प्रशांत किशोर बन पाएंगे बिहार के किंग मेकर? किन वादों पर ऐतबार कर रही बिहार की जनता
बिहार में लोगों का कहना है कि प्रशांत किशोर काफी सूझबूझ से चुनाव लड़ रहे हैं हालांकि वह किंगमेकर बन पाएंगे या नहीं यह कहना बहुत मुश्किल है। बिहार में सभी दलों से जुड़ी कोई ना कोई जाति है लेकिन प्रशांत किशोर अलग ही राजनीति कर रहे हैं।
चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर बिहार में इस बार पूरा जोर लगा रहे हैं। पहली बार है जब जन सुराज पार्टी विधानभा के चुनावी मैदान में उतरी है। इतना ही नहीं प्रशांत किशोर ने चुन-चुनकर ऐसे उम्मीदवारों को उतारा है जो कि एनडीए और महागठबंधन के दलों को अच्छी खासी टेंशन दे रहे हैं। हालांकि चुनाव लोगों की जमीनी उम्मीदों पर ही टिका रहता है। प्रशांत किशोर ने शराबबंदी हटाने, रोजगार, शिक्षा और पलायन को रोकने का वादा करके लोगों को भरोसा दिलाने में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी है। अब चुनाव में देखना है कि लोगों को उनके वादे पर कितना ऐतबार होता है।

दोपहर की धूप में जब ज्यादातर लोग अपने घरों में आराम र रहे थे तभी बिहार के सारण जिले के सोनहो में जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी राहुल कुमार सिंह की एसयूपी आकर रुकी। वह अमनौर सीट से प्रत्याशी हैं। उनके समर्थकों ने प्रचार का अभियान शुरू किया।
राहुल कुमार सिंह ने कहा, हम लोगों को बता रहे हैं कि 15 साल लालू प्रसाद यादव ने शासन किया। 20 साल से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं लेकिन बिहार का पलायन रुक नहीं पाया। बिहार में शिक्षा का स्तर नहीं सुधरा। बिहार में साक्षरता बढ़ने के बाद भी इतना पलायन होता है। यहां उद्योग नहीं हैं। लोगों को दिहाड़ी मजदूरी करने के लिए भी परिवार छोड़कर दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई और हरियाणा जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जेएसपी इन सारी परेशानियों से लोगों को छुटकारा दिलाने के लिए आई है।
उनसे 100 मीटर की दूरी पर ही खुद को राहुल सिंह का करीबी बताने वाले संजयशुक्ला कहते हैं कि उन्हें जेएसपी से कोई फायदा नजर नहीं आता। उन्होंने कहा, महिलाओं को जीविका योजना के तहत 10-10 हजार रुपये मिले। सड़कें बढ़ियां हैं, आप देख ही रहे हैं। बिहार में अब सुरक्षा भी है। लोगों को प्रशांत किशोर के जो वादे ज्यादा पसंद आए हैं उनमें शराब बंदी खत्म करना, 60 साल से ऊपर वालों की पेंशन को बढ़ाकर 2 हजार से ज्यादा कर देना, पलायन करने वाले लोगों को राहत पैकेज देना और 15 साल से कम के बच्चों की पढ़ाई मुफ्त करना शामिल है।
लोग सबसे ज्यादा चर्चा शराब बंदी हटाने की कर रहे हैं। बहुत सारे लोग चाहते हैं कि शराब से प्रतिबंध हट जाए। दरभंगा में स्टेशन रोड के पास फल बेचने वाले एक शख्स ने कहा, शऱाब से प्रतिबंध हटना बेहद जरूरी है क्योंकि प्रतिबंध की वजह से अवैध तरीके से शराब का व्यापार होता है। मुजफ्फरनगर से जेएसपी के उम्मीदवार डॉ. अमित कुमार दास ने कहा कि बिहार का विचार बदल गया है।
उन्होंने कहा, अगर पहले को लोग बदलाव नहीं कर पाए तो हमें मौका मिलना चाहिए। जाति और समुदाय राजनीति का अजेंडा नहीं होना चाहिए। पटना विश्वविद्यालय के एक छात्र ने कहा, प्रशांत किशोर महागठबंधन और एनडीए दोनों के वोट काटेंगे लेकिन सरकार नहीं बना पाएंगे। सीपीआई लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्या ने कहा कि बिहार से बाहर रहने वाले लोगों में जन सुराज पार्टी ने एक उम्मीद जगा दी है।
जेएसपी बिहार में 243 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उसने पूर्व आईएएस, आईपीएस, वकील, गणितज्ञ और वैज्ञानिकों को भी चुनावी मैदान में उतारा है। साथ ही प्रशांत किशोर ने जातीय समीकरणों का भी पूरा ध्यान रखा है। मुज्फ्फरपुर के एक राजनीतिक जानकार का कहना है कि जेएसपी का किसी भी जाति में आधार नहीं है। प्रशांत किशोर ऐसे राज्य में चुनाव लड़ रहे हैं जहां हर पार्टी का एक वोट बेस है और किसी ना किसी जाति से जुड़ी है। प्रशांत किशोर के पटना ऑफिस में भीड़-भाड़ जरूर रहती है लेकिन जरूरी नहीं है कि इससे उन्हें इतनी सीटें हासिल हों कि वह बिहार के किंगमेकर बन पाएं। (रिपोर्टः सौभद्र चटर्जी, हिन्दुस्तान टाइम्स)





