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25 जुलाई, 2020|12:04|IST

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व्यवस्था पर सवाल

गाजियाबाद में एक पत्रकार जब पुलिस के पास अपनी भांजी के साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाने जाता है, तब उसकी रिपोर्ट तो लिखी नहीं जाती, बल्कि इसकी सूचना छेड़छाड़ करने वालों तक पहुंचा दी जाती है। नतीजतन, अपराधी उस पत्रकार पर सरेआम जानलेवा हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर देते हैं और इलाज के दौरान उसकी मौत हो जाती है। जब इस पर बवाल मचा, तो प्रशासन अब हरकत में आया है। सवाल यह है कि अपराध होने के बाद ही सक्रियता क्यों दिखती है पुलिस? ऐसे सभी मामलों में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों/ सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह से मुआवजे की राशि काटी जानी चाहिए और इन कर्मियों की नौकरी छीनकर पीड़ित के परिजन को दी जानी चाहिए। कानून का राज फिर से स्थापित करने के लिए इस तरह की मिसालें आवश्यक हैं।
आदित्य अवस्थी, डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स, नई दिल्ली

छात्रों के हित में
किसी भी देश के स्वर्णिम भविष्य का रास्ता स्कूलों से ही निकलता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता किस स्तर की है? इस समय कोरोना संक्रमण-काल में हर जगह शिक्षा की स्थिति डांवांडोल है। स्कूल कब खुलेंगे, यह कोई नहीं कह सकता? अभिभावक घबराहट में हैं, और वे स्कूल खुलने पर भी फिलहाल बच्चों को भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। ऑनलाइन शिक्षा की अपनी सीमाएं हैं, लेकिन स्कूल बंद रहने की स्थिति में अन्य कोई विकल्प भी नहीं है। ऐसे में, सीबीएसई ने 30 फीसदी पाठ्यक्रम कम करने का जो फैसला किया है, वह बच्चों और अध्यापकों के हित में है। मगर हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि पाठ्यक्रम से ऐसे अंश न हटा दिए जाएं, जिससे शिक्षा की अवधारणा और उसकी गुणवत्ता किसी तरह प्रभावित हो। 
सत्य प्रकाश, लखीमपुर खीरी

अच्छा फैसला
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने इस वर्ष ऑस्ट्रेलिया में होने वाली ट्वंटी-20 विश्व कप प्रतियोगिता को स्थगित करने का निर्णय सही दिशा में लिया है। कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण पिछले कुछ महीनों से विश्व स्तरीय क्रिकेट मैचों का आयोजन दिवास्वप्न जैसा हो गया है। जाहिर है, किसी भी देश का कोई भी खिलाड़ी ट्वंटी-20 विश्व कप खेलने के लिए फिलहाल न तो शारीरिक रूप से तैयार है, और न ही मानसिक रूप से। हालांकि, आईसीसी के इस फैसले से क्रिकेटप्रेमियों को जरूर निराशा हुई होगी, पर ट्वंटी-20 विश्व कप के स्थगित होने से आईपीएल के आयोजन की संभावनाएं बढ़ गई हैं, जो सुखद है।
तुषार आनंद, वेस्ट बेली रोड, पटना

बाढ़ से बेहाल
बाढ़ की वजह से बिहार लगभग हर साल विकास की दौड़ में पिछड़ जाता है। यहां बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में सैकड़ों लोग मारे जाते हैं। प्रभावित परिवारों के लिए ढंग से रहने-खाने की व्यवस्था नहीं होती, तो वे सड़कों पर रहने को मजबूर होते हैं। अगर इस बार भी सरकार ने बाढ़ पीड़ितों की सुध नहीं ली, तो इसी तरह की दर्दनाक तस्वीर फिर से दिखेगी। इस बार बाढ़ तो चुनाव का एजेंडा भी बन गया है। मगर दिक्कत यह है कि विपक्षी पार्टियां भी बाढ़ नियंत्रण के वादे पर चुनाव लड़ना चाहती हैं। इस तरह की राजनीति बंद होनी चाहिए। राज्य सरकार अगर जागरूक नहीं होती है, तो जनता को ही सरकार पर दबाव बनाना होगा। आखिर कब तक वे अपनी किस्मत को कोसते रहेंगे? यह बाढ़ ही है, जिसके कारण बिहार आज इतना पिछड़ा राज्य माना जाता है। इसकी वजह से होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई करने में ही अभिभावक बेहाल हो जाते हैं। वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दिला पाते। इससे बेरोजगारी दर भी बढ़ रही है। राज्य सरकार को इस पर चिंतन करना होगा।
आफताब आलम, अरवल, बिहार
 

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  • Web Title:hindustan mail box column 24 july 2020