मकर संक्रांति पर लालू यादव दही-चूड़ा भोज नहीं देंगे? मंगनी लाल मंडल ने वजह बताई
मकर संक्रांति पर इस बार राजद चीफ लालू यादव दही-चूड़ा भोज नहीं देंगे। इसकी जानकारी आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने दी। उन्होने कहा कि लालू यादव की सेहत और मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

मकर संक्रांति के अवसर पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव दही-चूड़ा भोज का आयोजन नहीं करेंगे। यह जानकारी राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने दी है। उन्होने कहा कि इस बार मकर संक्रांति पर राबड़ी देवी के आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन नहीं किया जाएगा। लालू यादव की सेहत और मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इसे किसी विवाद या असामान्य घटना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इससे पहले उन्होने रबड़ी आवास पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी।
आपको बता दें मकर संक्रांति पर लालू यादव द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज बिहार की राजनीति में एक अहम आयोजन माना जाता रहा है। इस भोज में तमाम दलों के नेता, कार्यकर्ता और सामाजिक हस्तियां शामिल होती थीं। इसे राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और आपसी मेल-मिलाप के तौर पर भी देखा जाता रहा है। ऐसे में इस आयोजन का न होना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इस बार लालू के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव मकर संक्रांति पर अलग से दही-चूड़ा भोज का आयोजन कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि उनके आयोजन में कई राजनीतिक नेताओं और समर्थकों को आमंत्रित किया गया है। जिसमें एनडीए सरकार के मंत्री भी शामिल हैं। आज डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के आवास पर दही-चूड़ा भोज में तेज प्रताप शामिल हुए। बिहार में दही-चूड़ा भोज भले ही एक सांस्कृतिक परंपरा हो, लेकिन इसका राजनीतिक संदेश भी होता है। ऐसे में लालू यादव द्वारा इस आयोजन से दूरी बनाना और तेज प्रताप यादव का अलग आयोजन करना आने वाले समय में राजद की आंतरिक और बाहरी राजनीति के भी संकेत भी दे सकता है।



