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लाचार चुनाव आयोग 

समाचार पत्रों से पता चला है कि सर्वोच्च न्यायालय की लताड़ के बाद सपा, बसपा और भाजपा के नेताओं पर चुनाव आयोग को  अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी पड़ी। यह कार्रवाई इन नेताओं के अमर्यादित और धार्मिक व जातीय वैमनस्यता बढ़ाने वाले आचरण को देखकर की गई। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में यह बात शायद मान ली है, वह नख-दंत विहीन शेर है। ऐसे में, टी एन शेषण का दौर बरबस याद आ जाता है, जब अभद्र और अमर्यादित भाषा बोलने वाले नेताओं को उनकी हैसियत बता दी गई थी। आज अगर शेषन जैसे कर्तव्यनिष्ठ, लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन कराने वाले बहादुर चुनाव आयुक्त कुरसी पर होते, तो निश्चित ही देश का राजनीतिक और सामाजिक माहौल इतना दूषित नहीं होता। समय रहते इसका इलाज कर दिया जाता। अफसोस कि आज चुनाव आयुक्त द्वारा तमाम ताकत होते हुए भी खुद को एक लाचार संस्था के मुखिया जैसी लाचारगी व्यक्त की जा रही है। यह दुखद है। (निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद)

आचार संहिता का पालन
चुनावों के दौरान एक पार्टी के नेता दूसरी पार्टी के नेताओं पर आरोप लगाने से कतई नहीं चूकते। परिजनों के साथ प्रचार करके वे अपने घर की एकता को दिखाने का बखूबी प्रयास करते हैं, लेकिन समाज को जाति, धर्म और लिंग के आधार पर बांटकर अपना वोट बैंक बनाने का काम भी खूब करते हैं। अभी के चुनाव में ही देखा जा रहा है कि कोई बजरंग बली का नाम लेकर लोगों को उकसा रहा है, तो कोई अली का नाम लेकर मतदाताओं से अपील कर रहा है। सब किसी भी तरह से चुनाव जीतना चाहते हैं। चुनाव आयोग ने उचित ही ऐसे नेताओं पर कार्रवाई की है। निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की एक मुख्य मांग है। (कुमार राहुल)

निशाने पर महिलाएं
चुनावी सियासत में महिलाओं की इज्जत तार-तार की जा रही है। क्या अंदरूनी कपड़े को लेकर की गई टिप्पणी जायज है? इस तरह की टिप्पणी केवल एक औरत का नहीं, बल्कि समस्त महिला जाति का अपमान है। एक दिन भी नहीं बीता है कन्या पूजन का। कहा भी गया है कि जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। नारी का अपमान देश का अपमान है। इसीलिए चुनावी सियासत में सभी दलों को अपने शब्दों पर ध्यान देना चाहिए। सबका सम्मान जरूरी है। (सुमन मलिक, न्यू आर्य नगर, मेरठ)

जागो ग्राहक जागो
आज जिस प्रकार से मानवीय मूल्यों में गिरावट आ रही है, दुखद है कि हर तरफ व्यावसायिक हितों का ज्यादा पोषण किया जा रहा है। हैरानी की बात है कि जब हम किसी बड़े मॉल या सार्वजनिक स्टोर से घरेलू सामान खरीदते हैं, तो बाजार भाव के मुताबिक दाम अदा करने के बाद भी कैरी बैग के लिए अतिरिक्त शुल्क मांगा जाता है। यह निरापद है। एक कंपनी द्वारा कैरी बैग मांगने के एवज में उपभोक्ता फोरम द्वारा उस कंपनी पर नौ हजार रुपये का जुर्माना लगाना एक उचित फैसला है। यह वाकई सेवा में कमी का मामला है, जिस पर सभी कंपनियों को गौर करना चाहिए। ग्राहकों के हितों को उन्हें महत्व देना ही चाहिए। (विजय पपनै, फरीदाबाद)

नक्सलवाद का अंत
नक्सलियों के हौसले फिर बढ़ते जा रहे हैं। इसका प्रमाण है दंतेवाड़ा में घटित घटना, जिसमें विधायक और चार सुरक्षाकर्मियों को नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया। मध्य प्रदेश के बालाघाट में भी नक्सलियों द्वारा मतदान का बहिष्कार करने संबंधी पर्चे बांटने का मामला सामने आया है। ऐसी हरकतें करके लोगों के बीच भय का माहौल पैदा करने का प्रयास वे कर रहे हैं, इसीलिए नक्सलवाद का जड़ से उन्मूलन जरूरी है। (ललित महालकरी, इंदौर, मध्य प्रदेश)

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  • Web Title:Hindustan Mail Box Column April 17