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  • बांका

    पिछले चुनाव की जानकारी

    विधायक नाम: राम नारायण मंडल
    पार्टी- भाजपा
    कुल मतदाता- 235514
    पुरुष मतदाता - 124692
    महिला मतदाता - 110822

    पिछली विधानसभा का विवरणः
    मतदान का प्रतिशत-52.28
    विजेता का नामः जावेद इकबाल अंसारी, राजद
    वोट मिलेः 29047
    उपविजेताः राम नारायण मंडल, भाजपा
    वोट मिलेः 26637
    वोट का अंतर- 2410

    पिछले पांच विधानसभा में कौन-कौन रहे विधायक
    2014-        राम नारायण मंडल          भाजपा
    2010-        जावेद इकबाल अंसारी         राजद          
    2005 अक्टूबर-        राम नारायण मंडल         भाजपा     
    2005 फरवरी-    जावेद इकबाल अंसारी        राजद     
    2000-     राम नारायण मंडल          भाजपा
    1995-    जावेद  इकबाल अंसारी        राजद              
    1990-    राम नारायण मंडल         भाजपा

    बांका विधानसभा के चुनावी मुद्दे
    बांका विधानसभा क्षेत्र के 18 प्रतिशत मतदाता शहरी हैं। जिला मुख्यालय के इस क्षेत्र में बांका शहर को नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त है। इसके अंतर्गत 22 वार्ड हैं। लेकिन शहरवासी शहरी सुविधा से दूर हैं। नगर पंचायत के कुल 22 में से 8 वार्ड के लोग ग्रामीण परिवेश में जी रहे हैं। किसानों को समय पर सिंचाई उपलब्ध नहीं कराया जाना, किसानों के लिए एक भी कोल्ड स्टोरेज का निर्माण न होना, बांका सदर अस्पताल में चिकित्सा सुविधा का अभाव चुनावी मुद्दा बन रहे हैं। आगामी चुनाव में सड़क जाम, शहर में जलजमाव, सड़क किनारे अतिक्रमण और ड्रेनेज सिस्टम न होने से लोग त्रस्त हैं।

    बांका से ढाकामोड़ और बाराहाट तक जर्जर सड़क, बालू के अवैध उत्खनन से जल स्तर नीचे जाना, किसानों को खेती के समय अनुदानित मूल्य पर खाद-बीज उपलब्ध न होना, जनवितरण प्रणाली से लेकर खाद्य सुरक्षा योजना में गड़बड़ी और अर्धनिर्मित पुल-पुलिए की ओर मतदाता प्रत्याशियों का ध्यान आकृष्ट कराएंगे। बाराहाट और सदर प्रखंड के किसानों के समक्ष सिंचाई सुविधाओं का घोर अभाव है। पैक्सों द्वारा किसानों के खरीदे गये धान की अब तक राशि का भुगतान नहीं किए जाने का मुद्दा इस बार के चुनाव में जोर पकड़ेगा। इनके अलावा शहर में बाईपास रोड़ का निर्माण नहीं हो पाया है। जबकि पिछले एक दशक से यहां के जनप्रतिनिधि लगातार यह आश्वासन ही देते रहे हैं। इतना ही नहीं शहर के करीब 50 हजार आबादी में से 70 फीसदी आबादी को पीएचईडी और नगर पंचायत द्वारा उनके घरों तक पेयजल आपूर्ति नहीं कराई जा रही है। बांका में शिक्षा की व्यवस्था भी चौपट है। हाईस्कूलों को इंटर का दर्जा दिया गया है, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण समय पर सिलेबस पूरा नहीं हो पाता है। बांका में एक भी अंगीभूत महिला कॉलेज नहीं है जिसके कारण लड़कियों को उच्च शिक्षा में बड़ी परेशानी हो रही है।

    विकास कार्य: हालांकि पिछले पांच साल में बांका विधानसभा क्षेत्र का कुछ मायने में विकास हुआ है जिसे नकारा नहीं जा सकता है। सड़क विहीन करीब 25 गांवों को संपर्क पथ से जोड़ा गया है। शहर में बड़ी-बड़ी इमारतों का निर्माण हुआ है। पांच साल के दौरान 35 गांवों में पुलिया का निर्माण हुआ है। 40 से अधिक गांवों में बिजली पहुंची है।

    जनता के बोल: बांका शहर के प्रेम कुमार सिंह, विजयनगर की रिमझिम सिंह, अधिवक्ता मीना झा, करहरिया की विन्दु झा और पुरानी बसस्टैंड के नवल सिंह कहते हैं कि अब तक शहर में लोगों को शहरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। यहां तक कि समुखिया में एक सिरॉमिक्स फैक्ट्री की आधारशिला तीन दशक पूर्व रखी गयी थी। आधे से अधिक काम हुआ भी। लेकिन बाद में सब राजनीति की भेंट चढ़ गया। सदर प्रखंड के केवलडीह गांव के किसान पुनेश्वर मंडल ने कहा कि किसान आर्थिक तंगी में हैं, उन्हें सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पाई है।

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