Hindustan Mail Box column 30th august - कुल्हड़ वाली चाय DA Image

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कुल्हड़ वाली चाय

मिट्टी से बने कुल्हड़ हमारे सामाजिक जीवन की धरोहर हैं। चाय की खुशबू और जायका ढूंढ़ते लोगों को कुल्हड़ वाली महक एक अलग एहसास देती है। विलुप्त होती इस बेमिसाल विरासत को बचाने का प्रयास लालू यादव के रेल मंत्री रहते समय रेल मंत्रालय ने चाय के बहाने किया था। पर लालू यादव के सियासी करियर के साथ-साथ कुल्हड़ फिर से चाक की तरफ लौट गया। बेशक कुछ लोगों ने इसे आधुनिक फैशन का हिस्सा बनाने की छोटी कोशिशें कीं। मगर मरणासन्न कुल्हड़ उद्योग में जान फूंकने की वे कोशिशें नाकाफी साबित हुईं। हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रेल, एयरपोर्ट, बस अड्डे और मॉल जैसी सार्वजनिक जगहों पर कुल्हड़ वाली चाय अनिवार्य करने की राय दी है। पर्यावरण और सेहत को लक्ष्य करके लिखी गई उनकी यह चिट्ठी मृदा उद्योग सहित परंपरागत कुल्हड़ चाय की परिपाटी को प्रोत्साहित करने में अवश्य सहायक होगी। शायद कुल्हड़ फिर से चाक से चौपाल तक नजर आने लगें।
एमके मिश्रा, रातू

फिट रहने के गुर
गुरुवार को देश भर के स्कूल-कॉलेजों में खेल दिवस जोर-शोर से मनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ की शुरुआत की। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में इस अभियान की शुरुआत हुई, तो रंगारंग कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री के सामने कई देसी खेलों का प्रदर्शन हुआ, जिनमें कबड्डी, खो-खो, गिल्ली-डंडा, कंचे समेत लुप्तप्राय खेल दिखाए गए। यह बहुत अच्छी बात है। अब जरूरत इस बात की है कि इन खेलों का खूब प्रचार-प्रसार हो और राज्य या राष्ट्र स्तर पर प्रतियोगिता का आयोजन किया जाए। देसी खेल फिट रहने के लिए भी कारगर माने जाते हैं, इसीलिए सिर्फ खेल दिवस पर इन खेलों का प्रदर्शन करके इन्हें भुला न दिया जाए। 
प्रदीप कुमार दुबे, देवास, मध्य प्रदेश

गीदड़भभकी से डरना क्या
भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35-ए हटाए जाने से पड़ोसी देश पाकिस्तान की बौखलाहट चरम पर है। इसीलिए वह कभी आतंकी हमले की धमकी देता है, तो कभी परमाणु युद्ध की। कल ही उसने ‘गजनवी’ मिसाइल के परीक्षण की जानकारी दी। लेकिन यह सब करते हुए वह भूल जाता है कि उसकी आर्थिक सेहत दुरुस्त नहीं है। दुनिया के ज्यादातर विकसित देशों से वह कर्ज ले चुका है और उसका वित्तीय संकट इतना ज्यादा है कि सरकारी विभाग तक भी अपना बकाया भुगतान नहीं कर पा रहे। यहां तक कि प्रधानमंत्री सचिवालय का भी बिजली बिल का भुगतान नहीं हो पा रहा है। कंगाली के इस दौर में पाकिस्तान को अपने आर्थिक विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन मानो उसने अपनी कब्र खुद ही खोदने का संकल्प ले लिया है। इसीलिए वह भारत से टकराने की बात कर रहा है।
सुनील कुमार सिंह, मेरठ, उत्तर प्रदेश

जान लेती अफवाह 
दनकौर में एक मानसिक रोगी को कुछ ग्रामीणों ने बच्चा चोर समझकर पीट-पीटकर अधमरा कर दिया। यह सब क्या हो रहा है हमारे देश में? सोशल मीडिया पर लगातार फैलाई जाने वाली झूठी अफवाहें हमारे समाज का हिस्सा बनती जा रही हैं। इसके खिलाफ हमें जागरूक होने की जरूरत है। दनकौर वाली घटना भी एक झूठी अफवाह का नतीजा थी और पुलिस की तत्परता से एक जान जाते-जाते बची। अगर उस युवक की जान चली जाती, तो संभव है कि अगले दिन सोशल मीडिया पर उस युवक के धर्म को लेकर भी अफवाह फैलती। इन अफवाहों से बचने के लिए रोजाना तमाम तरह की तरकीबें और उपाय सुझाए जा रहे हैं। जरूरत है, उन पर गंभीरता से अमल करने की और कुछ बड़े कदम उठाने की, ताकि सबकी सुरक्षा हो सके। अश्वनी चावला, सेक्टर- 75, नोएडा
 

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