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पाकिस्तान को झटका

शुक्रवार को प्रकाशित पूर्व विदेश सचिव शशांक के लेख ‘कूटनीतिक चाल से बढ़ेंगे नासूर’ में पाकिस्तान को खबरदार किया गया है कि जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन पर उसकी बौखलाहट खुद उसी पर भारी पड़ सकती है। अगर पाकिस्तान समझदारी से चलता, तो आज उसकी गिनती दुनिया के अच्छे देशों में होती, मगर उसे तो अपने नागरिकों की कोई फिक्र ही नहीं है। अब तो उसने कहा है कि भारत सरकार के फैसले की शिकायत वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी करेगा। उसका यह प्रयास उसी पर भारी पड़ेगा और वह दुनिया भर में अपनी किरकिरी करवाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, और भारत ही इस पर कोई फैसला लेगा। उल्टे पुलवामा जैसे हमले की धमकी देकर पाकिस्तान ने फिर यही साबित किया है कि घाटी का माहौल खराब करने में उसी का हाथ है। फिर भी, भारत को उसके हर कदम पर पैनी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि बौखलाहट में वह किसी भी हद तक जा सकता है। (राजेश कुमार चौहान, जालंधर)

बदलता देश
परिवर्तन एक स्थाई क्रिया है। जो परिवर्तन को स्वीकार न करके (विपक्ष) जड़ता को अपनाता है, उसका अंत निश्चित है। परिवर्तन केवल बदलाव का प्रतीक नहीं, यह नई ऊर्जा (सत्ता पक्ष) का स्रोत है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने 70 साल पुरानी भूल (अनुच्छेद 370) को परिवर्तित करके न सिर्फ इतिहास बदल दिया है, बल्कि नई ऊर्जावान राजनीति के साथ देश में अखंडता भी पुनर्प्रतिष्ठित की है। यही सियासत है। मगर विपक्ष हाय-तौबा कर रहा है। उसे समझना होगा कि यहां पर कब स्वर करना है और कब शोर। जो इसे जानता है, सफलता उसे ही मिलती है। (अभिप्रिंस घुवारा, टीकमगढ़)

बेचैन होता पड़ोसी
एक समय था, जब पाकिस्तान की आतंकी हरकतों से भारत बैचेन रहा करता था, परंतु अब भारत सरकार द्वारा किए जा रहे कायार्ें से पाकिस्तान की बैचेनी बढ़ती जा रही है। मोदी सरकार के अनुच्छेद 370 पर साहसपूर्ण निर्णय से भारत में जहां खुशी का माहौल है, वहीं पाकिस्तान में हलचल सी मची है। भारत के इस निर्णय से बेचैन होकर पाकिस्तान ने अब अपने यहां भारतीय फिल्मों का प्रदर्शन रोक दिया है। इससे पहले कूटनीतिक संबंध के स्तर कम किए गए थे और आपसी व्यापार भी बंद करने का फरमान सुना दिया गया था। पाकिस्तान की इस बेचैनी का मुख्य कारण है, कश्मीर। पाकिस्तान भारत के इस हिस्से को हमेशा अपना बताता रहा है, लेकिन अब भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए यहां के विशेष दर्जे को ही खत्म कर दिया। यह पाकिस्तान को बर्दाश्त नहीं हो रहा और दुनिया भर के देशों से वह मदद मांग रहा है। (ललित शंकर, मवाना, मेरठ)

जुर्माने से आय
नए मोटर वाहन कानून में जुर्माने की राशि कई गुना बढ़ा दी गई है। इससे सरकार की आय बढ़ेगी और कुछ अनुशासन भी होगा। लोगों की गलतियों में सुधार तो होगा ही। लेकिन इसके कानूनी प्रावधानों का प्रचार-प्रसार भी निरंतर होते रहना जरूरी है, ताकि जनता सचेत रहे और गलतियां न दोहराए। हालांकि दुख की बात यह है कि काले शीशे वाली कारों को लेकर इसमें कुछ नहीं कहा गया है, जबकि ये कई अपराधों के चलते-फिरते अड्डे हैं। बाइकर्स खासकर बुलेट मोटरसाइकिल के भयंकर कानफोड़ू आवाज को भी इसमें नजरंदाज कर दिया गया है। इसी तरह, काले धुएं से प्रदूषण फैलाते वाहनों के बारे में भी कुछ ठोस नहीं कहा गया है। सड़कों पर अतिक्रमण और इनकी जानलेवा हालत पर संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों और अतिक्रमण करने वालों पर कार्रवाई की बात की जाती, तो अच्छा होता। साफ है, नए कानून पर जनता से राय लेनी चाहिए थी। (महेंद्र मान, अलीपुर)

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  • Web Title:Hindustan Mail Box Column August 10