बिहार में बकाया वेतन लेने आई शिक्षिका के पति की संदिग्ध मौत, DEO ऑफिस में रखा शव; संगीन इल्जाम लगाए
बिहार के मोतिहारी जिले में एक महिला टीचर के पति की डीईओ कार्यालय परिसर में संदिग्ध मौत हो गई। शिक्षिका अपनेे बकाये वेतन के भुगतान को लेकर अपने पति के साथ वहां पहुंची थीं। महिला टीचर ने अब अपने पति के साथ उस वक्त धक्क-मुक्की कियाा।

बिहाार में बकाया राशि के भुगतान को लेकर लगातार दौड़ लगा रही एक शिक्षिका के पति की शनिवार को डीईओ कार्यालय परिसर में गिरने के बााद संदिग्ध स्थिति में मौत हो गई। पति की मौत के बाद महिला टीचर ने अब संगीन इल्जाम लगाए हैं। घटना मोतिहारी की है। बताया जा रहा है कि मृतक नगर थाना क्षेत्र के चांदमारी मोहल्ला के अरविंद कुमार थे, जो अपनी शिक्षिका पत्नी उज्जैन लोहियार राजकीय उत्क्रमित कन्या मवि गायघाट में कार्यरत रश्मि स्वराज के साथ डीईओ कार्यालय आये थे। यहां वो अचानक गिर गए। इसके बाद आनन फानन में लोगों ने उसके पति को इलाज के लिए निजी नर्सिंग होम में ले गई जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। पति की मौत के बाद महिला टीचर उनके शव को लेकर डीईओ ऑफिस चली गईं और वहीं बैठ गईं।
शिक्षिका अपने छोटे-छोटे बच्चे के साथ पति के शव को लेकर डीईओ कार्यालय पहुंची। रोती बिलखती शिक्षिका ने आरोप लगाया कि उसके पति बकाया भुगतान को लेकर कार्यालय पहुंचे थे। जहां उसके साथ धक्का-मुक्की हुई। इस दौरान वह गिर पड़े, लेकिन मदद करने कोई नहीं आया । इसके बाद मौके पर नगर थाना की पुलिस पहुंच कर शव को अपने कब्जे में लेकर शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है । डीईओ राजन कुमार गिरी ने बताया कि शिक्षिका के बकाया वेतन का तुरंत भुगतान कर दिया जाएगा।
क्या है मामला
जानकारी के अनुसार शिक्षिका ने बताया कि वे अपने पति अरविंद शर्मा के साथ अपने बकाए वेतन की भुगतान को लेकर यूपीए नंबर को लेकर डी ई ओ कार्यालय आई थी । इसको लेकर उसके पति कार्यालय कैंपस में खड़े थे ,वहीं शिक्षिका डी पीओ स्थापना से मिलने गई थी । इसके बाद अचानक उसके पति बाहर गिर गए । उसके पति के नाक और पैर पर चोट लगी थी । शिक्षिका ने कार्यालय में लगे सी सी टी वी फुटेज की जांच की मांग की है। जानकारी के अनुसार शिक्षिका में बताया कि उसकी बहाली वर्ष 2005 में हुई थी। जिसके बाद वर्ष 2008 और 2010 में मातृत्व अवकाश ली थी।
मगर तबीयत ज्यादा बिगड़ जाने के बाद उसने अवकाश की अवधि को बढ़ा दिया था । इसके बाद विभाग द्वारा उक्त शिक्षिका को हटा दिया गया था । जिसके बाद उसने उच्च न्यायालय में गुहार लगाई । न्यायालय के आदेश के बाद शिक्षिका ने फिर से 17 मार्च को अपने पद पर ज्वाइन की थी। मगर उसको वेतन नहीं मिला रहा था । जिसके बाद तत्कालीन डी एम सौरभ जोरवाल के आदेश के बाद उसे मई महीने से वेतन मिलना शुरू हो गया था । शिक्षिका ने बताया कि वो काफी कर्ज में डूबी थी।


