प्रशांत किशोर क्या अपनी बात पर कायम रहेंगे, राजनीति छोड़ने वाली शर्त हार गए
ना सिर्फ प्रशांत किशोर की पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक है, बल्कि उनकी वह भविष्यवाणी भी पूरी तरह गलत साबित हुई जिसपर उन्होंने राजनीतिक करियर यह कहते हुए दांव पर लगा दिया कि- गलत साबित हुआ तो राजनीति छोड़ दूंगा।
बिहार में तीसरी ताकत के रूप में उभरने की कोशिश करते हुए विधानसभा चुनाव में उतरे जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को बड़ा झटका लगा है। ना सिर्फ उनकी पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक है, बल्कि उनकी वह भविष्यवाणी भी पूरी तरह गलत साबित हुई जिसपर उन्होंने राजनीतिक करियर यह कहते हुए दांव पर लगा दिया कि- गलत साबित हुआ तो राजनीति छोड़ दूंगा।
सुबह साढ़े 10 बजे तक चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक, एनडीए को रुझानों में बंपर बहुमत मिलता दिख रहा है। ना सिर्फ नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बनते दिख रहे हैं बल्कि उनकी पार्टी भाजपा के साथ सबसे आगे निकलने की होड़ में है। सबसे बड़ी पार्टी की रेस में कभी भाजपा तो कभी जेडीयू एक सीट से आगे निकलती दिख रही है।
जेडीयू कुल कितनी सीटें जीत पाएगी, यह तो शाम तक साफ हो पाएगा लेकिन यह इतना साफ हो चुका है कि प्रशांत किशोर ने जितनी कल्पना की थी, जेडीयू उससे तीन गुना अधिक सीटें जीत रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशांत किशोर खुद से लगाई शर्त हारने के बाद राजनीति से संन्यास ले लेंगे या फिर वह इसके लिए कोई दलील देकर वादे से पलट जाएंगे।
क्या कहा था प्रशांत किशोर ने?
जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार में चुनाव प्रचार के बीच कई बार दावा किया कि इस बार जेडीयू 25 से अधिक सीटें नहीं जीत पाएगी। कई टीवी इंटरव्यू में पीके ने यहां तक कहा कि यदि जेडीयू 25 से अधिक सीटें जीत गई तो वह राजनीति छोड़ देंगे। पीके ने ताल ठोकते हुए कई बार यह बात दोहराई। अब देखना दिलचस्प होगा कि वह अपनी बात पर कायम रहते हैं या नहीं।





