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21 अक्तूबर, 2020|9:21|IST

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आखिर कब तक

देश की एक और बेटी नर पिशाचों की बलि चढ़ गई। लगता है कि आज समाज को संस्कार की सर्वाधिक जरूरत है। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचार इसी बात के संकेत हैं। बच्चियां तक सुरक्षित नहीं रहीं। देश ने जब निर्भया का दर्द सहा था और कानून ने र्दंरदों को सूली पर चढ़ा दिया, तब यह उम्मीद थी कि बलात्कारी कानून से डरेंगे, लेकिन हाथरस में जो कुछ हुआ, उससे जाहिर होता है कि र्दंरदे अब भी बेखौफ हैं। उस बिटिया के साथ गैंगरेप के अलावा जो बर्बरता की गई, वह कहीं ज्यादा सोचने पर मजबूर करती है। आखिर हम किस सदी में जी रहे हैं? लोग इसे मानवता को तार-तार करने वाली घटना बता रहे हैं? सरकार भी विशेष जांच दल का गठन करके जल्द ही अपराधियों को सजा दिलाने का वादा कर रही है, लेकिन क्या इन सबसे ऐसी घटनाओं पर रोक लग सकेगी? संभव हो, तो महिला सुरक्षा कानून को और सख्त बनाते हुए अपराधियों की सरेआम त्वरित सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए, तभी सही मायने में बेटियां सुरक्षित हो सकेंगी।
अमृतलाल मारू, धार, मध्य प्रदेश

तार-तार होती मानवता
देश व उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बलात्कार की घटनाओं को रोकने में हम क्यों सक्षम नहीं हैं? क्या हमारी सरकारों के पास संसाधनों की कमी है? क्या हमारा संविधान इतना कमजोर है? क्या देश में महिला होना अपराध है? सभी सरकारों को इस विषय में कडे़ कदम उठाने चाहिए और दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। ऐसा माहौल बनाना ही होगा कि महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करें। एक तरफ तो हम बेटियों के लिए बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, दूसरी तरफ उन पर होने वाले अत्याचार को रोकने में नाकाम रहते हैं। हमें समझना होगा कि जिस देश में महिलाओं का सम्मान नहीं होता, वह देश कभी तरक्की नहीं कर सकता। यदि हम सबको इस देश को स्वर्ग बनाना है, तो सभी नागरिकों को इस विषय पर संजीदा होना चाहिए। मानवता की हत्या हो रही है और कानून हर कोई अपने हाथ में लेने लगा है। दोषियों के अंदर से बिल्कुल खौफ खत्म हो गया है। देश की सरकारें इन घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावशाली कानून बनाएं।
शिवानंद सिंह, मेरठ, उत्तर प्रदेश

ऐतिहासिक दिन
किसी भी अदालती फैसले में एक पक्ष की जीत होती है, तो दूसरी की हार, परंतु फैसला सर्वमान्य होता है। ऐसा ही बुधवार को हुआ, जब 1992 में ध्वस्त बाबरी ढांचा मामले में अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। जो मामला पिछले तीन दशक से कोर्ट में चल रहा था, उसका फैसला सीबीआई के विशेष जज ने सिर्फ तीन मिनट में सुना दिया। इस निर्णय ने एक बार फिर साबित किया कि अदालती कार्यवाही साक्ष्य पर चलती है और अदालत को साक्ष्य चाहिए। बहरहाल, इस निर्णय से भारतीय इतिहास के एक विवादास्पद मुद्दे पर पूर्ण विराम लग जाना चाहिए। सभी को इस फैसले का आदर करना चाहिए।
हरि गोविंद प्रसाद, बेगूसराय

दूसरा न होगा गांधी
आज पूज्य राष्ट्रसंत और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्मतिथि है। गांधीजी के बारे में यही कहा जाता है कि न भूत और न भविष्य में उनके जैसा कोई पैदा होगा। उनके सिद्धांत शांति, अहिंसा, सत्य, आत्म-शुद्धि, सांप्रदायिक सद्भाव, शराबबंदी, आत्मनिर्भर गांव आदि आज भी प्रासंगिक हैं। देश की गंदी व दूषित राजनीति ने जरूर गांधीजी का अपमान किया, लेकिन देश के अंदर या बाहर बिना शांति, अहिंसा के  कोई भी आगे नहीं बढ़ सकता है। अगर सरकारों ने उनके सपने को पूरा किया होता, तो आज देश की तस्वीर दूसरी होती। अब भी अगर कुछ संजीदगी दिखाई जाए, तो हालात काफी बदल सकते हैं।
हेमा हरि उपाध्याय
 उज्जैन, मध्य प्रदेश
 

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  • Web Title:hindustan mail box column 2 october 2020