बिहार चुनाव में युवाओं में दिखा जनसुराज का क्रेज, हार कर भी एक दर्जन सीटों पर यूं डाला प्रभाव
जनसुराज को इस चुनाव में तीन फीसदी से अधिक वोट मिले। लगभग 15 लाख मतदाताओं ने पार्टी के पक्ष में वोट डाले। यह वोट शेयर बताता है कि पार्टी ने राज्य के मतदाताओं के एक बड़े वर्ग पर प्रभाव डाला है। खासकर युवा और पहली बार वोट देने वाले लोगों पर।
जनसुराज ने बिहार में भले कोई सीट नहीं जीती हो, लेकिन उसने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करायी है। उसका प्रभाव कई प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखा। यही नहीं एक दर्जन सीटों पर उसने जीत-हार पर प्रभाव डाला। उसके उम्मीदवारों को जनता ने सकारात्मक रूप में लिया है। आम लोगों ने भी उसे तीसरे विकल्प के रूप में मान लिया है। पार्टी 238 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी और इनमें से 75 फीसदी सीटों पर उसकी दमदार उपस्थिति दिखी। चुनाव में उसका प्रदर्शन हार कर भी अपने बेहतर भविष्य का संकेत दे दिया है।
जनसुराज को इस चुनाव में तीन फीसदी से अधिक वोट मिले। लगभग 15 लाख मतदाताओं ने पार्टी के पक्ष में वोट डाले। यह वोट शेयर बताता है कि पार्टी ने राज्य के मतदाताओं के एक बड़े वर्ग पर प्रभाव डाला है। खासकर युवा और पहली बार वोट देने वाले लोगों पर। ऐसे युवाओं में जनसुराज को लेकर विशेष आकर्षण था। पार्टी 50 से अधिक स्थानों पर तीसरे स्थान पर रही। उसका यह प्रदर्शन बताता है कि उसने दो गठबंधनों की लड़ाई को तीसरा कोण देने में सफलता प्राप्त की। समता पार्टी का भी जब 1994 में जार्ज फर्नांडीस व नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में गठन हुआ था तब 1995 के विधानसभा चुनाव में उसे केवल सात फीसदी मत ही मिले थे।
जनसुराज ने 32 सीटों पर 10 हजार से अधिक वोट शेयर प्राप्त किया। यही नहीं उसने एक दर्जन सीटों के परिणाम पर फर्क पैदा किया। हालांकि इनमें से आठ सीटें ऐसी थी, जहां उसके कारण एनडीए प्रत्याशी की हार हुई। इनमें फतुहा, सहरसा, चनपटिया, जोकीहाट, ढाका, मटिहानी, मखदुमपुर और टेकारी में इसके कारण एनडीए प्रत्याशियों को परेशानी हुई। चेरिया बरियारपुर में जनसुराज के मजबूत प्रदर्शन के कारण राजद उम्मीदवार पीछे रह गए।
जोकीहाट में जनसुराज के कारण एनडीए की हार हुई। यही हाल शेरघाटी में भी रहा। पार्टी के कई प्रत्याशियों ने चुनाव के दौरान शानदार प्रदर्शन किया। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण उम्मीदवारों में मढौरा में पार्टी प्रत्याशी नवीन कुमार सिंह उर्फ अभय सिंह को 58 हजार से अधिक वोट मिले। जबकि, चनपटिया में मनीष कश्यप को 37172 वोट, जोकीहाट में सरफराज आलम को 35354 वोट मिले।
सुगौली में अजय कुमार झा को 24718 और दीघा में बिट्टू सिंह को 22071 वोट मिले। बरूराज में हीरालाल खड़िया को 19935, बेलसंड में अर्पणा सिंह को 19025, अस्थावां में लता सिंह को 15962, मोहनियां में गीता देवी को 14128, शिवहर में नीरज सिंह को 13952, विभूतिपुर में विश्वनाथ चौधरी को 13450, सहरसा में किशोर मुन्ना को 12786 वोट मिले। विधानसभा चुनाव में उसके प्रदर्शन ने यह बता दिया है कि आम लोगों में उसकी स्वीकृति तेजी से बढ़ रही है। लोग पार्टी की बात ध्यान से सुन रहे हैं।





