बिहार में विकास चौथे से पांचवे गियर में जाएगा या बैक गियर में? ये चुनाव तय करेगा; लालू पर संजय झा का तंज
जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने लालू यादव के शासनकाल पर तंज करते हुए कहा कि मौजूदा वक्त में बिहार का विकास चौथे गियर में चल रहा है। ये चुनाव तय करेगा की विकास पांचवे गियर में जाएगा या फिर बैक गियर में जाएगा।

बिहार चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद से सियासी दलों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। प्रत्याशियों के चयन से लेकर एक-एक सीट पर माथापच्ची जारी है। इस बीच जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने आरजेडी चीफ लालू यादव के शासनकाल की याद दिलाते हुए कटाक्ष किया है। संजय झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक्स पर पोस्ट लिखा है। उन्होने कहा कि मौजूदा वक्त में बिहार का विकास चौथे गियर में चल रहा है। अब 2025 का चुनाव तय करेगा कि विकास की रफ्तार पांचवे गियर में जाएगी। या फिर बैक गियर में लौटेगी।
बुधवार को उन्होंने ट्वीट कर कहा कि लोग भूले नहीं हैं कि उदारीकरण के बाद के 15 वर्षों में जब देश के कई राज्यों में निवेश आ रहा था, आईटी इंडस्ट्री लग रही थी, बिहार में चरवाहा विद्यालय खुल रहे थे और अपहरण उद्योग को बढ़ावा दिया जा रहा था। उन 15 वर्षों के निगेटिव ग्रोथ ने बिहार को काफी पीछे धकेल दिया था।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दृढ़ संकल्प के कारण पिछले दो दशकों में बिहार पूरी तरह बदल गया है। नया बिहार अब टेकऑफ स्टेज में है। अगले पांच वर्षों में मुख्यमंत्री जी का पूरा फोकस हरेक जिले में उद्योग लगाने, करीब दो करोड़ महिलाओं को उनकी पसंद के सम्मानजनक स्वरोजगार से जोड़ने और एक करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरी या रोजगार उपलब्ध कराने पर होगा। इसमें केंद्र की एनडीए सरकार का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है।
आपको बता दें बिहार चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। दो चरणों में 6 नवंबर और 11 नवंबर को वोटिंग होगी। 14 नवंबर को नतीजे घोषित होंगे। वहीं जेडीयू में टिकट को लेकर उम्मीदवारों की पार्टी दफ्तर पर लाइन लगी हुई है। उम्मीदवार अपना बायोडाटा लेकर पहुंचे हुए हैं। एक सीट पर कई दावेदार हैं। सीटिंग सीट पर भी कई मजबूत दावेदार है।
हालांकि अभी तक एनडीए में सीट बंटवारे का ऐलान नहीं हुआ है। हालांकि ये माना जा रहा है कि जेडीयू से 100 सीटों पर नहीं लड़ेगी। 2020 के चुनाव में जदयू 115 सीटों पर लड़ी थी। और 43 सीटें जीती थी। इस बार जेडीयू पर अपने की प्रदर्शन को सुधारने का दबाव है।





