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छात्रों का भविष्य

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से इंटरमीडिएट के तमाम विषयों के परिणाम घोषित किए गए हैं। आश्चर्य तो सभी को हुआ होगा कि इन नतीजों में उत्तीर्ण होने वाले छात्रों की संख्या इतनी कम क्यों है? वर्षों के इतिहास में ऐसा परिणाम न किसी ने देखा होगा, न ही किसी ने सुना होगा। क्या वजहें थीं? क्या बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने पिछले साल के नतीजों में हुई अपनी दुर्गति और उससे हुई बदनामी को सुधारने के लिए मासूमों के भविष्य और उनके सपनों की बलि ले ली? या फिर वित्तरहित शिक्षकों के आंदोलनों का यह असर है? हालांकि ऐसे परिणाम का अभास परीक्षा के दौरान भी हुआ था, जब छात्र प्रश्नपत्र से असंतुष्ट दिखे थे, मगर नतीजे इतने बुरे होंगे, यह किसी ने नहीं सोचा होगा। इस परिणाम के बाद अगर बिहार बोर्ड अपनी छवि सुधरने और सरकार राज्य शिक्षा-व्यवस्था के पटरी पर आने की उम्मीद पाल रही होगी, तो वे दोनों भ्रम में हैं।
ऋत्विक रवि

अनुभवहीनता पड़ी भारी
बिना होमवर्क किए आनन-फानन में पशु-हत्या रोकने के लिए पशु-बिक्री रोक अधिनियम लाकर केंद्र सरकार ने भयंकर भूल की है, जिसका खामियाजा एक बेजुबान बछड़े को भुगतना पड़ा, जिसका केरल में खुन्नस खाए युवा कांग्रेसियों ने विरोधस्वरूप वध किया। भले ही भाजपाई अब इस कुकृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करें, मगर इससे उस मवेशी का जान वापस नहीं आ सकती। चेन्नई आईआईटी में भी इस कानून के विरोध में बीफ पार्टी का आयोजन हुआ। कुछ अन्य स्थानों पर भी ऐसा हुआ ही होगा, जिसकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। फजीहत के बाद सरकार ने इस अधिनियम से भैंस को बाहर कर दिया, मगर क्या तब तक देर नहीं हो चुकी है? इस कानून से निश्चय ही मवेशियों की बिक्री प्रभावित होगी, जिससे गांवों में लघु व्यवसाय पर मुसीबत आएगी। वैध-अवैध का सार्टिफिकेट क्या पुलिस वालों को लाभ कमाने की मौका नहीं देगा? मुमकिन यह भी है कि लुघ कारोबार पर असर पड़ने से कहीं बेरोजगार हाथ अपराध की ओर उन्मुख न हो जाएं।
कृष्णकांत रस्तोगी, बड़ा मवाना, मेरठ 

चुप क्यों है सरकार
केंद्र सरकार ने मवेशियों का वध रोकने के लिए उसकी खरीद-बिक्री से संबंधित फैसला लिया है, जो देशहित में है, पर केरल प्रदेश कांग्रेस समिति के कार्यकर्ताओं ने कन्नूर में जो ओछी हरकत की, वह उनकी घिनौनी मानसिकता को दिखाता है। केरल सरकार आखिर ऐसे तत्वों पर लगाम क्यों नहीं लगा पा रही? जिन घटनाओं से देश में अशांति फैलने का खतरा हो, उसे रोकने में केरल सरकार क्यों नहीं दिलचस्पी ले रही? इस घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तो हो ही, केरल राज्य सरकार की भी इसके लिए निंदा की जाए। सरकार का काम तनाव पैदा करना नहीं है।
 प्रशांत शर्मा, बदायूं

बालिकाओं के बढ़ते कदम
एक बार फिर 12वीं की परीक्षा में अव्वल स्थान लाकर देश की बालिकाओं ने साबित कर दिया है कि वे शिक्षा के क्षेत्र में मोदी सरकार के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान को विशेष मुकाम तक पहुंचाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। यह सनातन सत्य है कि एक शिक्षित कन्या केवल एक परिवार को ही नहीं, बल्कि देश व समाज को भी शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आज पहले की अपेक्षा नारी उत्पीड़न व शोषण, दहेज उत्पीड़न, बाल विवाह और महिला-अपराध आदि में कमी आई है, तो इसका बड़ा कारण महिलाओं का शिक्षित होना है। साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी की महिला शिक्षा और सशक्तीकरण संबंधी योजनाएं रंग लाने लगी हैं। चूंकि आज की पढ़ी-लिखी बालिकाएं ही देश के भविष्य की नींव तैयार करेंगी, इसीलिए कहा जा सकता है कि हमारा आने वाला कल स्वर्ण काल होगा।
अनुपमा अग्रवाल,  अलीगढ़
 

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  • Web Title:Future of students