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बढ़ता हुआ भारत

आज हमारा देश अपना 73वां स्वाधीनता दिवस मना रहा है। विश्व राजनीति में भारत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसे विकासशील या तृतीय विश्व का नेता भी माना जाता है। गुटनिरपेक्ष आंदोलन और पंचशील सिद्धांतों को गढ़ने में भी भारत की भूमिका अहम रही है। कई क्षेत्रीय संगठनों में यदि भारत की भूमिका न हो, तो वे प्रभावहीन नजर आते हैं। आर्थिक क्षेत्र में भी भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस साल के अंत तक इसके विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की बात कही जा रही है। विशाल मानव संसाधन तो इसके पास है ही, सामाजिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में भी इसका कोई जवाब नहीं। आज का स्वतंत्रता दिवस इन्हीं उपलब्धियों का पताका मजबूती से फहरा रहा है।
विजय किशोर तिवारी, दिल्ली

सख्त रवैया 
सर्वोच्च न्यायालय ने कश्मीर की वर्तमान स्थिति में हस्तक्षेप करने से इनकार करके वास्तव में सराहनीय कार्य किया है। उसने याचिकाकर्ता को भी दो-टूक जवाब दिया कि अभी हालात संवेदनशील हैं और सरकार को समय चाहिए। कैसी विडंबना है कि हमारे देश में कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए कोर्ट में अनावश्यक याचिका दायर करते हैं। इससे कोर्ट का समय तो नष्ट होता ही है, समाज में गलत संदेश भी जाता है। वर्तमान समय में सभी राजनीतिक दलों, नेताओं और बुद्धिजीवियों को चाहिए कि सरकार के देशहित में लिए गए निर्णय का वे स्वागत करें और 15 अगस्त को कश्मीर व लद्दाख के प्रमुख स्थानों पर तिरंगा फहराते हुए राष्ट्रीय एकता का परिचय दें।
विनोद चतुर्वेदी, दिल्ली

स्नेह का पर्व
रक्षाबंधन भाई-बहन के उस अटूट प्रेम का प्रतीक है, जिसे दुनिया की कोई ताकत कमजोर नहीं कर सकती। भाइयों द्वारा बहनों को रक्षा का वचन देना और उनकी हर मुश्किल का खुद डटकर सामना करना हर भाई का दायित्व होना चाहिए। बहन सिर्फ कलाई पर राखी नहीं बांधती, वह स्नेह का धागा बांधती है। बदलते वक्त में जरूर रिश्तों की परिभाषा बदल गई है, लेकिन इन धागों की अहमियत अब भी कम नहीं हुई है। 
आयुष राज, आरा

रक्षाबंधन का महत्व
आज किसी भी रिश्ते में पहले वाली मिठास नहीं रह गई है। लोग रिश्ते निभाने से ज्यादा उसे ढोने लगे हैं। अपनापन के भाव खत्म हो रहे हैं। किसी भी रिश्ते के कमजोर पड़ने के कई कारण हैं, जैसे जलन, ईष्र्या, संवेदनहीनता और अहं का भाव। हम इन्हीं तमाम कारकों का अंत करके रिश्तों के वास्तविक अर्थ समझ पाएंगे। रक्षाबंधन इसी अर्थ को फिर से याद करने का मौका है। हमें इसी रूप में यह त्योहार मनाना चाहिए।
प्रीतम राज, नवादा

शर्मनाक घटना
ग्रेटर कैलाश- दो के एक निजी विद्यालय में चार साल की बच्ची के साथ अधेड़ इंसान द्वारा की गई र्दंरदगी शर्मनाक और हृदय-विदारक घटना है। दिल्ली के स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा मात्र दिखावटी लगती है। अपवाद को छोड़कर अधिकतर प्राइवेट स्कूल के मैनेजमेंट का ध्यान अभिभावकों से येन-केन-प्रकारेण पैसे लूटने पर रहता है। चूंकि इस लूट से स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों को भी लाभ मिलता है, इसलिए जो स्कूल जैसा कर रहा है, करने दिया जाता है। इस स्कूल में भी सीसीटीवी लगी है, लेकिन एक आदमी बार-बार बच्ची के शौचालय में क्या करने जा रहा है, इसे देखने की फुरसत किसी को नहीं थी। कार्रवाई के रूप में फौरन इस स्कूल की मान्यता खत्म कर देनी चाहिए, पर हर बार जिस तरह से हो-हल्ला के बाद मामले की लीपापोती हो जाती है, कहीं इस बार भी न हो जाए।
आमोद शास्त्री, दिल्ली

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