इंटरनेट पर खुशी की तलाश में बर्बाद हो रहे युवा, जेपी यूनिवर्सिटी के सर्वे में डराने वाली रिपोर्ट आई

Sudhir Kumar हिन्दुस्तान, पटना, मुख्य संवाददाता
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सर्वे में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के 18 से 25 साल के पांच लाख 60 हजार युवाओं को शामिल किया गया। इसी साल जनवरी से मार्च के बीच हुए सर्वे में शहरी क्षेत्र के तीन लाख 50 हजार और ग्रामीण क्षेत्र के दो लाख 10 हजार युवाओं को शामिल किया गया।

इंटरनेट पर खुशी की तलाश में बर्बाद हो रहे युवा, जेपी यूनिवर्सिटी के सर्वे में डराने वाली रिपोर्ट आई

इंटरनेट का इस्तेमाल पहले युवा ज्ञान बढ़ाने के लिए करते थे, लेकिन अब वे इसका उपयोग भावनात्मक खुशी, मन बहलाने और अपनी समस्या का समाधान ढूढ़ने के लिए कर रहे हैं।

हाल में युवाओं की मनोस्थिति को जानने के लिए जेपी विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के शिक्षकों की टीम ने एक सर्वे किया, जिसमें यह बात सामने आई कि राज्य के 70 फीसदी युवा किसी ना किसी तरह से इंटरनेट पर भावनात्मक खुशी ढूंढ़ रहे हैं।

सर्वे में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के 18 से 25 साल के पांच लाख 60 हजार युवाओं को शामिल किया गया। इसी साल जनवरी से मार्च के बीच हुए सर्वे में शहरी क्षेत्र के तीन लाख 50 हजार और ग्रामीण क्षेत्र के दो लाख 10 हजार युवाओं को शामिल किया गया। इसमें तीन लाख 90 हजार युवाओं ने कहा कि इंटरनेट पर पढ़ाई के साथ दूसरी समस्याओं का भी हल है। अभिभावक हमें समय नहीं देते, लेकिन इंटरनेट तो हमेशा उपलब्ध रहता है। सर्वे में देखा गया कि शहरी क्षेत्र के युवा भावनात्मक रूप से इंटरनेट से जुड़ते जा रहे हैं। इसका इजहार वे रील्स बनाकर भी पूरी कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के युवा पहले पढ़ाई, कौशल आदि सीखने में इंटरनेट का इस्तेमाल अधिक करते थे।

लेकिन अब उनके आचरण में बदलाव आ रहा है। गांव की नकारात्मक गतिविधियों का वीडियो बना वायरल करने में ज्यादा रूचि ले रहे हैं। इंटरनेट पर अधिक समय वे नकारात्मक चीजों को देखने में बिता रहे हैं।

व्यक्तित्व में कमी आ रही है, तनाव बढ़ रहा

शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं में प्रोब्लेमेटिक इंटरनेट एब्यूज बढ़ता जा रहा है। करीब 10 फीसदी यानि 60 से 70 हजार युवाओं में इंटरनेट आदत की तरह फैल गया है। वे अपना 10 से 12 घंटा इंटरनेट पर बिता रहे हैं। इससे उनमें तनाव के साथ व्यक्तित्व में कमी आ रही है। वे इंटरनेट का सही की जगह गलत उपयोग कर रहे हैं।

सर्वे की खास बातें

● इंटरनेट का इस्तेमाल समस्या बनती जा रही है

● समय नहीं देने पर अभिभावकों से दूर हो रहे युवा

● ग्रामीण युवाओं के आचरण पर नकारात्मक असर पड़ रहा

● इंटरनेट से भावनात्मक रूप से जुड़ने से व्यवहार भी बदल रहा

● इंटरनेट से नकारात्मक सोच अधिक विकसित हो रही है

● एक के अधिक इंटरनेट इस्तेमाल का असर बांकी बच्चों पर हो रहा

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

शहरी क्षेत्र के युवाओं में अकेलापन और पारिवारिक दूरी बढ़ती जा रही है। इससे वे इंटरनेट पर अधिक समय बीता रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के कुछ युवा तो पढ़ाई और कौशल विकास की जानकारी के लिए इंटरनेट की मदद लेते हैं। लेकिन कई युवा गांव की नकारात्मक चीजों को दिखाने के लिए वीडियो वायरल करते हैं। -डॉ. मनोज कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग, जेपी विवि छपरा

Sudhir Kumar

लेखक के बारे में

Sudhir Kumar

टीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।

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