतना नुकसान होने के बावजूद शासन-प्रशासन की नींद नहीं खुलती। उसकी इतनी जिम्मेदारी तो बनती ही है कि वह पतंगबाजी पर कड़ाई से लगाम लगाए, ताकि उससे कम से कम किसी की जान न जाए। (नीरज कुमार पाठक, नोएडा)

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