बिहार के मुंगेर में मिला धरती का सबसे पुराना और विशाल वटवृक्ष, पेड़ की उम्र जान रह जाएंगे हैरान

हिन्दुस्तान, रामेन्द्र प्रताप सिंह, लखनऊ/मुंगेर
Follow us on Google News
share

सदियों पुराना और विशालकाय होने के कारण पेड़ से अनेक जटाएं निकल आई हैं। ये जटाएं धरती की सतह में समा चुकी हैं। इन जटाओं ने खुद कई नए तनों का रूप ले लिया है। यदि इन्हें दूर से देखा जाए तो यह एक पेड़ जैसा नहीं, बल्कि एक घने जंगल की तरह दिखाई देता है।

बिहार के मुंगेर में मिला धरती का सबसे पुराना और विशाल वटवृक्ष, पेड़ की उम्र जान रह जाएंगे हैरान

मुगलों का आतंक हो, अंग्रेजों की तानाशाही या फिर आजादी का जश्न... बिहार के मुंगेर में मिला बरगद का पेड़ (वटवृक्ष) देश के इतिहास की हर करवट का साक्षी है। 700 वर्ष से अधिक आयु का यह वटवृक्ष अपने सीने में कई ऐतिहासिक यादें संजोए हुए है। दुनिया के इस सबसे उम्रदराज वटवृक्ष की वास्तविक उम्र का पता राजधानी लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) के वैज्ञानिकों ने लगाया है। रेडियोकार्बन डेटिंग से इस विशालकाय वृक्ष की आयु जांची गई है।

वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे पुराना जीवित वटवृक्ष फिलहाल धरती पर कहीं नहीं है। बिहार राज्य वन विभाग के आमंत्रण पर वर्ष 2022 में बीएसआईपी की वैज्ञानिक डॉ. त्रिना बोस और शोध छात्र अवनीश मिश्रा मुंगेर पहुंचे थे। वहां 'इंडियन टोबैको कंपनी' (आईटीसी) परिसर में एक बड़े बंगले के सामने खड़े इस प्राचीन बरगद की उम्र का पता लगाने के लिए शोध शुरू हुआ। मुख्य तने को नुकसान न पहुंचे, इसलिए वैज्ञानिकों ने पास के एक मोटे तने और सूखी छुर्री (जटा) का अंश लिया।

पेड़ की अनेक जटाएं हैं इसकी खूबसूरती

सदियों पुराना और विशालकाय होने के कारण पेड़ से अनेक जटाएं निकल आई हैं। ये जटाएं धरती की सतह में समा चुकी हैं। इन जटाओं ने खुद कई नए तनों का रूप ले लिया है। यदि इन्हें दूर से देखा जाए तो यह एक पेड़ जैसा नहीं, बल्कि एक घने जंगल की तरह दिखाई देता है। बरगद का विशाल पेड़ आईटीसी के ब्रांच मैनेजर के आवास परिसर में स्थित है। यहां के माली ने बताया कि हेरिटेज ट्री होने के कारण इसकी पूरी देखभाल की जाती है। इसके सही पोषण और सफाई का पूरा ख्याल रखा जाता है।

मुश्किल था पता लगाना

डॉ. त्रिना बोस ने बताया कि बरगद के सबसे पुराने तने का पता कर शोध के लिए नमूना लेना ही सबसे बड़ी चुनौती थी। सामान्यतः पेड़ों के विकास के साथ उनमें ‘वार्षिक वलय’ (एनुअल रिंग्स) बनते हैं, जिससे उम्र का पता चलता है। लेकिन बरगद में ये रिंग्स नहीं बनते। इससे सटीक उम्र पता करना कठिन था। रिंग्स न होने के कारण वैज्ञानिकों को अत्याधुनिक रेडियोकार्बन डेटिंग तकनीक का सहारा लेना पड़ा, जिससे यह ऐतिहासिक कामयाबी मिली।

दूसरा सबसे पुराना वटवृक्ष नरोरा में

अब तक सबसे पुराना वटवृक्ष बुलंदशहर के नरोरा के पास सिद्धबाड़ी क्षेत्र में था। भारतीय और रोमानिया के वैज्ञानिकों ने मिलकर इसकी उम्र 450-500 वर्ष आंकी थी। मुंगेर के वटवृक्ष का पता चलने के बद अब यह दूसरा सबसे पुराना वटवृक्ष हो गया है। तीसरा सबसे पुराना वटवृक्ष 'द ग्रेट ब्यान ट्री' कोलकाता में है। आचार्य जगदीश चंद्र बोस बॉटनिकल गार्डन में स्थित यह वृक्ष 250-350 साल पुराना है। क्षेत्रफल और फैलाव के मामले यह दुनिया के सबसे विशाल पेड़ों में गिना जाता है।

Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News और Bihar News के साथ-साथ Patna News, Muzaffarpur News, Bhagalpur News और अन्य बड़े शहरों की ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।