Hindustan Mail Box 16th August - मुद्दों पर चर्चा DA Image

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मुद्दों पर चर्चा

देश भर में 73वें स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन का त्योहार हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। हर जगह उत्साह का माहौल देखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर लाल किले पर तिरंगा फहराया और देश को संबोधित करते हुए विभिन्न मुद्दों और योजनाओं का जिक्र किया। वन नेशन-वन इलेक्शन, जल-जीवन मिशन जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने के अलावा उन्होंने जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि छोटा परिवार रखने वाले सच्चे देशभक्त की तरह हैं, इनसे हमें सीखने की जरूरत है। अनुच्छेद 370 हटने के फायदे गिनाते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को नया पंख मिलेगा, जिसके लिए सरकार हरसंभव प्रयास करेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने एक अच्छा भाषण दिया, जिसकी तारीफ होनी चाहिए।
प्रीतम राज, नवादा

अपनी-अपनी आजादी
भारत को स्वतंत्र हुए सात दशक से ज्यादा हो गए, लेकिन अब भी स्वतंत्रता और समानता से जुड़े सवाल उठने बंद नहीं हुए हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि स्वतंत्रता और समानता से जुड़े मुद्दे सामाजिक जीवन के अनेक पहलुओं से जुड़ते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रफ्तार से उनकी बढ़ोतरी होती जाती है। राजनीतिक क्षेत्र में समानता, समान अधिकारों के रूप में बनाई गई, लेकिन आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में इसका यह रूप नहीं दिखता। लोगों के पास समान राजनीतिक अधिकार तो है, मगर किसी न किसी वजह से समाज में उनके साथ अब भी भेदभाव हो रहा है। समाज में कुछ लोगों को विशेषाधिकार प्राप्त है, तो कुछ बुनियादी जरूरतों को भी तरस रहे हैं। इन लोगों के लिए वास्तविक स्वतंत्रता अब भी काफी दूर है। उन्हें भी आजादी का सुखद एहसास कराने की जरूरत है।
चांद मोहम्मद, डॉ आंबेडकर कॉलेज

गंदी सोच से स्वतंत्रता
स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक भारतीय को आत्मनिर्भर बनकर संघर्ष पथ पर निरंतर बढ़ने की प्रेरणा भी देता है। कुछ लोग इस दिन को केवल तिरंगा फहराने व सांस्कृतिक कार्यक्रम करने तक का मामला समझते हैं। परंतु ऐसा नहीं है। यह पर्व हमें देश के लिए शहीद हुए जवानों की याद तो दिलाता ही है, साथ ही यह अपेक्षा भी रखता है कि हम अपने देश को संवारने के प्रति गंभीरता दिखाएं। देश को आजाद हुए सात दशक हो चुके हैं, लेकिन आज भी मानसिक विकृतियों से हम मुक्त नहीं हो पाए हैं। देश में कहीं भी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं; यहां तक कि गर्भ में भी नहीं। समाज इतना मलिन और मानसिक रूप से बीमार है कि पहले हमें घृणित मानसिकता से स्वतंत्रता हासिल करनी होगी। जिस समाज में बेटियां डर-डरकर जीवन जी रही हों, सत्ताधारी लोग दबंगई के बल पर बालिकाओं की आबरू लूट रहे हों, तो समझ लेना चाहिए कि देश स्वतंत्र होकर भी अंदर ही अंदर किसी न किसी अभिशाप का शिकार है।
हर्ष श्रीवास्तव, गंगापुर, वाराणसी

हताश पाकिस्तान
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से ही पाकिस्तान बुरी तरह बौखला गया है। वह भारत को धमकी दे रहा है कि इस मसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा। लेकिन उसके मनसूबों पर तब पानी फिर गया, जब कई देशों ने इसे भारत का अंदरूनी मामला माना और इसमें कोई दखल देने से इनकार कर दिया। भारत ने यह साफ कर दिया है कि अनुच्छेद 370 को सिर्फ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास के लिए हटाया गया है। मगर पाकिस्तान मानो इसे अपने ऊपर हमला मानता है। अपने करीबी मित्रों से भी सहयोग न मिल पाने की वजह से पाकिस्तानी सत्ता-प्रतिष्ठान अब हताश हो गया है और बेबुनियाद बयान जारी कर रहा है। उसके विदेश मंत्री के इंटरव्यू से यही जाहिर भी होता है।
राघव जैन, जालंधर
 

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