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बेटियों की कैसी सुरक्षा

बेटियों की कैसी सुरक्षा
देश में महिलाओं को पढ़ाने, आगे बढ़ाने और पुरुष के समकक्ष उन्हें देखने की काफी बातें होती रहती हैं, लेकिन क्या ये सारी बातें नारों तक ही सीमित नहीं हैं? उन्नाव की पीड़ित लड़की या उसके परिजनों के साथ जो कुछ भी हुआ, वह बेहद शर्मनाक है। ऐसी घटनाएं सभी संवेदनशील लोगों को शर्मसार करती हैं, क्योंकि इस वारदात में जिस शख्स पर आरोप है, वह न सिर्फ जनता की नुमाइंदगी करता है, बल्कि जनता ही उसे सत्ता सदन में पहुंचाती है। दुखद यह भी है कि उसकी पार्टी ने भी चुप्पी साधे रखी और प्रशासन भी खुलकर कुछ नहीं कह सका। ऐसे में, देश की बेटी की सुरक्षा नारा मात्र ही लगती है। यह परिस्थिति तभी बदलेगी, जब देश के नागरिकों की चुप्पी टूटेगी और वे लोकतंत्र की परिभाषा समझ सकेंगे।
आकाश सिंह तोमर

संभलने का वक्त
वायु प्रदूषण से जुड़ी एक खबर ने झकझोर कर रख दिया। दिल्ली की एक 28 वर्षीया युवती को, जिसने कभी धूम्रपान तक नहीं किया, वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों के कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझना पड़ रहा है। वैसे तो वायु प्रदूषण के कई दुष्प्रभाव हैं, पर कैंसर से खौफनाक कुछ भी नहीं। देश के कई नगर वायु प्रदूषण के लिहाज से विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। कई तो ऐसे भी हैं, जहां वायु प्रदूषण के नियमित आंकड़े भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में, वायु प्रदूषण से जुड़े नए तथ्यों के आलोक में सरकारों को नीतियां बनानी होंगी। उन्हें ज्यादा सचेत होने की जरूरत है।
सत्यम कुमार, नालंदा, बिहार

आवारा मवेशियों से दिक्कत
आजकल सड़कों पर यहां-वहां आवारा मवेशियों के झुंड का मिलना आम बात हो गई है। ये वाहन चालकों के लिए कभी भी खतरे का सबब बन जाते हैं। इनकी वजह से सड़कों पर गंदगी भी हो रही है। समझ नहीं आता कि अचानक सड़कों पर इतने मवेशी कहां से आ गए? ये सड़कों पर बीचो-बीच बैठे मिल जाते हैं और सड़कों के बीच बने डिवाइडर पर लगे सुंदर-सुंदर पौधों को चर जाते हैं। आखिर जिम्मेदार महकमा क्यों अपनी आंखें मूंदे बैठा है? क्या वह किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?
देवेंद्र रावत

खुशियों वाली कक्षा
दिल्ली के स्कूलों में दिल्ली सरकार द्वारा शुरू किए गए हैप्पीनेस क्लास के एक साल पूरे हो गए। इससे बच्चों में अवसाद, एकाकीपन, तनाव और गुस्सा दूर हुआ है। यही वजह है कि इसे अब पूरे देश में लागू करने की बातें होने लगी हैं। बच्चे इस क्लास में नई चीजों का सृजन करना सीखते हैं और उनमें नया उत्साह आता है। प्रधान न्यायाधीश तरुण गोगोई भी इस कक्षा के मुरीद हो गए हैं और उन्होंने न्यायिक अकादमी की तर्ज पर हैप्पीनेस क्लास शुरू करने की बात कही है।
विजय किशोर तिवारी, नई दिल्ली

साहसिक कदम
जिस प्रकार कभी हिंदू समाज के लिए राजा राममोहन राय ने सती प्रथा का अंत किया था, उसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम समाज के लिए सदियों से चली आ रही एक साथ तीन तलाक जैसी कुप्रथा को खत्म किया है। यह एक साहसिक कार्य है। मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक के कानून बन जाने के बाद तत्काल तीन तलाक पर रोक लग जाएगी, जो जाहिर तौर पर महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुस्लिम समाज को भी आगे आकर इसका स्वागत करना चाहिए। हम सबको यह समझना होगा कि कोई समाज तभी आगे बढ़ता है, जब उस समाज की महिलाओं को मान-सम्मान मिलता है। तत्काल तीन तलाक की कुप्रथा के अंत होने से सदियों से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को न्याय  मिला है।
सत्य प्रकाश, लखीमपुर खीरी
 

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