करगहर में चूके फूले गुब्बारा का मौका, हार से शुरुआत के बाद बांकीपुर से प्रशांत किशोर मार पाएंगे चौका?
Prashant Kishor Bankipur: जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर बांकीपुर सीट के उप-चुनाव से अपने जीवन का पहला चुनाव खुद लड़ेंगे। दूसरों को लड़ाने के एक्सपर्ट पीके की पार्टी नवंबर के चुनाव में जीरो पर आउट हो गई थी।

Prashant Kishor Bankipur: जन सुराज पार्टी (जेएसपी) के नेता प्रशांत किशोर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के गढ़ बांकीपुर विधानसभा सीट के उप-चुनाव से खुद जीवन का पहला चुनाव लड़ने जा रहे हैं। चुनाव रणनीतिकार के तौर पर कई नेताओं और दलों का चुनाव देख चुके प्रशांत अपनी पार्टी को बिहार विधानसभा के नवंबर के चुनाव में एक सीट नहीं जिता सके थे। पीके ने विधानसभा के मेन चुनाव में रोहतास की करगहर सीट और वैशाली की राघोपुर सीट से अपने लड़ने का माहौल बनाया था, लेकिन ऐन-केन-प्रकारेण लड़े नहीं। चुनावी जादूगर होने का पीके का जलवा का गुब्बारा जब लबालब भरा था, तब वो करगहर या राघोपुर लड़ने का मौका चूक गए। अब जब सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बीजेपी बिहार में गठबंधन सरकार चला रही है, तब 31 सालों से भाजपा के कब्जे वाली बांकीपुर सीट से उप-चुनाव में वो चौका मारने की सोच रहे हैं। मतदान 30 जुलाई को है और नतीजे 3 अगस्त को आएंगे।
उप-चुनाव में ज्यादातर दफा जीत सत्तारूढ़ दल की होती रही है। एक तो वोटर को इलाके के काम के लिए सरकार के साथ जाने में समझदारी दिखती है। ऊपर से चुनाव आयोग का इतना तामझाम होता नहीं है। चुनाव की व्यवस्था कई तरह से सरकार के प्रभाव में होती है। रणनीति और प्रचार का रोडमैप बनाकर दूसरों की जीत की पटकथा लिखने के मास्टरमाइंड होने को लेकर प्रशांत किशोर का जो हवा और बुलबुला था, वह जन सुराज पार्टी के पहले चुनाव में खाता तक नहीं खुलने से खत्म हो चुका है। मेन चुनाव से पहले भी चार सीटों के उप-चुनाव में वो मात खा चुके हैं। ले-देकर जीत के नाम पर एमएलसी सीट में उनके पास एक नाम है।
जन सुराज पार्टी ने विधानसभा के आम चुनाव में 243 कैंडिडेट उतारे थे, लेकिन मतदान तक 238 ही बचे। कुछ बैठ गए, कुछ के पर्चे रद्द हो गए। इन 238 में 1 दूसरे, 128 तीसरे, 73 चौथे और 23 उम्मीदवार पांचवें नंबर पर रहे थे। 236 सीटों पर जन सुराज की जमानत जब्त हो गई थी। 50 सीटों पर नोटा से भी कम वोट आए थे। 3.34 फीसदी वोट के साथ जन सुराज को 35 सीटों पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा वोट आया। इनमें 19 एनडीए और 14 महागठबंधन जीता था।
बांकीपुर में भाजपा का दबदबा, विपक्ष में वोट का बंटवारा
2025 के चुनाव में भाजपा के मौजूदा अध्यक्ष नितिन नवीन बांकीपुर से जीते थे। उनको लगभग 63 परसेंट वोट मिला था। विपक्ष से राजद की रेखा कुमारी लगभग 30 परसेंट वोट पर ही अटक गई थीं। एक अनुमान के मुताबिक इस सीट पर कुल वोटरों में सवर्ण 35 फीसदी हैं, जिसमें अकेले कायस्थ जाति के 15 परसेंट मतदाता हैं। बाकी राजपूत 8 परसेंट, भूमिहार 7 परसेंट और ब्राह्मण 5 फीसदी हैं। ओबीसी भी 33 फीसदी हैं, जिनमें 15 फीसदी बनिया, 10 परसेंट यादव और 8 परसेंट कोइरी और कुर्मी हैं। 13 फीसदी अति पिछड़ा, 8 परसेंट दलित-महादलित और 10 परसेंट मुस्लिम वोटर भी हैं।
सरसरी तौर पर भाजपा की जीत के लिए बांकीपुर का जातीय गणित एकदम मुफीद समीकरण है। 1995 से यह सीट भाजपा के पास ही है। पहले पटना पश्चिम नाम की सीट से नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा चार बार और उनके निधन के बाद बांकीपुर बनी सीट से नितिन नवीन पांच बार जीते हैं। खुद नितिन नवीन पहली बार 2006 में पिता के गुजरने के बाद उप-चुनाव से जीते थे। इस दौरान पटना में शहरी आबादी वाली यह सीट भाजपा का किला बन चुकी है।
भाजपा से टिकट की रेस में ज्यादातर कायस्थ चेहरे
उप-चुनाव में बांकीपुर से भाजपा के टिकट की रेस में ज्यादातर नाम कायस्थ जाति से चल रहे हैं। इनमें नितिन नवीन के पिता के जमाने के भाजपा नेता रहे नील रतन घोष के अलावा अजय आलोक, आशीष सिन्हा, अजीत लाली भी शामिल हैं। भाजपा के टिकट के फैसले में नितिन नवीन की भूमिका सबसे ज्यादा अहम है, क्योंकि यह सीट उनकी है। विपक्ष से राजद का भी कैंडिडेट लड़ेगा। प्रशांत इस चुनाव को सम्राट चौधरी सरकार के कामकाज पर जनादेश के तौर पर पेश कर रहे हैं और कह रहे हैं कि दिल्ली को बांकीपुर से संदेश जाएगा।
प्रशांत किशोर बांकीपुर से लड़कर कमाल करेंगे तो कैसे, यह बड़ी पहेली बनी हुई है। चुनाव लड़ने, लड़ाने और जीतने-जिताने के प्रशांत किशोर के सारे गुण और हुनर की अग्निपरीक्षा बांकीपुर लेगी। इसमें अगर वो पास हो जाते हैं तो जन सुराज पार्टी के पास सीट भले एक हो, लेकिन विधानसभा में विपक्ष से सरकार और सम्राट चौधरी पर सीधे हमले का जोखिम लेने वाला एक नेता सदन में पहुंच जाएगा। लेकिन, प्रशांत किशोर फिर फेल हुए तो कोई नई बात नहीं होगी, क्योंकि जन सुराज पार्टी चुनावों के दो राउंड पहले भी हार चुकी है।


