
नीतीश कुमार बनेंगे बिहार के CM? अमित शाह ने क्या कहा, 2020 वाला किस्सा बताया
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बताया है कि 2020 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे। उस दौरान उन्होंने पेशकश की थी कि बिहार का मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से होना चाहिए, क्योंकि पार्टी की सीटें ज्यादा हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होंगे या नहीं, इसे लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, उन्होंने इसे लेकर साफतौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन बताया है कि फैसला चुनाव के बाद किया जाएगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया है कि बिहार में एनडीए में कोई दरार नहीं है। दरअसल, सीट बंटवारे को लेकर साथी दलों के बीच तकरार की अटकलें लगाई जा रही थीं। उनका यह बयान विधानसभा चुनाव में नामांकन की अंतिम तिथि 17 अक्तूबर से एक दिन पहले आया है।
इंडिया टुडे से बातचीत में शाह ने कहा, 'नीतीश कुमार मुख्यमंत्री होंगे या नहीं, यह तय करने वाला मैं हीं हूं। अभी हम नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव के बाद सभी गठबंधन साथी साथ बैठेंगे और नेता का चुनाव करेंगे।' बिहार में 6 नवंबर और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होना है। वहीं, नतीजे 14 नवंबर को आएंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, शाह ने बताया है कि 2020 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे। उस दौरान उन्होंने पेशकश की थी कि बिहार का मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से होना चाहिए, क्योंकि पार्टी की सीटें ज्यादा हैं। उन्होंने कहा, 'लेकिन हमने हमारे गठबंधन का हमेशा सम्मान किया है और जो सम्मान नीतीश कुमार ने कमाया है और वरिष्ठता के आधार पर उन्हें सीएम बनाया गया।'
नीतीश कुमार की तबियत को लेकर क्या बोले
विपक्ष लगातार नीतीश कुमार की तबियत को लेकर दावे करता रहा है। इसपर शाह ने कहा कि आमने-सामने बैठकर या फोन पर हुईं लंबी बातचीत के दौरान कभी भी ऐसा नहीं लगा कि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी है। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ दिक्कतें हो सकती हैं।
महागठबंधन को लेकर शाह ने कहा कि जिन लोगों ने बिहार में लालू प्रसाद यादव का शासन देखा है, वो उनकी वापसी नहीं देखना चाहते। उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा, 'दूसरों को छोटा दिखाने और छोटा सोचने के कारण कांग्रेस खुद ही छोटी हो गई है।' उन्होंने कहा कि इसी अहंकार के कारण कांग्रेस ने बिहार से लेकर बंगाल तक अपनी जमीन खो दी है।





