बिहार में क्यों गायब हुईं 90 प्रतिशत झील? छह वर्षों में 2693 से घटकर सिर्फ 258 रह गई संख्या

हिन्दुस्तान, पटना
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वर्ष 2018-19 में सभी 38 जिलों में हुई पहली जल निकाय गणना में राज्य में 2693 झीलें थीं। जबकि, 2024-25 में हुई दूसरी गणना में केवल 258 झीलें ही मिलीं।

बिहार में गायब हुईं 90 प्रतिशत झील
बिहार में गायब हुईं 90 प्रतिशत झील

आलोक चन्द्र, पटना

बिहार की 90 फीसदी से अधिक झीलों का वजूद खत्म हो गया है। ये झीलें महज छह वर्षों में समाप्त हुई हैं। जल निकाय गणना में यह चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। वर्ष 2018-19 में सभी 38 जिलों में हुई पहली जल निकाय गणना में राज्य में 2693 झीलें थीं। जबकि, 2024-25 में हुई दूसरी गणना में केवल 258 झीलें ही मिलीं। यानी, 2435 झीलें गायब हो चुकी हैं। योजना एवं विकास विभाग के तत्वावधान में यह गणना करायी गयी है। इसकी अंतिम रिपोर्ट केन्द्र सरकार के स्तर पर प्रकाशित की जाएगी।

रिपोर्ट में कई और हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। राज्य के दस जिलों में कोई झील नहीं बची है। इनमें अरवल, बेगूसराय, जहानाबाद, कटिहार, खगड़िया, लखीसराय, मधुबनी, जमुई, सारण, शिवहर शामिल हैं। छह जिले में केवल एक-एक झील ही बची है। इनमें गोपालगंज, मुंगेर, पूर्णिया, सीतामढ़ी, सीवान और सुपौल शामिल हैं।

दरभंगा ने चौंकाया

दरभंगा में वर्ष 2018-19 में 567 झीलें थीं, जबकि अब वहां केवल दो झील बची हैं। पहले जल निकाय की गणना में आठ जिले ऐसे थे, जहां 139 से 567 झीलें थीं। लेकिन आज किसी जिले में अधिकतम 50 झील भी नहीं बची हैं। बक्सर में सर्वाधिक 48 झीलें शेष बची हैं।

शेष जिलों में इतनी झीलें

पटना: 19, बांका: 14, भागलपुर: 18, भोजपुर: 37, बक्सर: 48, गया: 03, किशनगंज: 28, मधेपुरा: 05, मुजफ्फरपुर: 04, नालंदा: 02, नवादा: 03, पश्चिम चंपारण: 03, पूर्वी चंपारण: 06, रोहतास: 04, सहरसा: 06, समस्तीपुर: 04, शेखपुरा: 05, वैशाली: 07

कावर झील: दायरा 6786 से सिमटकर दो हजार हेक्टेयर हुआ

राज्य की सबसे बड़ी कावर झील का क्षेत्रफल वर्ष 1984 में 6786 हेक्टेयर था। इसी तरह कटिहार की गोगाबील झील तेजी से खत्म हो रही है। सहरसा का मत्स्यगंधा झील पूरी तरह सूख गई, इसका जीर्णोद्धार हो रहा है। मुंगेर की खड़गपुर झील, दरभंगा की कुशेश्वरस्थान झील, बोधगया की मच्छलिंद झील, पश्चिम चंपारण की उदयपुर झील, बक्सर की गोकुल झील संकट में हैं। लुप्त होने वाली 500 से अधिक झीलों से खेती होती थी। जबकि, 100 से अधिक झीलों का पर्यटकीय महत्व था।

क्यों गायब हो रहीं

अतिक्रमण: भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया, इन्हें भरकर आवासीय उपयोग

शहरीकरण: अनियोजित विस्तार व निर्माण और रियल स्टेट का दबाव

उपेक्षा: सरकारी तंत्र की उदासीनता से झीलें सिकुड़ रही

गाद: झीलों के तल में गाद जमा होने से क्षमता लगातार कम हो रही

जलवायु परिवर्तन: अनियमित और कम बारिश से जलस्रोत सूख रहे

इसके दुष्प्रभाव

भूजल का नीचे जाना: बड़े इलाके में भूजल का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है।

बाढ़-सूखा चक्र: प्राकृतिक जल भंडार क्षमता घटने से बाढ़ व सूखे दोनों की समस्या उत्पन्न हो रही

जैव विविधता को खतरा: इससे जैव विविधता को बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है। कई जलीय जीव खत्म हो गए। मछलियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो गयी।

कृषि संकट: खेती के लिए पानी की उपलब्धता कम हो रही है।

Sudhir Kumar

लेखक के बारे में

Sudhir Kumar

टीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।

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